West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता रिताब्रता बनर्जी ने शुक्रवार को चुनाव आयोग (EC) के उस फैसले का स्वागत किया, जिसमें TMC के विरोधी गुटों को पार्टी के नाम और ‘घास पर दो फूल’ वाले चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया गया है. EC के आदेश के बाद रिताब्रता ने कहा कि किसी भी राजनीतिक पार्टी को निजी कंपनी की तरह नहीं चलाया जा सकता. उन्होंने कहा कि किसी राजनीतिक संगठन का कोई ‘वारिस’ नहीं हो सकता और लोकतंत्र में तानाशाही के लिए कोई जगह नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश से यह स्पष्ट होता है कि राजनीतिक संगठनों में वंशवादी राजनीति के लिए कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए.
राजनीतिक दल है, निजी कंपनी नहीं
रिताब्रता बनर्जी ने कहा कि राजनीतिक पार्टी कोई प्राइवेट लिमिटेड कंपनी नहीं होती और न ही किसी राजनीतिक पार्टी का कोई वारिस हो सकता है. चुनाव आयोग का ये फैसला टीएससी को लेकर खींचतान के बीच आया है. शुरुआत में ये दरारें विधानसभा में दिखीं, फिर संसदीय स्तर तक फैलीं और अब पार्टी के सबसे बड़ी चुनावी पहचान तक पहुंच गई है. वहीं, अपने अंतरिम आदेश में चुनाव आयोग ने कहा कि उसने ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस में दो विरोधी गुटों की पहचान की है. इसमें से एक का नेतृत्व ममता बनर्जी कर रही हैं और दूसरे का नेतृत्व बागी रिताब्रता कर रहे हैं.
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आगामी उपचुनाव में नहीं मिलेगा TMC का चुनाव चिह्न
आयोग ने कहा कि इन विरोधी दावों पर ‘चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968’ के पैरा 15 के तहत ठोस फैसले की जरूरत है. उन्होंने आगे कहा कि फैसला होने तक नंदीग्राम और रेजीनगर में 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनावों में किसी भी गुट को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम या ‘फूल और घास’ वाले चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं होगी. आयोग ने दोनों गुटों से स्पष्ट कहा है कि वे शुक्रवार सुबह 11 बजे तक EC को नामों के तीन विकल्प और तीन खाली चुनाव चिह्न सौंपे. इस अंतरिम व्यवस्था ने उस पार्टी के लिए चुनावी स्थिति को अजीब बना दिया है, जिसका चुनाव चिह्न 1998 में कांग्रेस से अलग होकर TMC बनाने के बाद से ही ममता बनर्जी की पहचान से गहराई से जुड़े रहा है.
ममता ने EC के आदेश से जताई नाराजगी
दूसरी ओर पार्टी पर नियंत्रण को लेकर चल रहे विवाद ने अब सीधा चुनावी रूप ले लिया है. अब दोनों गुटों के नेतृत्व को दूसरी पहचान के साथ मतदाताओं का समर्थन हासिल करना होगा. रितब्रत बनर्जी ने सोशल मीडिया पोस्ट में राजनीति को लगातार चलने वाली लड़ाई बताया, जिसमें जरूरतें और प्राथमिकताएं बदलती रहती हैं. साथ ही उन्होंने संविधान में शामिल लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई है. वहीं, ममता बनर्जी गुट ने EC के आदेश पर नाराजगी जताई. टीएमसी के नेता कुणाल घोष ने कहा कि पार्टी के लिए एकमात्र चेहरा ममता बनर्जी ही हैं. इस दौरान घोष ने आरोप लगाया कि केंद्र और बीजेपी ने चुनाव आयोग का गलत इस्तेमाल किया है और दावा किया कि इस घटनाक्रम से राजनीतिक लड़ाई खत्म नहीं होगी.
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News Source: PTI
