Shaan Birthday Special: शान की आवाज सुनते ही 90s और 2000s की यादें ताजा हो जाती हैं. ‘तन्हा दिल’, ‘मुसु मुसु हासी’, ‘चांद सिफारिश’, ‘जब से तेरे नैना’ और ‘वो लड़की है कहां’ जैसे गानों ने शान को ऐसी पहचान दी कि उनकी आवाज सुनते ही दिल में एक अलग ही फीलिंग जाग जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस शान को आज बॉलीवुड के टॉप सिंगर्स में गिना जाता है, उन्होंने कभी घर-घर जाकर केबल कनेक्शन भी बेचे थे? दरअसल, 30 सितंबर, 1972 को पैदा हुए शान का असली नाम शांतनु मुखर्जी है. उनके पिता मानस मुखर्जी म्यूजिक डायरेक्टर थे और बहन सागरिका भी सिंगर बनीं. हैरानी की बात है कि, घर में संगीत का माहौल होने के बाद शान ने शुरुआत में सिंगिंग को अपना करियर बनाने का सपना नहीं देखा था.
रिकॉर्ड किया पहला गाना
शान का म्यूज़िक से रिश्ता बहुत पुराना है. उन्होंने सिर्फ 5 साल की उम्र में अपना पहला गाना रिकॉर्ड किया था. ये एक नर्सरी राइम थी. इसके बाद उन्होंने जिंगल्स और बच्चों के लिए गाने रिकॉर्ड किए. लेकिन जैसे-जैसे वो बड़े हुए, जिंदगी में जिम्मेदारियां भी बढ़ती गईं. पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई. शान ने अपने पिता का संघर्ष देखा था और उन्हें लगता था कि सिर्फ म्यूज़िक के भरोसे घर चलाना आसान नहीं होगा. इसीलिए उन्होंने पढ़ाई के साथ कई छोटे-मोटे काम करने शुरू कर दिए.
कभी लगाते थे केबल कनेक्शन
घर की जिम्मेदारियां उठाने के लिए शान ने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया. इतना ही नहीं, वो घर-घर जाकर केबल टीवी कनेक्शन बेचने का काम भी करते थे. इसके अलावा उन्होंने बांद्रा के एक बुटीक में भी काम किया. यानी जिस आवाज ने बाद में लाखों दिलों पर राज किया, वो कभी छोटी-मोटी नौकरी और कामों के जरिए अपनी जिंदगी संभाल रहे थे. इसी बीच शान अपनी बहन सागरिका के साथ लाइव शोज में जाने लगे. शुरुआत में सागरिका लीड सिंगर होती थीं और शान उनके साथ कुछ गाने गा लिया करते थे. धीरे-धीरे लोगों को भाई-बहन की ये जोड़ी पसंद आने लगी. शान ने बाद में कहा था कि उन्हें लगा जैसे म्यूज़िक ने उन्हें खुद चुना हो.
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एक गाने ने बदली कहानी
फिल्मों में शान की शुरुआत साल 1989 में रिलीज़ हुई ‘परिंदा’ से हुई. इसके बाद उन्होंने रिमिक्स और पॉप म्यूजिक की दुनिया में कदम रखा. इस फिल्म के लिए शान ने अपनी बहन के साथ मिलकर ‘कितनी है प्यारी प्यारी’ गाना गाया था. फिर आया साल 1999 और शान की जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट. ‘तन्हा दिल’ और ‘मुसु मुसु हासी’ जैसे गाने लोगों की जुबान पर चढ़ गए. ‘तन्हा दिल’ शान के लिए सिर्फ एक गाना नहीं था. उन्होंने इसके लिरिक्स लिखे और म्यूजिक पर भी काम किया. गाने के पीछे उनके अपने एक्सपीरियंस थे. देखते ही देखते ये गाना यंगस्टर्स के दिलों की आवाज बन गया.
‘चांद सिफारिश’ ने बनाया प्लेबैक स्टार
इसके बाद शान ने बॉलीवुड प्लेबैक सिंगिंग में अपनी मजबूत जगह बना ली. ‘दिल चाहता है’, ‘कल हो ना हो’, ‘फना’, ‘सांवरिया’ और ‘3 इडियट्स’ जैसी फिल्मों में उनकी आवाज सुनाई दी. वैसे, ‘चांद सिफारिश’ का किस्सा भी दिलचस्प है. शान ने बताया था कि रिकॉर्डिंग के टाइम वो अनजाने में उदित नारायण की तरह गाने लगते थे, क्योंकि आमिर खान के लिए वही लंबे टाइम से प्लेबैक कर रहे थे. अपनी आवाज का अलग अंदाज बनाए रखने के लिए उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ी थी. उनकी मेहनत रंग लाई. ‘चांद सिफारिश’ के लिए उन्हें फिल्मफेयर और IIFA बेस्ट प्लेबैक सिंगर का अवॉर्ड मिला. इसके बाद ‘जब से तेरे नैना’ के लिए भी उन्हें फिल्मफेयर और IIFA अवॉर्ड मिले. ‘3 इडियट्स’ के लिए भी उन्हें IIFA बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर का अवॉर्ड दिया गया.
हर तरफ छाई शान की आवाज
शान ने सिर्फ फिल्मों में ही अपनी पहचान नहीं बनाई. उन्होंने ‘सा रे गा मा पा’ जैसे सिंगिंग रियलिटी शो को होस्ट किया. बाद में कई म्यूजिक रियलिटी शोज में जज की भी बने. कभी बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने और घर-घर केबल बेचने वाला ये लड़का आगे चलकर बॉलीवुड का टॉप सिंगर बन गया. यानी ये कहना गलत नहीं होगा कि, टैलेंट जरूरी है, लेकिन उसके साथ मेहनत, स्ट्रगल और सही मौके भी उतने ही मायने रखते हैं. शायद यही वजह है कि आज भी ‘तन्हा दिल’ बजते ही एक पूरी जेनरेशन को अपना पुराना दौर याद आ जाता है.
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