Home मनोरंजन Padmaavat के जौहर सीन पर फिर छिड़ी बहस, स्वरा भास्कर के सवालों पर फिल्म के राइटर का करारा जवाब

Padmaavat के जौहर सीन पर फिर छिड़ी बहस, स्वरा भास्कर के सवालों पर फिल्म के राइटर का करारा जवाब

by Preeti Pal 3 September 2026, 2:31 PM IST
3 September 2026, 2:31 PM IST
Padmaavat के जौहर सीन पर फिर छिड़ी बहस, स्वरा भास्कर के सवालों पर फिल्म के राइटर का करारा जवाब

Padmaavat Jauhar scene: संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावत’ रिलीज के कई साल बाद भी चर्चा में बनी हुई है. इस बार बहस फिल्म की कहानी या बॉक्स ऑफिस को लेकर नहीं, बल्कि उसके सबसे फेमस जौहर सीन को लेकर छिड़ी है. एक्ट्रेस स्वरा भास्कर ने हाल ही में इस सीन पर सवाल उठाए, जिसके बाद फिल्म के को-राइटर प्रकाश कपाड़िया ने अपना रिएक्शन दिया है. प्रकाश कपाड़िया ने फिल्म में जौहर के सीन का बचाव करते हुए कहा कि फिल्म निर्माताओं ने इसे अपने शोध और ऐतिहासिक स्रोतों के आधार पर प्रस्तुत किया था. उनके मुताबिक, उस दौर की परिस्थितियां काफी मुश्किल थीं. इतिहास के उस संदर्भ को आज की सोच के हिसाब से बदला नहीं जा सकता.

स्वरा ने क्यों उठाए सवाल?

स्वरा भास्कर ने ‘पद्मावत’ के क्लाइमैक्स में दिखाए गए जौहर सीन को लेकर अपनी असहमति जताई थी. उनका सवाल इस बात पर था कि किसी ऐतिहासिक प्रथा को पर्दे पर किस तरह पेश किया जाता है. उसका मैसेज आज के लोगों तक कैसे पहुंच सकता है. स्वरा ने खासतौर पर रेप से बचने के लिए महिलाओं का सुसाइड करने को लेकर चिंता जताई थी. उनके कमेंट के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई. कुछ लोगों ने एक्ट्रेस की बातों का सपोर्ट किया. वहीं, कई लोगों का कहना था कि फिल्म ने जौहर को महिमामंडित करने के बजाय उस दौर की ऐतिहासिक परिस्थितियों के हिसाब से दिखाया था.

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हर दर्शक का अलग नजरिया

पद्मावत के राइटर प्रकाश कपाड़िया का कहना है कि किसी भी फिल्म को अलग-अलग दर्शक अपने नजरिए से देखते हैं. एक ही सीन किसी को ऐतिहासिक लग सकता है. वहीं, किसी दूसरे इंसान को उसमें कोई अलग मैसेज दिखाई दे सकता है. कपाड़िया के अनुसार, फिल्म की टीम ने जौहर के सीन को उस समय की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाया था. उनका तर्क है कि उस दौर की रिएलिटी को बदला नहीं जा सकता था. उन्होंने ये भी कहा कि फिल्म को लेकर विवाद कोई नई बात नहीं है. पद्मावत रिलीज होने से पहले भी विरोध और प्रदर्शन का सामना कर चुकी थी. फिल्म को लेकर आपत्तियां तब उठाई गई थीं, जब लोगों ने इसे देखा भी नहीं था. इसके बावजूद फिल्म साल 2018 में सिनेमाघरों तक पहुंची.

जौहर और केसरिया का जिक्र

प्रकाश कपाड़िया ने बातचीत में ‘केसरिया’ की परंपरा का भी जिक्र किया. ऐतिहासिक संदर्भों में इसे उन योद्धाओं से जोड़ा जाता है, जो ऐसी लड़ाई में उतरते थे जहां उनके जिंदा लौटने की उम्मीद बहुत कम मानी जाती थी. पद्मावत में जौहर के सीन को इसी लड़ाई के साथ दिखाया गया था. वैसे, इस पूरे विवाद ने एक बार फिर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या ऐतिहासिक घटनाओं को पर्दे पर बिल्कुल उसी तरह दिखाया जाना चाहिए, या फिर उन्हें आज के हिसाब से भी देखा जाना चाहिए? यही वजह है कि पद्मावत का जौहर सीन आज भी बहस का मुद्दा बना हुआ है.

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