Middle East Tension: संयुक्त राष्ट्र की सबसे बड़ी मानवाधिकार संस्था द्वारा नियुक्त विशेषज्ञों का कहना है कि उन्हें इस बात के ‘ठोस आधार’ मिले हैं कि अमेरिका ने ईरान में किए गए दो हमलों में युद्ध अपराध किए हैं. इनमें दक्षिणी शहर मिनाब के एक स्कूल पर किया गया हमला भी शामिल है. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद द्वारा गुरुवार को जारी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान की धार्मिक सरकार ने अपने ही लोगों के खिलाफ मानवता के विरुद्ध अपराध किए हैं. हालांकि, यह रिपोर्ट कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, लेकिन इससे ईरान में युद्ध के दौरान कथित अपराधों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय सबूतों में इजाफा हो सकता है. भविष्य में अंतरराष्ट्रीय अदालतों में न्याय की मांग से जुड़ी कानूनी प्रक्रियाओं में भी इस रिपोर्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है.
HR की रिपोर्ट का अमेरिका ने दिया जवाब
ईरान पर तथ्य-खोज मिशन की अध्यक्षता बांग्लादेश की कानूनविद सारा हुसैन कर रही हैं. इस मिशन में स्वतंत्र विशेषज्ञ शामिल हैं और इसे 2022 में जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष मानवाधिकार संस्था ‘मानवाधिकार परिषद’ ने बनाया था. विशेषज्ञों को सोमवार को परिषद के सामने अपनी रिपोर्ट पेश करनी थी. इस परिषद में संयुक्त राष्ट्र के 47 सदस्य देश शामिल हैं. अब इस मु्द्दे को लेकर व्हाइट हाउस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और हाउस की प्रवक्ता एना केली ने कहा कि मानवाधिकार संस्था ने दशकों से गैर-गंभीर और बेतुकी बातें करने के अलावा मानवाधिकारों के लिए कुछ भी हासिल नहीं किया है. विदेशों में अमेरिकियों को मारा है और होर्मुज जलडमरूमध्य में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम दिया है. साथ ही इस क्षेत्र में अपने पड़ोसियों पर अंधाधुंध हमले किए हैं.

अमेरिका ने ‘अंधाधुंध’ हमले किए
अंतरराष्ट्रीय तथ्य-खोज मिशन का कहना है कि अमेरिका ने ‘अंधाधुंध’ हमले किए. संस्था ने आगे कहा कि अमेरिकी युद्ध अपराधों पर उनकी रिपोर्ट मुख्य रूप से अमेरिका द्वारा किए गए दो हवाई हमलों पर केंद्रित है, जिनमें महिलाओं और बच्चों समेत 178 आम नागरिक मारे गए थे. एसोसिएटेड प्रेस की जांच के अनुसार, फरवरी में ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध की शुरुआत में एक अमेरिकी मिसाइल मिनाब के शजरे तैय्यबेह स्कूल से टकराई थी. हालांकि, अभी तक इस घटना का कोई अंतिम ब्यौरा नहीं मिला है. दूसरी ओर ईरान के सरकारी मीडिया ने कहा है कि इस हमले में 168 लोग मारे गए, जिनमें से ज्यादातर बच्चे शामिल थे. संयुक्त राष्ट्र की टीम की जांच के नतीजों पर जारी एक बयान में कहा गया कि मिशन को यह मानने के लिए ठोस आधार मिले हैं कि अमेरिका ने अंधाधुंध हमले करके युद्ध अपराध किया, जिसके परिणामस्वरूप नागरिकों की जान गई. साथ ही वे घायल हुए या नागरिक संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा.
यहूदी-विरोधी भावनाएं फैला रहा
मिशन की रिपोर्ट के जवाब में विदेश विभाग ने व्हाइट हाउस जैसा ही रुख अपनाते हुए कहा कि ट्रम्प प्रशासन मानवाधिकार परिषद से इसलिए हट गया था कि वह दमनकारी सरकारों को खुश करते हुए अमेरिका-विरोधी बातें और यहूदी-विरोधी भावनाएं फैला रहा था. विभाग ने आगे कहा कि हम इस रिपोर्ट में बताए गए नतीजों को विश्वसनीय नहीं मानते हैं. विशेषज्ञों ने अपनी रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला कि स्कूल की इमारत ही हमले का मुख्य निशाना थी. साथ ही किसी गलत हमले या स्कूल के बगल में स्थित ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के परिसर पर हमले के दौरान हुए अनजाने नुकसान का नतीजा नहीं था. हालांकि, ट्रम्प प्रशासन ने अभी तक सीधे तौर पर जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है और न ही स्कूल पर बमबारी की पेंटागन की जांच के नतीजे जारी किए हैं. संयुक्त राष्ट्र समर्थित टीम ने अपने आरोप दो हमलों पर आधारित तय किए. इसमें एक तो टॉमहॉक मिसाइलों ने स्कूल को निशाना बनाया और दूसरा जिसमें प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइलों ने दक्षिणी शहर लामेर्ड में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और रिहायशी इलाके पर टंगस्टन छर्रे बिखेरे. यह दोनों ही हमले 28 फरवरी को किए गए थे. संयुक्त राष्ट्र समर्थित टीम ने कहा कि इसमें 22 आम नागरिक मारे गए. साथ ही अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने लामेर्ड पर हुए हमले की जिम्मेदारी लेने से इनकार किया है.

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हत्याएं बहुत बड़े पैमाने पर हुईं
विशेषज्ञों ने ईरान सरकार पर भी मानवता के खिलाफ अपराध करने का आरोप लगाया है. टीम ने पाया कि ईरान में सरकारी सुरक्षा बलों द्वारा की गई हत्याएं बहुत बड़े पैमाने पर हुईं और आम नागरिकों को अपनी ही सरकार द्वारा मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का सामना करना पड़ा. टीम ने कहा कि ईरानी सुरक्षा बलों ने पिछले दो वर्षों में हिंसक दमन किया. इसमें भीड़ पर असॉल्ट राइफल से गोली चलाना, प्रदर्शनकारियों की पिटाई करना और स्वास्थ्य कर्मियों को गिरफ्तार करना शामिल है. विशेषज्ञों ने कहा कि हिरासत में लिए गए लोगों को यातना दी गई और उन्हें कानूनी सलाह नहीं मिली, जिससे उनके परिवार उनके ठिकाने के बारे में अंधेरे में रहे. उन्होंने कहा कि तेहरान सरकार ने मौत की सजा की संख्या को बढ़ा दिया है और 70 से ज्यादा लोगों को फांसी दी है. रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि इनमें से कई गंभीर उल्लंघन मानवता के खिलाफ अपराध की श्रेणी में आते हैं, जिनमें हत्या, कैद, यातना और नागरिकों पर बड़े पैमाने पर और व्यवस्थित हमले के तहत किए गए अन्य अमानवीय कृत्य शामिल हैं.
US और ईरान दोनों को मुआवजा देना चाहिए
मानवाधिकार परिषद के एक बयान में कहा गया कि अमेरिका और ईरान दोनों को मुआवजा देना चाहिए. विशेषज्ञों ने कहा कि अमेरिका और ईरान को सभी अधिकारों के उल्लंघन और अपराधों को रोकना चाहिए. साथ ही पीड़ितों को पूरा मुआवजा देना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण पर आधारित यह रिपोर्ट ईरान के अंदर और बाहर 73 लोगों से बातचीत, दस्तावेजीकरण, सैटेलाइट इमेज, फोटो, वीडियो सामग्री और विश्वसनीय संगठनों से मिली जानकारी पर आधारित थी. ईरान में चल रहे संघर्ष के कारण लोगों का अपने घरों से विस्थापित होना पड़ा. साथ ही इंटरनेट बंद होना और दोनों सरकारों से पूरा सहयोग न मिलना कुछ हद तक बाधा जरूर सामने आई थी. उन्होंने कहा कि ईरान सरकार से जानकारी के लिए विशेषज्ञों के लगभग तीन दर्जन अनुरोधों का कोई जवाब नहीं मिला और इसी तरह जून में अधिकारियों के साथ बैठक के अनुरोधों का भी कोई जवाब नहीं मिला.

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ईरान ने कर दिए थे पांच तेल टैंकर तबाह
बता दें कि युद्धविराम असफल होने के बाद 9 सितंबर को एक बार फिर से अमेरिका और ईरान के बीच नए हमलों को दौर शुरु हो गया था. US मिलिट्री ने कहा कि उसने अपने वॉरशिप पर हुए नए हमलों के जवाब में ईरान के पांच तेल टैंकर तबाह कर दिए. US ने ईरान के मुख्य तेल एक्सपोर्ट हब खार्ग द्वीप और ओमान की खाड़ी में इन टैंकरों को निशाना बनाया. इससे पहले 5 सितंबर को भी US ने तीन ईरानी टैंकरों को नष्ट कर दिया था. इसके जवाब में तेहरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर हमला किया.
वहीं, US सेंट्रल कमांड ने कहा कि मिलिट्री ने मंगलवार को टैंकरों पर हमला किया, क्योंकि इससे पहले रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने पिछले दो दिनों में दो बार नेवी के एक वॉरशिप को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया. एक बयान में कहा गया कि US वॉरशिप ने ईरानी हमलों की कोशिश को सफलतापूर्वक चकमा दिया और इलाके के पानी में गश्त करता रहा. किसी भी अमेरिकी कर्मचारी को कोई नुकसान नहीं हुआ. इसमें कहा गया कि मंगलवार को ओमान की खाड़ी में नष्ट किए गए ईरानी टैंकर किविक, चारमीनार, होराइजन और रीस्को थे. US मिलिट्री ने डेर्या नाम के जहाज को भी नष्ट कर दिया, जो होर्मुज स्ट्रेट में खार्ग आइलैंड के पास था. बयान में कहा गया कि हमलों से पहले पांच जहाजों के क्रू को जहाज छोड़ने के लिए कहा गया था. US फोर्स ने शनिवार को ईरान के तीन तेल टैंकरों को तबाह किया था, जब ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने एक US एयरक्राफ्ट कैरियर और डिस्ट्रॉयर पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला करने की कोशिश की. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जरूरी हुआ, तो वे ईरान के सीमित और खुले तेल बेड़े को नष्ट कर देंगे.

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अमरिकी ठिकानों को निशाना बनाया
ईरानी सरकारी टेलीविजन ने भी US हमलों की रिपोर्ट दी, जिसमें कहा गया था कि US सेना ने जास्क के दक्षिणी बंदरगाह और फारस की खाड़ी में खार्ग आइलैंड के पास ईरानी तेल टैंकरों पर हमला किया था. ईरान के सरकारी मीडिया ने कहा कि अमेरिकी हमलों के बाद, ईरान ने जॉर्डन में US ठिकानों पर मिसाइलें दागीं. जॉर्डन की मिलिट्री ने कहा कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने उसके इलाके की ओर दागी गई 18 बैलिस्टिक मिसाइलों को रोक लिया और दो दूसरी ऐसी जगहों पर गिरीं जहां कोई नहीं रहता. जॉर्डन यूएस का सहयोगी और उसने अमरिकी आर्मी के ठिकानों के लिए अपनी जमीन भी दे रखी है. इसी कारण किंगडम के मिलिट्री बेस बार-बार ईरानी हमलों का निशाना बन रहे हैं.
ट्रंप प्रशासन ने भी ईरान की एविएशन इंडस्ट्री के कुछ और हिस्सों पर भी बैन लगा दिए. इसके तहत दो दर्जन से ज्यादा कमर्शियल और प्राइवेट एयरलाइंस के साथ-साथ विदेशी कार्गो सर्विस प्रोवाइडर्स को टारगेट किया गया. यह तेहरान को उसके बाकी ट्रेडिंग पार्टनर्स से अलग करने की नई कोशिश है. US और ईरान दोनों होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल करना चाहते हैं, जहां से युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल गुजरता था. नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों से पहले एनर्जी की बढ़ती कीमतें ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के लिए राजनीतिक दिक्कतें खड़ी कर रही हैं. अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने वाली डील भी असफल हो गई.
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