Russian Court: रूसी अदालत ने प्रमुख विपक्षी नेता लेव श्लोसबर्ग को यूक्रेन युद्ध की आलोचना के आरोप में 11 साल और एक महीने जेल की सजा सुनाई है. याब्लोको पार्टी के वरिष्ठ सदस्य श्लोसबर्ग पर यह कार्रवाई अगले महीने होने वाले संसदीय चुनावों से ठीक पहले हुई है. फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद से क्रेमलिन द्वारा विरोध और असहमति की आवाजों को दबाने का अभियान लगातार जारी है. मानवाधिकार संगठन और विश्लेषक इस अदालती फैसले को रूसी सरकार द्वारा चुनावों से पहले विपक्ष को पूरी तरह से चुप कराने और अपनी सत्ता पर पकड़ मजबूत करने की एक और बड़ी कोशिश के रूप में देख रहे हैं.
युद्ध का विरोध कर रही है याब्लोको
याब्लोको एकमात्र ऐसी आधिकारिक राजनीतिक पार्टी है जो खुले तौर पर युद्ध का विरोध कर रही है. 63 साल के श्लोसबर्ग याब्लोको के डिप्टी चेयरमैन हैं और 2016-21 के दौरान प्सकोव की क्षेत्रीय विधानसभा में सदस्य रह चुके हैं. उन पर मॉस्को से लगभग 600 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित प्सकोव शहर में रूसी सेना को बदनाम करने और उसके बारे में गलत जानकारी फैलाने के आरोप में मुक़दमा चलाया गया. ये आरोप एक बहस और उनके टेलीग्राम चैनल पर एक ब्रिटिश टैब्लॉयड के पहले पन्ने की पोस्ट से जुड़े थे. उस पोस्ट में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की तस्वीर के बगल में एक खून से लथपथ महिला की तस्वीर थी और हेडलाइन थी- उसका खून… उसके हाथ”. श्लोसबर्ग ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया है.
सरकार ने लेव को बताया विदेशी एजेंट
पिछले दो सालों में श्लोसबर्ग का यह दूसरा ट्रायल था. उन्हें विदेशी एजेंट भी करार दिया गया है. एक ऐसा लेबल जिसका रूस में बहुत बुरा मतलब निकाला जाता है और जिसकी वजह से सरकार की कड़ी नज़र रहती है. उन्हें विदेशी एजेंट से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने का दोषी ठहराया गया था. दिसंबर 2025 में, नए आरोपों के तहत उन्हें ट्रायल से पहले हिरासत में ले लिया गया था और तब से वे जेल में हैं. शुक्रवार को कोर्ट में अपने आखिरी बयान में श्लोसबर्ग ने कहा कि 30 सालों में रूस ने आज़ादी की उम्मीदों से लेकर इंसानी और नागरिक अधिकारों और आज़ादी के लगभग पूरी तरह खत्म होने तक का सफ़र तय किया है.
मातृभूमि के प्रति प्रेम की मिली सजाः याब्लोको
उन्होंने कहा कि यूक्रेन युद्ध ने बिना किसी अपवाद के हर रूसी नागरिक की ज़िंदगी बदल दी है और भविष्यवाणी की कि जब मरने वालों की असली संख्या पता चलेगी, तो पूरा देश कांप उठेगा. फ़ैसले के बाद, याब्लोको पार्टी ने कहा कि श्लोसबर्ग को मातृभूमि के प्रति प्रेम और युद्धविराम की मांग के लिए क्रूर सज़ा मिली है. टेलीग्राम पर एक बयान में, पार्टी ने कहा कि श्लोसबर्ग इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील करेंगे. एमनेस्टी इंटरनेशनल ने श्लोसबर्ग के ख़िलाफ़ आए फ़ैसले की निंदा की. ग्रुप की पूर्वी यूरोप और मध्य एशिया की डायरेक्टर मैरी स्ट्रथर्स ने कहा कि शांति की अपील करने के लिए अभिव्यक्ति की आज़ादी के अधिकार का इस्तेमाल करने पर उन पर मनमाने ढंग से मुकदमा चलाना और सज़ा देना, साफ़ तौर पर बदले की कार्रवाई है.
बिना शर्त रिहा करे सरकार
उनके बयान में आगे कहा गया कि रूसी अधिकारियों को लेव श्लोसबर्ग को तुरंत और बिना किसी शर्त के रिहा करना चाहिए और उनकी सज़ा को रद्द करना चाहिए. उन्हें शांतिपूर्ण ढंग से युद्ध-विरोधी विचार रखने को अपराध मानने वाले कानूनों को खत्म करना चाहिए और याब्लोको (Yabloko) के सदस्यों और समर्थकों पर हो रही कार्रवाई को रोकना चाहिए. कहा कि सभी रूसियों के अभिव्यक्ति, संगठन बनाने, शांतिपूर्ण सभा करने और राजनीतिक भागीदारी के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए.
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News Source: PTI
