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कश्मीर पर एर्दोगन की टिप्पणी से भारत नाराज, MEA ने दिया जवाब- बाहरी पक्ष का कोई अधिकार नहीं

by Sachin Kumar 29 September 2026, 8:06 PM IST (Updated 29 September 2026, 8:07 PM IST)
29 September 2026, 8:06 PM IST (Updated 29 September 2026, 8:07 PM IST)
UNGA President Recep Tayyip Erdogan India MEA

Turkish President: तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) को संबोधित करते हुए कहा था कि कश्मीर मुद्दे का समाधान बातचीत के जरिए होना चाहिए. उन्होंने कहा था कि दक्षिण एशिया में कश्मीर समेत सभी विवादों का हल संयुक्त राष्ट्र के ढांचे के तहत बातचीत के माध्यम से निकाला जाना चाहिए.

एर्दोगन के इस बयान के करीब एक सप्ताह बाद भारत ने जवाब दिया है. विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान तुर्किए के राष्ट्रपति की ओर से केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर को लेकर की गई अनावश्यक टिप्पणियों को सिरे से खारिज करता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता से जुड़ा मामला है. इस मुद्दे पर किसी बाहरी पक्ष को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है.

भारत ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ के पक्ष में

रणधीर जायसवाल ने कहा कि न्यूयॉर्क में UN जनरल असेंबली के दौरान भारत, ब्राज़ील और दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्रियों के स्तर पर एक बैठक हुई थी. बैठक के बाद तीनों देशों ने एक बयान जारी किया. यह एक संयुक्त बयान है जिसमें तीनों देशों की सामूहिक राय को शामिल किया गया है. इसमें कई आर्थिक और विकास से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ कुछ राजनीतिक मुद्दों को भी उठाया गया है. जहां तक फिलिस्तीन पर भारत के नजरिए की बात है, तो हम ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ के पक्ष में हैं.

फारस की खाड़ी से आ रहे हैं भारतीय जहाज

इसके अलावा जायसवाल ने मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष को लेकर कहा कि फारस की खाड़ी में हमारे छह भारतीय झंडे वाले कमर्शियल जहाज हैं. हमारे पास छह विदेशी झंडे वाले जहाज भी हैं जो भारत के लिए सामान ले जा रहे हैं. इन जहाजों पर लगभग 163 भारतीय नाविक मौजूद हैं. साथ ही 4500 से ज्यादा भारतीय नाविक अलग-अलग कमर्शियल जहाजों पर हैं. हमारा शिपिंग मंत्रालय इन जहाजों की आवाजाही पर लगातार नजर रख रहा है और इन सभी नाविकों की भलाई का ध्यान रख रहा है. जरूरत पड़ने पर हमारे दूतावासों और दूसरे संबंधित लोगों के जरिए उनकी भलाई और कल्याण के लिए जरूरी कदम उठाए जाते हैं. हम विदेश में मौजूद अपने नाविक समुदाय की सुरक्षा और भलाई के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं.

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सभी सदस्य मिलकर फैसला करते हैं

दूसरी ओर शंघाई सहयोग संगठन(SCO) के बारे में जानकारी साझा करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि SCO की सदस्यता के बारे में सभी सदस्य मिलकर फैसला करते हैं. यही वजह है कि जब भी सदस्यता का कोई मुद्दा सामने आता है, तो सदस्य ही मिलकर तय करते हैं कि आगे कैसे बढ़ना है. वहीं, भारत-चीन संबंधों पर उन्होंने कहा कि ब्रिक्स समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी के बीच नेताओं के स्तर की बैठक हुई थी. इस दौरान दोनों नेताओं ने इस रिश्ते को लेकर दिशा-निर्देश दिए थे और अब हम उसे आगे बढ़ा रहे हैं.

न्यूयॉर्क में सीमा-पार आतंकवाद पर विदेश मंत्री एस जयशंकर की टिप्पणी पर भी जायसवाल ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि बस इस बात पर जोर देना चाहूंगा कि विदेश मंत्री ने एक बार फिर इस बात को रेखांकित किया है कि सीमा-पार आतंकवाद एक बड़ी चिंता का विषय है और इस वैश्विक खतरे से निपटने के लिए देशों को एकजुट होने की जरूरत है.

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News Source: ANI

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