Home Lifestyle भक्ति, इतिहास और खूबसूरती का संगम हैं भारत के ये 10 सबसे पुराने मंदिर, हर कोना सुनाता है आस्था की कहानी

भक्ति, इतिहास और खूबसूरती का संगम हैं भारत के ये 10 सबसे पुराने मंदिर, हर कोना सुनाता है आस्था की कहानी

by Preeti Pal 22 May 2026, 6:06 PM IST (Updated 22 May 2026, 6:29 PM IST)
22 May 2026, 6:06 PM IST (Updated 22 May 2026, 6:29 PM IST)
भक्ति, इतिहास और खूबसूरती का संगम हैं भारत के ये 10 सबसे पुराने मंदिर, हर कोना सुनाता है आस्था की कहानी

Famous Temples in India: भारत को दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में गिना जाता है. यहां की पहचान सिर्फ इंडियन कल्चर और ट्रेडिशन से नहीं, बल्कि मंदिरों से भी जुड़ी हुई है. देश के हर राज्य, हर शहर और लगभग हर गांव में आपको छोटे-बड़े मंदिर देखने को मिल जाएंगे. यही वजह है कि भारत को मंदिरों की धरती भी कहा जाता है. यहां मौजूद मंदिर सिर्फ पूजा की जगह नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास, कला और संस्कृति का खूबसूरत कॉम्बिनेशन हैं. सिंधु घाटी सभ्यता के टाइम से ही भारत में मंदिरों और धार्मिक जगहों की परंपरा देखने को मिलती है. टाइम के साथ इन मंदिरों ने न सिर्फ लोगों की आस्था को मजबूत किया, बल्कि देश की विरासत और इतिहास को भी संभालकर रखा. यही वजह है कि आज भी लाखों लोग मंदिरों में सिर्फ दर्शन के लिए नहीं, बल्कि मेंटल पीस और और पॉजिटिव एनर्जी के लिए भी जाते हैं.

हर आस्था का सहारा

भारत में हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्म जैसी कई बड़ी धार्मिक परंपराओं की शुरुआत हुई. इसलिए यहां अलग-अलग देवी-देवताओं और धार्मिक मान्यताओं से जुड़े हजारों मंदिर मौजूद हैं. इनमें भगवान शिव, भगवान विष्णु, माता दुर्गा और उनके अलग-अलग रूपों को समर्पित मंदिर सबसे ज्यादा फेमस हैं. देश के ज्योतिर्लिंग मंदिर भगवान शिव के भक्तों के लिए बहुत खास हैं. वहीं, 51 शक्तिपीठों का भी बहुत बड़ा धार्मिक महत्व है. इसके अलावा जैन मंदिर अपनी शानदार नक्काशी और खूबसूरत आर्किटेक्चर के लिए दुनियाभर में मशहूर हैं. राजस्थान के दिलवाड़ा मंदिर हों या मध्य प्रदेश और कर्नाटक के प्राचीन मंदिर, हर जगह ऑर्ट और हिस्ट्री की अद्भुत झलक देखने को मिलती है. ऐसे में आज हम आपके लिए भारत के 10 फेमस मंदिरों की एक लिस्ट लेकर आए हैं.

बद्रीनाथ मंदिर

उत्तराखंड के खूबसूरत बद्रीनाथ नगर में बने बद्रीनाथ मंदिर से इस लिस्ट की शुरुआत करते हैं. इसे बद्रीनारायण मंदिर भी कहा जाता है. ये हिंदू धर्म के सबसे पवित्र तीर्थों में गिना जाता है. ये उत्तराखंड के चारधामों में से एक है. चारधाम यात्रा में यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ शामिल हैं. हर साल लाखों श्रद्धालु इन पवित्र धामों के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. समुद्र तल से लगभग 3,100 मीटर की ऊंचाई पर बना बद्रीनाथ मंदिर हिमालय की शानदार वादियों के बीच बसा हुआ है. ये पवित्र धाम अलकनंदा नदी के किनारे है. यहां की खूबसूरती मन को मोह लेती है. कहा जाता है कि, इस मंदिर की स्थापना 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने की थी. भगवान विष्णु को समर्पित ये मंदिर हिंदू धर्म में बहुत खास महत्व रखता है. मंदिर में भगवान बद्रीनारायण की पूजा की जाती है, जिन्हें भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है.

बद्रीनाथ मंदिर साल में सिर्फ 6 महीने ही भक्तों के लिए खुला रहता है. सर्दियों के मौसम में यहां भारी बर्फबारी होती है. इस वजह से मंदिर तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है. इसलिए नवंबर के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं. बद्रीनाथ सिर्फ एक धार्मिक जगह नहीं, बल्कि आस्था, प्रकृति और भारतीय संस्कृति का खूबसूरत कॉम्बिनेशन है. यहां आने वाले श्रद्धालु सिर्फ दर्शन ही नहीं करते, बल्कि हिमालय की शांत वादियों में कुछ सुकून के पल भी बिताते हैं.

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सोमनाथ मंदिर

भारत के सबसे पुराने और फेमस मंदिरों में शामिल सोमनाथ मंदिर धर्म और आस्था के साथ-साथ भारतीय इतिहास की भी पहचान है. गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित ये मंदिर सदियों से खड़ा है. इस मंदिर का जिक्र शिवपुराण, स्कंदपुराण और श्रीमद्भागवत जैसे कई ग्रंथों में भी मिलता है. सोमनाथ नाम का मतलब होता है ‘चंद्र देव के रक्षक’. माना जाता है कि ‘सोम’ यानी चंद्र देव ने भगवान शिव के सम्मान में इस मंदिर को बनवाया था. ये मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. मंदिर का माहौल और समंदर किनारे की लोकेशन इसे और भी खास बना देती है. ये भी माना जाता है कि, भगवान श्रीकृष्ण ने अपने देह का त्याग इसी जगह पर किया था. वैसे, इतिहास में सोमनाथ मंदिर को कई बार तोड़ा गया और फिर दोबारा बनाया गया. विदेशी आक्रमणों के दौरान इस मंदिर को काफी नुकसान पहुंचाया गया था, लेकिन हर बार इसकी भव्यता फिर से लौट आई. यही वजह है कि सोमनाथ मंदिर को आस्था और मजबूती का प्रतीक भी माना जाता है.

राम मंदिर

अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर के बिना ये लिस्ट पूरी नहीं होगी. ये मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, इमोशन, आस्था और वास्तुकला का खूबसूरत सिंपल बन चुका है. भगवान राम की जन्मभूमि पर बना ये मंदिर भारत की परंपराओं और मॉर्डन इंजीनियरिंग का अनोखा कॉम्बिनेशन दिखाता है. ये मंदिर राजस्थान के बंसी पहाड़पुर पत्थरों से तैयार किया गया है. 22 जनवरी, 2024 को मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की गई. तब से लेकर आज तक लाखों भारतीय इस दिव्य मंदिर के दर्शन कर चुके हैं. राम मंदिर की सबसे खास बात ये है कि इसे बनाने में लोहे और स्टील का भी खूब इस्तेमाल किया गया है. मंदिर में सूर्य तिलक जैसी खास तकनीक भी इस्तेमाल की गई है. इसमें सूर्य की किरणें खास टाइम पर रामलला के माथे पर पड़ती हैं.

केदारनाथ मंदिर

उत्तराखंड के गढ़वाल में भगवान केदारनाथ का खूबसूरत मंदिर है. ये भारत के सबसे पवित्र शिव मंदिरों में गिना जाता है. ऊंचे-ऊंचे बर्फ से ढके पहाड़, ठंडी हवाएं और आध्यात्मिक माहौल इस जगह को और खास बना देते हैं. भगवान शिव को समर्पित ये मंदिर हर साल लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींच लाता है.

मान्यता है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडव अपने पापों का प्रायश्चित करने के लिए भगवान शिव की शरण में आए थे. कहा जाता है कि पांडवों ने ही इस मंदिर को बनावाया था. बाद में 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने इस मंदिर को फिर से बनवाया. केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड की चारधाम यात्रा का अहम हिस्सा है. ये मंदिर समुद्र तल से लगभग 3,583 मीटर की ऊंचाई पर है. यहां तक पहुंचना अपने आप में एक अलग एक्सपीरियंस है. मंदिर तक पहुंचने के लिए लोगों को 14 किलोमीटर का पहाड़ी रास्ता तय करना पड़ता है. ये मुश्किल जरूर है, लेकिन रास्ते में दिखने वाले खूबसूरत पहाड़, झरने और नजारे हर थकान को दूर कर देते हैं. जो लोग पैदल नहीं चल पाते उनके लिए घोड़े, खच्चर और पालकी जैसी सुविधाएं भी रहती हैं.

वैसे, जब मंदिर बंद होता है, तब भगवान शिव की पूजा केदारनाथ में नहीं बल्कि उखीमठ में की जाती है. मान्यता के मुताबिक, भगवान केदारनाथ की मूर्तियों को सर्दियों में उखीमठ ले जाया जाता है. करीब 5 से 6 महीनों तक वहीं पूजा होती है.

वैष्णों देवी मंदिर

जम्मू-कश्मीर की खूबसूरत पहाड़ियों के बीच बना माता वैष्णो देवी का मंदिर देश की सबसे फेमस और पवित्र जगहों में से एक है. वैष्णो देवी मंदिर त्रिकुटा पर्वत पर लगभग 5200 फीट की ऊंचाई पर बना है. यहां पहुंचने के लिए लोगों को कटरा से लगभग 12 किलोमीटर की चढ़ाई करनी पड़ती है. ये जर्नी आस्था, भक्ति और रोमांच से भरपूर होती है. रास्ते भर ‘जय माता दी’ के जयकारे माहौल को भक्तिमय बना देते हैं. मंदिर तक पहुंचने के लिए लोग पैदल, घोड़े, पालकी और हेलीकॉप्टर जैसी सुविधाओं का भी इस्तेमाल करते हैं. वैष्णो देवी मंदिर की सबसे खास बात ये है कि यहां माता की पूजा किसी मूर्ति के रूप में नहीं होती. मां वैष्णो देवी यहां तीन प्राकृतिक पिंडियों के रूप में विराजमान हैं. इन पिंडियों को माता महाकाली, महासरस्वती और महालक्ष्मी का कहा जाता है. ये मंदिर सालभर खुला रहता है.

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जगन्नाथ मंदिर

ओडिशा के पुरी शहर में बना भगवान जगन्नाथ मंदिर भारत के सबसे फेमस मंदिरों में गिना जाता है. 12वीं शताब्दी में बने इस मंदिर को लोग प्यार से जगन्नाथ पुरी कहते हैं. भगवान कृष्ण को समर्पित ये मंदिर हिंदू धर्म के चारधामों में शामिल है, जिसकी वजह से इसका धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है. मंदिर के गर्भगृह में भगवान जगन्नाथ की मूर्ति है, जिनके साथ उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा भी हैं. ये तीनों मूर्तियां अपने अलग स्वरूप की वजह से भी काफी अट्रैक्टिव लगती हैं. मंदिर के मेन परिसर में सिर्फ हिंदू धर्म को मानने वाले लोगों को ही एंट्री मिलती है. यहां की फेमस रथ यात्रा में लाखों लोग पहुंचते हैं. हर साल होने वाली इस यात्रा में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को बड़े और खूबसूरत रथों पर बैठाकर नगर घुमाया जाता है.

अमरनाथ धाम

जम्मू-कश्मीर की खूबसूरत और बर्फ से ढकी पहाड़ियों के बीच अमरनाथ गुफा मंदिर हिंदू धर्म के सबसे पवित्र तीर्थों में से एक है. समुद्र तल से लगभग 3,888 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद इस पवित्र गुफा के दर्शन के लिए हर साल लाखों लोग पहुंचते हैं. अमरनाथ गुफा ज्यादातर बर्फ की मोटी परतों से ढकी रहती है. सर्दियों में यहां पहुंचना बहुत मुश्किल है. यही वजह है कि ये यात्रा सिर्फ जून से अगस्त के बीच ही हो पाती है. इसी बीच भक्तों के लिए गुफा के कपाट खोले जाते हैं. मान्यता है कि ये पवित्र गुफा लगभग 5000 साल पुरानी है. यहां हर साल बर्फ की शिवलिंग खुद बनती है.

तिरुपति बालाजी

आंध्र प्रदेश के पहाड़ी शहर तिरुमला में बना तिरुपति बालाजी मंदिर करोड़ों भारतीयों की आस्था से जुड़ा हुआ है. इसे तिरुमला वेंकटेश्वर मंदिर भी कहा जाता है. ये मंदिर भगवान विष्णु के अवतार भगवान वेंकटेश्वर को समर्पित है. इन्हें लोग प्यार से बालाजी भी बुलाते हैं. यहां हर दिन लाखों भक्त भगवान के दर्शन के लिए आते हैं. भक्त यहां सोना, चांदी और रुपये का चढ़ावा करते हैं. यही वजह है कि इसे दुनिया के सबसे अमीर मंदिरों में से एक माना जाता है. ये सदियों पुराना मंदिर दक्षिण भारत के कई बड़े राजवंशों की आस्था का प्रतीक रहा है. टाइम के साथ इसकी महिमा और भी बढ़ती गई. तिरुपति बालाजी मंदिर में मिलने वाला प्रसाद भी बहुत खास है. यहां मिलने वाले लड्डू पूरी दुनिया में मशहूर हैं. इस मंदिर से जुड़ी एक खास परंपरा भी है, जिसमें श्रद्धालु अपने बाल दान करते हैं. इसे भगवान के प्रति समर्पण और आस्था का प्रतीक माना जाता है. हर दिन हजारों लोग यहां अपने सिर मुंडवाते हैं.

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अक्षरधाम मंदिर

दिल्ली में यमुना नदी के किनारे बना अक्षरधाम मंदिर भी इस लिस्ट में शामिल है. इस मंदिर को वास्तु शास्त्र और पंचरात्र शास्त्र के सिद्धांतों पर बनाया गया है. इसकी बनावट में ट्रेडिशनल इंडियन आर्किटेक्चर की झलक साफ दिखाई देती है. अक्षरधाम मंदिर स्वामीनारायण संप्रदाय को डेडिकेटेड है. यहां भगवान स्वामीनारायण को पूजा जाता है. मंदिर के सेंटर में भगवान स्वामीनारायण की 11 फीट ऊंची बड़ी मूर्ती. इस मंदिर को राजस्थान के गुलाबी बलुआ पत्थर और इटली के सफेद कैरारा संगमरमर से बनाया गया है. मंदिर परिसर में होने वाले लाइट और म्यूजिक शो को हर दिन हज़ारों लोग देखते हैं.

सिद्धिविनायक मंदिर

सिद्धिविनायक मंदिर मुंबई शहर के प्रभादेवी इलाके में है. इस मंदिर को 18वीं शताब्दी में बनवाया गया था. तब से ये करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है. यहां भगवान गणेश की पूजा की जाती है, जिन्हें सिद्धिविनायक कहा जाता है. भगवान गणेश को किसी भी नए काम की शुरुआत से पहले पूजा जाता है. यही वजह है कि उन्हें विघ्नहर्ता भी कहते हैं. मुंबई जैसे तेज रफ्तार शहर में ये मंदिर एक ऐसी जगह है, जहां लोग कुछ पल ठहरकर शांति और आस्था का एक्सपीरियंस लेते हैं. यही वजह है कि सिद्धिविनायक मंदिर सिर्फ धार्मिक रीजन की वजह से नहीं, बल्कि इमोशनली भी लोगों की लाइफ का बड़ा हिस्सा है.

इन मंदिरों में सुबह-शाम बजती घंटियां, मंत्रों की गूंज, हवा में घुली अगरबत्ती की खुशबू और पुरानी वास्तुकला मिलकर ऐसा एक्सपीरियंस देती है, जो मन को सुकून से भर देती है. यही वजह है कि मंदिर सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा माने जाते हैं.
अगर कोई भारत की असली संस्कृति, आस्था और इतिहास को करीब से समझना चाहता है, तो यहां के मंदिरों में जरूर जाना चाहिए.

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