Home पर्यटन सावन में भगवान शिव के इन 6 मंदिरों के जरूर करें दर्शन, आध्यात्म, इतिहास और सुंदरता का मिलेगा अद्भुत संगम

सावन में भगवान शिव के इन 6 मंदिरों के जरूर करें दर्शन, आध्यात्म, इतिहास और सुंदरता का मिलेगा अद्भुत संगम

by Preeti Pal 25 July 2026, 7:00 PM IST
25 July 2026, 7:00 PM IST
सावन में भगवान शिव के इन 6 पवित्र मंदिरों के जरूर करें दर्शन, आध्यात्म, इतिहास और प्राकृतिक सुंदरता का मिलेगा अद्भुत संगम

Famous Lord Shiva Temples: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है. मान्यता है कि इस पूरे महीने श्रद्धा और सच्चे मन से भगवान भोलेनाथ की पूजा करने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं. साथ ही सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है. यही वजह है कि सावन शुरू होते ही देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की लंबी लाइनें देखने को मिलती हैं. कोई जलाभिषेक करने पहुंचता है तो कोई कांवड़ यात्रा पूरी करके भगवान शिव का आशीर्वाद लेता है. भारत में भगवान शिव के हजारों मंदिर हैं, लेकिन कुछ मंदिर ऐसे हैं जिनका धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व सदियों से बना हुआ है. इन मंदिरों में दर्शन करने के लिए हर साल लाखों श्रद्धालु देश और विदेश से पहुंचते हैं. अगर आप भी इस सावन आध्यात्मिक यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो इन प्रसिद्ध शिव मंदिरों को अपनी ट्रैवल लिस्ट में जरूर शामिल करें.

काशी विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में गिना जाता है. इसे 12 ज्योतिर्लिंगों में खास जगह दी गई है. लोगों की मान्यता है कि इस मंदिर में दर्शन करने से इंसान को मोक्ष की प्राप्ति होती है. मां गंगा के पवित्र तट के पास बना ये खूबसूरत मंदिर आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर माना जाता है. इस मंदिर का निर्माण महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने करवाया था. इस मंदिर के गुंबद पर सोने की परत है. यही वजह है कि काशी विश्वनाथ मंदिर को गोल्डन टेंपल भी कहा जाता है. सावन के महीने में यहां लाखों श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं. मंदिर परिसर में हर हर महादेव के जयकारों और घंटियों की गूंज पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देती है. अगर आप वाराणसी जाएं, तो गंगा आरती, दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट और काशी कॉरिडोर भी जरूर देखें. वहीं, सुबह की नाव की सैर आपकी इस यात्रा को और भी यादगार बना देगी.

त्र्यंबकेश्वर मंदिर, महाराष्ट्र

महाराष्ट्र के नासिक के पास है भगवान भोलेनाथ का त्र्यंबकेश्वर मंदिर. ये भी 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है. इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसका अनोखा शिवलिंग है, जिसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों का प्रतीक माना जाता है. हरी-भरी पहाड़ियों से घिरा ये खूबसूरत मंदिर प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक शांति का बेहतरीन संगम है. सावन के महीने में यहां खास पूजा-अर्चना और रुद्राभिषेक का आयोजन होता है. यही वजह है कि इस महीने में यहां हजारों श्रद्धालु त्र्यंबकेश्वर मंदिर पहुंचते हैं. ये जगह गोदावरी नदी के उद्गम स्थल के रूप में भी प्रसिद्ध है. इसलिए यहां आने वाले श्रद्धालु मंदिर दर्शन के साथ गोदावरी के पवित्र जल में डुबकी लगाते हैं. मंदिर के पास ब्रह्मगिरी पर्वत से ही गोदावरी नदी निकलती है. मंदिर परिसर में ही कुशावर्त कुंज है, जहां श्रद्धालु पूजा पाठ करते हैं. इस मंदिर में कालसर्प दोष, नारायण नागबली और पितृ दोष की पूजा होती है. भगवान भोलेनाथ का ये प्राचीन मंदिर काले पत्थरों से बना है. कहा जाता है कि इस मंदिर को बाद में 18वीं शताब्दी में पेशवा बालाजी बाजीराव उर्फ नाना साहब ने बनवाया था.

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सोमनाथ मंदिर, गुजरात

गुजरात के अरब सागर के किनारे बना खूबसूरत सोमनाथ मंदिर भारत के सबसे पुराने और भव्य शिव मंदिरों में से एक है. शिवजी का ये मंदिर भी उनके 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है. इतना ही नहीं इसे पहला ज्योतिर्लिंग भी माना जाता है. इतिहास गवाह है कि इस मंदिर को कई बार तोड़ा गया, लेकिन हर बार इसका पुनर्निर्माण हुआ. यही वजह है कि सोमनाथ मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था और अटूट विश्वास का प्रतीक बन चुका है. शाम के समय यहां होने वाली आरती और समुद्र की लहरों के बीच मंदिर का खूबसूरत नज़ारा यहां आने वाले हर श्रद्धालु के मन को छू जाता है. सावन में यहां विशेष धार्मिक आयोजन और शिव भजन पूरे माहौल को और भी दिव्य बना देते हैं. कहा जाता है कि सोमनाथ मंदिर का सबसे पहला निर्माण खुद चंद्रदेव ने सोने से करवाया था. ये भी मान्यता है कि भगवान कृष्ण ने इसी जगह अपना देहत्याग किया था. इस मंदिर की एक और खासियत है कि ये, हिरन, कपिला और पुरानी सरस्वती नदी के संगम तट पर बना है. अगर आप कभी गुजरात जाएं, तो सोमनाथ मंदिर के दर्शन जरूर करें. इसके अलावा वहां सोमनाथ बीच और प्रसिद्ध लाइट एंड साउंड शो का मज़ा लेना न भूलें.

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महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन

मध्य प्रदेश के उज्जैन में बना महाकालेश्वर मंदिर भगवान शिव के सबसे प्रसिद्ध धामों में से एक है. ये भी उनके 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है. इसके अलावा ये मंदिर अपनी अनोखी भस्म आरती के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है. रोज सुबह ब्रह्म मुहूर्त में होने वाली भस्म आरती में शामिल होना भक्तों के लिए बहुत ही खास अनुभव माना जाता है. वैसे तो हर महीने ही महाकालेश्वर मंदिर में लाखों लोग भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन सावन के महीने में यहां श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है. ये दुनिया का इकलौता ज्योतिर्लिंग है, जिसका मुख दक्षिण दिशा की तरफ है. इस दिशा को मृत्यु के देवता यानी काल की दिशा कहा जाता है. यही वजह है कि इस मंदिर को महाकालेश्वर कहा जाता है. हैरानी की बात है कि, यहां जो शिवलिंग है, उसे किसी मानव ने स्थापित नहीं किया है. ये स्वयंभू यानी खुद प्रकट हुए हैं. इसके अलावा महाकालेश्वर मंदिर 5 तालों में बना है. इसके सबसे नीचे महाकाल, ऊपर ओंकारेश्वर, तीसरी मंजिल पर नागचंद्रेश्वर मंदिर है. तीसरी मंजिल के पट आम लोगों के लिए साल में सिर्फ एक बार यानी नागपंचमी के दिन ही खुलते हैं. यहां भगवान भोलेनाथ और मां पार्वती 10 फन वाले नाग पर विराजमान हैं. इसके अलावा उज्जैन सिर्फ धार्मिक नगरी ही नहीं, बल्कि प्राचीन भारतीय संस्कृति और ज्योतिष का भी प्रमुख केंद्र रहा है. महाकाल मंदिर के साथ हरसिद्धि मंदिर, काल भैरव मंदिर और राम घाट भी घूमने लायक जगह हैं.

ओंकारेश्वर मंदिर, मध्य प्रदेश

नर्मदा नदी के बीच स्थित मंधाता द्वीप पर बना ओंकारेश्वर मंदिर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है. ये द्वीप ऊपर से देखने पर ‘ऊं’ के आकार जैसा दिखाई देता है. यही वजह है कि इस मंदिर का नाम ओंकारेश्वर पड़ा. वैसे, मध्य प्रदेश का ये मंदिर भी भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है. इस मंदिर के चारों तरफ बहती नर्मदा नदी इसकी खूबसूरती को और बढ़ा देती है. लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन करने के साथ-साथ द्वीप की परिक्रमा भी करते हैं, जिसे बहुत ही शुभ माना जाता है. सावन के महीने में यहां का वातावरण पूरी तरह शिवमय हो जाता है. मंदिर परिसर में गूंजते मंत्र और नर्मदा नदी के पास मिलने वाली शांति मन को अलग ही सुकून से भर देती है. महाकालेश्वर मंदिर की ही तरह, यहां भी शिवलिंग मानव द्वारा स्थापित नहीं किया गया. कहा जाता है कि यहां का शिवलिंग नर्मदा नदी के तट पर खुद प्रकट हुआ था. इस द्वीप पर ओंकारेश्वर और नर्मदा नदी के दूसरे तट पर ममलेश्वर यानी अमलेश्वर मंदिर है. इन दोनों मंदिरों को भगवान भोलेनाथ के एक ही ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजा जाता है. पुरानी मान्यता है कि यहां हर रात भोलेनाथ आराम करने आते हैं. यही वजह है कि इस मंदिर में हर रात चौपड़-पासे सजाने और शयन आरती की परंपरा है.

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भीमाशंकर मंदिर, महाराष्ट्र

अगर आप धार्मिक यात्रा के साथ प्रकृति की खूबसूरती का मज़ा भी लेना चाहते हैं, तो महाराष्ट्र के सह्याद्रि पर्वतों के बीच बना भीमाशंकर मंदिर आपके लिए बेहतरीन जगह है. ये मंदिर घने जंगलों और खूबसूरत पहाड़ियों के बीच बना हुआ है. ये भी भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में छठे नंबर पर है. इस मंदिर को भगवान शिव से जुड़ी कई पौराणिक कथाओं का केंद्र माना जाता है. सावन के महीने में यहां हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक और खास पूजा करवाने के लिए हर साल पहुंचते हैं. यहां का शिवलिंग बहुत मोटा और बड़ा है. यही वजह है कि इसे मोटेश्वर महादेव मंदिर भी कहते हैं. मंदिर के पास ही भीमा नदी बहती है. मान्यता है कि ये नदी भगवान भोलेनाथ और भीमा नाम के राक्षस की लड़ाई के समय उत्पन्न हुई थी. शिवपुराण के अनुसार, भीमा कुंभकर्ण का पुत्र था. 18वीं शताब्दी में इस मंदिर के शिखर का निर्माण मराठा पेशवाओं के मंत्री नाना फडणवीस ने करवाया था. इसके अलावा छत्रपति शिवाजी महाराज की भी इस मंदिर में अटूट आस्था थी. वैसे, इस मंदिर के अलावा ये इलाका ट्रेकिंग और वन्यजीव प्रेमियों के बीच भी काफी लोकप्रिय है. मानसून के दौरान यहां की हरियाली और झरने आपकी यात्रा को और भी खास बना देते हैं.

इन बातों का ध्यान

सावन में ज्यादातर शिव मंदिरों में भारी भीड़ रहती है. इसलिए यात्रा की योजना पहले से बना लें. ऑनलाइन दर्शन या पूजा की सुविधा उपलब्ध हो तो उसका फायदा जरूर उठाएं. आरामदायक कपड़े और फिसलन से बचाने वाले जूते पहनें, क्योंकि इस समय बारिश का मौसम भी रहता है. पीने का पानी, जरूरी दवाइयां और हल्का सामान अपने साथ रखें. मंदिर के नियमों का पालन करें और प्लास्टिक का इस्तेमाल करने से बचें. लोकल संस्कृति और धार्मिक परंपराओं का सम्मान करें, ताकि आपकी यात्रा और यादगार बन सके.

सावन में शिव के दर्शन

सावन के महीने में शिव मंदिरों की रौनक देखने लायक होती है. चारों तरफ हर-हर महादेव के जयकारे, मंदिरों में गूंजते मंत्र, बेलपत्र और धतूरा चढ़ाते श्रद्धालु, शिव भजन और धार्मिक आयोजन पूरे माहौल को भक्तिमय बना देते हैं. लेकिन ये यात्रा सिर्फ धार्मिक नहीं होती, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत, शानदार वास्तुकला और प्राकृतिक सुंदरता को करीब से देखने का भी मौका देती है. वाराणसी की गंगा से लेकर सोमनाथ के समुद्र तट, सह्याद्रि की पहाड़ियों से लेकर नर्मदा के शांत किनारों तक, हर मंदिर अपने साथ एक अलग कहानी और अनुभव लेकर खड़ा है. ऐसे में अगर आप इस सावन अपने परिवार या दोस्तों के साथ किसी आध्यात्मिक यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो इन 6 प्रसिद्ध शिव मंदिरों में से किसी एक के दर्शन करने जा सकते हैं.

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