Russia-Ukraine War : रूस और यूक्रेन के बीच चार साल से जारी जंग अभी किसी निर्णायक मोड़ पर नहीं पहुंच पाई है. साथ ही दूर-दूर तक संघर्ष समाप्त होने की कोई संभावना नहीं दिख रही है. खास बात यह है कि हर दिन एक नए बड़े हमले की खबर सामने आ जाती है. इसी कड़ी में मंगलवार को रूसी हवाई हमले में 9 यूक्रेनी नागरिकों की मौत हो गई. रूस ने मिसाइलों, ड्रोन और ग्लाइड बमों से यूक्रेन पर जोरदार हमला किया. इसी बीच राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि रूसी सेना ने यूक्रेन के दक्षिण-पूर्व में स्थित जापोरिज्जिया शहर पर रात भर हमले किए हैं. इसके अलावा उन्होंने यह भी दावा किया कि मास्को को बीते चार सालों से उत्तर कोरिया से मदद मिल रही है.
रणनीतिक साझेदार पर किए थे हस्ताक्षर
रूस के हमले में 9 लोगों की मौत हुई है और 19 लोग बुरी तरह घायल हुए हैं. जेलेंस्की ने सोमवार की देर रात में कहा कि रूस को प्योंगयांग बैलिस्टिक मिसाइलें भेज रहा है. साथ ही वह भारी संख्या में उत्तर कोरियाई सैनिकों की भी तैनाती करने जा रहा है. आपको बताते चलें कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग ने दो साल पहले एक रणनीतिक साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. इसमें वादा किया गया है कि अगर किसी भी देश पर हमला होता है, तो दूसरा देश उसकी मदद करेगा. किम ने यूक्रेन पर पुतिन के हमले का समर्थन करने के लिए हजारों सैनिक और भारी मात्रा में हथियार भेजे हैं. कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि मास्को के साथ इस सहयोग से उत्तर कोरिया की सैन्य क्षमताएं बेहतर हो रही हैं.
रूस बढ़ाएगा हथियारों का प्रोडक्शन
वहीं, जेलेंस्की ने चेतावनी दी है कि युद्ध के मैदान का अनुभव प्योंगयांग को अपने क्षेत्र के अन्य देशों को धमकाने में मदद करेगा. यूक्रेन का कहना है कि रूस बैलिस्टिक मिसाइलों का प्रोडक्शन बढ़ा रहा है. इसका मकसद है कि कीव में पैट्रियट एयर डिफेंस इंटरसेप्टर की भारी कमी का फायदा उठाना है. साथ ही यूक्रेन ने दावा किया है कि मास्को पूर्वी और दक्षिणी यूक्रेन में 1250 किलोमीटर लंबी फ्रंट लाइन पर नए हमले के लिए और सैनिक की भर्ती की तैयारी कर रहा है.
कूटनीतिक कोशिशें नाकाम हो गईं
युद्ध रोकने के लिए अमेरिका की अगुवाई में की गई कूटनीतिक कोशिशें नाकाम हो गई हैं. किसी भी समझौते पर दोनों पक्ष संतुष्ट नहीं हो पाए. वाशिंगटन का कहना है कि जब तक पुतिन को यह लगता रहेगा कि उनके पास अपने सभी मकसद को पूरा करने का कोई कारगर सैन्य रास्ता है, तब तक क्रेमलिन न तो गंभीर बातचीत करेगा और न ही अपनी मांगों पर कोई सार्थक समझौता करेगा. इसके अलावा यूक्रेन में पैट्रियट मिसाइल सिस्टम की कमी की वजह से रूस को आने वाली सर्दियों में यूक्रेन को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाने का मौका मिल सकता है.
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