Gaza Deal: 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद शुरू हुआ युद्ध अभी तक पूरी तरह खत्म नहीं हो पाया है. युद्धविराम और शांति की कोशिशों के बीच गाजा में कुछ समय के लिए तनाव कम हुआ था. इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का गठन किया गया. इस बोर्ड का उद्देश्य गाजा के पुनर्निर्माण और वहां की व्यवस्था को लेकर आगे की योजना तैयार करना था. हालांकि, गाजा में इजरायली सेना (IDF) की ओर से छिटपुट हमलों की खबरें सामने आती रहीं. इसी बीच इजरायल और अमेरिका के बीच गाजा को लेकर प्रस्तावित योजना पर मतभेद सामने आए हैं. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पिछले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से गाजा के लिए घोषित समझौते को खारिज कर दिया. नेतन्याहू ने कहा कि इजरायली सेना तब तक पीछे नहीं हटेगी, जब तक हमास के हथियार पूरी तरह खत्म नहीं कर दिए जाते हैं. कैबिनेट की बैठक में उन्होंने कहा कि इजरायल 15-सूत्रीय दस्तावेज को खारिज करता है, लेकिन वह अभी भी वाशिंगटन के साथ गाजा को लेकर योजनाओं पर चर्चा कर रहा है.
नहीं खत्म करना चाहता इजरायल ‘युद्ध’
पीस ऑफ बोर्ड को स्थापित करने से पहले डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि चरमपंथी समूह ‘हमास’ के हथियार खत्म होने के साथ ही इजरायली सेना पीछे हट जाएगी. हालांकि, हमास की टॉप लीडरशिप की ओर से हथियार डालने के बाद भी इजरायल फिलिस्तीनी इलाके में अपना दबदबा बनाने के लिए लगातार कार्रवाई कर रहा है. इजरायली सेना का कब्जा फिलिस्तीनी के आधे से ज्यादा इलाके पर हो चुका है और यहां पर करीब 20 लाख लोग रहते हैं जो काफी हद तक बर्बाद हो चुके हैं. दूसरी ओर नेतन्याहू के बयान पर व्हाइट हाउस की तरफ से कोई तत्काल टिप्पणी नहीं आई है. वहीं, हमास के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य बासेम नईम ने कहा कि हम रोड मैप के लिए प्रतिबद्ध हैं. उन्होंने कहा कि समूह को उम्मीद है कि मध्यस्थता करवाने वाले और अमेरिका नेतन्याहू पर दबाव डालेंगे. इसके अलावा नेतन्याहू को घरेलू तनाव का भी सामना करना पड़ रहा है क्योंकि वह 27 अक्टूबर को होने वाले आम चुनाव में सत्ता से बाहर होने से बचने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. बता दें कि 7 अक्टूबर, 2023 को हमास के नेतृत्व में इजरायल पर हुए हमले के बाद गाजा में युद्ध शुरू हुआ था और यहां पर अभी तक रुक-रुककर हमले जारी रहे हैं.

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लाल सागर पर हूतियों का हमला
दूसरी तरफ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के मैनेजमेंट को लेकर ईरान और ओमान के बीच संभावित समझौते की जानकारी सामने आई है. तेहरान ने संकेत दिया है कि दुश्मन देशों से जुड़े जहाजों को वहां से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी. यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर तट पर सरकार के नियंत्रण वाले एक बंदरगाह पर हमला किया और इसके कारण शिपिंग मार्ग खतरे में आ गए हैं. हूती सेना के एक सूत्र ने बताया कि इस हमले में हथियारों के गोदामों और सऊदी सैनिकों के ठिकानों को निशाना बनाया गया है. साथ ही बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से रिहायशी इलाकों और सऊदी सैनिकों के ठिकानों को निशाना बनाया गया. हालांकि, एयर डिफेंस सिस्टम ने कुछ ड्रोन को बीच में ही रोक दिया. रविवार को हुए हमले में भी ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया था. यमनी सरकार की सहयोगी ‘नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज’ ने बताया कि उस हमले में चार सैनिक समेत 7 लोग मारे गए और 15 आम नागरिक घायल भी हुए. यमन सरकार में सूचना मंत्रालय के असिस्टेंट अंडर-सेक्रेटरी फायेद अल-नोमान ने कहा कि सऊदी ड्रोन द्वारा यमन के हज्जा और सादा प्रांतों के ऊपर हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करने के जवाब में हूतियों ने सऊदी शहर जाजान में अरामको रिफाइनरी को ड्रोन से निशाना बनाया. सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने बताया कि अरामको रिफाइनरी की एक फैसिलिटी में आग लग गई. हालांकि, वहां पर कोई हताहत नहीं हुआ. वहीं, इन हमलों से 2022 में हुए समझौते के बाद यमन में गृहयुद्ध के फिर से भड़कने का खतरा पैदा हो गया है.

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क्या ईरान की नई रणनीति आएगी काम?
मध्य पूर्व में जारी संकट के बीच ईरान ने अपनी ताकतवर ‘सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल’ के नए प्रमुख मोहसेन रेजाई की घोषणा की है. वह सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई के मिलिट्री एडवाइज़र और रिवोल्यूशनरी गार्ड के पूर्व कमांडर भी रह चुके हैं. इस संस्था में कई तरह की राजनीतिक राय और आपसी प्रतिद्वंद्विताएं हैं. यह एक बार फिर से युद्ध में कई वरिष्ठ अधिकारियों के मारे जाने के बाद खुद को ढालने की कोशिश कर रही है. रेजाई, मोहम्मद बाघेर जोलघाद्र की जगह लेंगे. जोलघाद्र ने यह पद तब संभाला था जब मार्च में इजरायली हमले में अली लारीजानी मारे गए थे. साथ ही जोलघाद्र अब खामेनेई के राजनीतिक सलाहकार बनेंगे. वहीं, रेजाई ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि ईरान कभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य से किसी अनधिकृत रास्ते की इजाजत नहीं देगा. युद्ध शुरू होने से पहले इस समुद्री गलियारे को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग माना जाता था. लेकिन ईरान पर हमला होने के बाद तेहरान ने इस पर अपना दावा करना शुरू कर दिया और अब तो ईरानी सरकार साफ कहती है कि उसकी अनुमति के बिना यहां से कोई भी जहाज नहीं गुजरेगा. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने बताया कि होर्मुज में नए समुद्री रास्तों को लेकर ओमान के साथ बातचीत अंतिम चरण में है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुल जाएगा. इस कदम के लिए कुछ शर्तों को पूरा करना जरूरी है, जिनके बारे में बिचौलियों के जरिए जानकारी दी जा चुकी है.

ईरान ने रखी अमेरिका के सामने ये शर्त
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने शनिवार को कहा कि जब तक अमेरिका अपना व्यवहार नहीं सुधारता तब तक यह समुद्री गलियारा बंद रहेगा. काउंसिल ने मांग की कि अमेरिका दोबारा कभी ईरान को धमकी न दे. साथ ही अमेरिका और इजरायल जल्द से जल्द ईरान और उसके सहयोगी सशस्त्र समूहों के साथ युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करें. साथ ही हमारे ऊपर लगाए गए प्रतिबंध को तत्काल हटाया जाए और रोकी गई संपत्ति को बिना किसी शर्त के जारी किया जाए. इसके अलावा काउंसिल ने मांग की है कि अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी हटाए और उस इलाके से अपनी सेना को भी वापस बुलाए और अमेरिका युद्ध में हुए नुकसान को देना चाहिए. फिलहाल अमेरिका ने इन मांगों पर कोई टिप्पणी नहीं की है. रविवार को ट्रंप ने ‘एक्सियोस’ (Axios) से कहा कि ईरान के साथ सिर्फ आंशिक बातचीत हो रही है और आर्थिक दबावों का असर होने दिया जा रहा है. इसके बाद अरागची ने कहा कि अमेरिका के साथ बिचौलियों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान जारी है, लेकिन इसे बातचीत नहीं माना जा सकता है. उन्होंने आगे कहा कि बातचीत तब तक फिर से शुरू नहीं हो सकती जब तक अंतरिम समझौते का उल्लंघन बंद न हो जाए और अमेरिका उन प्रावधानों को ठीक न कर ले जिनका उसने उल्लंघन किया था.
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क्या बातचीत के बाद खुलेगा होर्मुज?
वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य के दूसरी तरफ स्थित ईरान और ओमान एक अस्थायी समझौते को अंतिम रूप देने पर काम कर रहे हैं. अगर यह समझौता पूरा हो जाता है तो इसको खोल दिया जाएगा. इस समझौते के तहत जहाज ईरान के पास से अंदर आएंगे और ओमान के पास से बाहर निकलेंगे. बातचीत से जुड़े दो लोगों ने नाम न बताने की शर्त पर यह जानकारी दी. इस अंतरिम अवधि के दौरान जहाजों को कोई फीस या टोल नहीं देना होगा. यह समझौता अमेरिका और ईरान के बीच हुए अलग अंतरिम समझौते को फिर से बहाल करने के लिए बनाया गया है. उन दो लोगों ने बताया कि इस समझौते को गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के सदस्यों का समर्थन भी प्राप्त है. साथ ही उम्मीद है कि ईरान, ओमान, अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र के इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) द्वारा इसकी संयुक्त रूप से घोषणा की जाएगी. इसी बीच उन्होंने यह भी बताया कि शर्तों में बदलाव भी हो सकता है. ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने जलडमरूमध्य के प्रबंधन की योजना की रूपरेखा को मंजूरी दे दी है. लेकिन दुश्मन देशों के जहाजों की आवाजाही पर रोक रहेगी. संसद के पीठासीन बोर्ड के सदस्य ने कहा कि जिन देशों ने ईरान को नुकसान पहुंचाया है, वे तब तक यहां से नहीं गुजर सकते जब तक कि वे इसकी भरपाई न कर दें.

खामेनेई की मौत के बाद जनता हुई एकजुट
विदेश मंत्री के तौर पर मोहम्मद जवाद जरीफ ने 2015 के परमाणु समझौते में बातचीत में मदद की थी. उन्होंने हाल ही में एक लेख में लिखा था कि युद्ध में ईरान की कामयाबियों ने कूटनीति के लिए एक असाधारण मौका दिया है. लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही कोई समझौता नहीं हुआ, तो आर्थिक सुधार मुश्किल हो जाएगा. खासकर अमेरिकी चुनावों के बाद आंतरिक अशांति या फिर से आक्रामकता की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. इस युद्ध में पहले ही कई चौंकाने वाली घटनाएं हो चुकी हैं. गौरतलब हो कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों के पहले दौर में ईरान के सर्वोच्च नेता और अन्य शीर्ष अधिकारियों के मारे जाने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि यह युद्ध कुछ ही हफ्तों में खत्म हो जाएगा. इसके बजाय इस संघर्ष ने ईरान के नेताओं का हौसला बढ़ाया है और उनके समर्थकों को एकजुट कर दिया.
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