Home लाइफस्टाइल मुगल दरबार से फैशन रैंप तक, आखिर कैसे Aari Embroidery बनी शाही विरासत से ग्लोबल फैशन का सबसे बड़ा ट्रेंड?

मुगल दरबार से फैशन रैंप तक, आखिर कैसे Aari Embroidery बनी शाही विरासत से ग्लोबल फैशन का सबसे बड़ा ट्रेंड?

by Preeti Pal 29 June 2026, 11:41 AM IST (Updated 29 June 2026, 11:42 AM IST)
29 June 2026, 11:41 AM IST (Updated 29 June 2026, 11:42 AM IST)
मुगल दरबार से फैशन रैंप तक, आखिर कैसे Aari Embroidery बनी शाही विरासत से ग्लोबल फैशन का सबसे बड़ा ट्रेंड?

Aari Embroidery History: फैशन की दुनिया हर दिन बदलती है, लेकिन कुछ आर्ट ऐसी होती हैं जो सदियों बाद भी अपनी चमक नहीं खोतीं. आरी एम्ब्रॉयडरी भी ऐसी ही एक बेमिसाल आर्ट है, जिसने टाइम, फैशन और बदलते दौर के हर चैलेंज को पीछे छोड़कर आज भी अपनी रॉयल पहचान कायम रखी है. कभी मुगल बादशाहों के शाही आउटफिट्स की शान रही ये कढ़ाई आज दुनिया के बड़े फैशन शो, डिजाइनर लहंगों और इंटरनेशनल रनवे तक पहुंच चुकी है.

कहां से शुरू हुई कहानी

आरी एम्ब्रॉयडरी की कहानी 12वीं शताब्दी से शुरू होती है. गुजरात के कारीगर चमड़े के जूतों को सजाने के लिए एक खास हुक वाली सुई का इस्तेमाल करते थे. उस टाइम ये सिर्फ एक हुनर था, लेकिन मुगल शासन के दौरान इस आर्ट की किस्मत बदल गई. मुगल बादशाह इसकी बारीक कारीगरी से इतने इम्प्रेस हुए कि इसे शाही दरबारों का हिस्सा बना लिया. इसके बाद यही आर्ट रेशमी कपड़ों, शेरवानियों, लहंगों और शाही तंबुओं की खूबसूरती बढ़ाने लगी.

विदेश से बढ़ा बिजनेस

मुगल दौर में चीन और इंग्लैंड के साथ बिजनेस बढ़ने से आरी एम्ब्रॉयडरी में विदेशी डिजाइन भी शामिल होने लगे. इंडियन डिजाइन के साथ यूरोपियन फ्लोरल डिजाइन्स ने इस आर्ट को और भी खास बना दिया. यही वजह है कि आरी एम्ब्रॉयडरी सिर्फ इंडियन नहीं, बल्कि ग्लोबल आर्ट बन गई.

सबसे बड़ी पहचान

इस कढ़ाई की सबसे बड़ी पहचान इसकी खास हुक वाली सुई, यानी आरी है. इसी सुई की मदद से बहुत बारीक और एक जैसी चेन स्टिच तैयार की जाती हैं. हर टांका हाथ से लगाया जाता है. हालांकि, इसकी फिनिश इतनी परफेक्ट होती है कि पहली नजर में मशीन की कढ़ाई जैसी दिखाई देती है. यही इसकी सबसे बड़ी खूबसूरती है. वैसे, आरी एम्ब्रॉयडरी की खासियत सिर्फ धागों तक लिमिटिड नहीं है. इसमें गोल्डन और चांदी जैसे जरी के धागों के साथ मोती, सीक्विन, मिरर वर्क और आज के दौर में स्वारोवस्की क्रिस्टल तक का यूज किया जाता है. यही वजह है कि ये आर्ट हर दौर के फैशन के साथ खुद को ढालती चली गई.

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टाइम के साथ एक्सपेंशन

टाइम के साथ ये आर्ट भारत के अलग-अलग स्टेट्स में पहुंची. कश्मीर में इसे नेचर से इंस्पायर डिजाइन मिले, गुजरात और कच्छ में रंग-बिरंगे मिरर वर्क का तड़का लगा, तमिलनाडु में टेंपल आर्ट से इंस्पिरेशन मिली, जबकि उत्तर प्रदेश में ये ब्राइडल आउटफिट्स की जान बन गई. हालांकि, एक टाइम ऐसा भी आया जब मशीन से बने कपड़ों की बढ़ती डिमांड की वजह से लगा कि ये ट्रेडिशनल आर्ट कहीं खो जाएगी. लेकिन फैशन की दुनिया ने फिर करवट ली. लोगों ने मशीन की बजाय हाथों से बने कपड़ों की अहमियत समझी और आरी एम्ब्रॉयडरी एक बार फिर लग्जरी फैशन का सिंबल बन गई.

बड़े-बड़े डिजाइनर्स की पसंद

आज देश के फेमस डिजाइनर जैसे सब्यसाची और मनीष मल्होत्रा अपने ब्राइडल कलेक्शन में आरी एम्ब्रॉयडरी को खास जगह देते हैं. इतना ही नहीं, अब ये आर्ट सिर्फ लहंगों तक नहीं है. साड़ी, दुपट्टे, हैंडबैग, जैकेट, डेनिम, जूते और होम डेकोर की चीजों में भी इसकी खूबसूरती देखने को मिल रही है.

विदेश में डिमांड

गल्फ कंट्रीज, अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा जैसे देशों में इंडियन ब्राइडल फैशन की बढ़ती पॉपुलैरिटी के साथ आरी एम्ब्रॉयडरी की डिमांड भी तेजी से बढ़ी है. ये सिर्फ एक कढ़ाई नहीं, बल्कि भारतीय कल्चर और कारीगरों की पीढ़ियों से चली आ रही मेहनत की विरासत है. ऐसे में अगर आप ऐसा फैशन पसंद करते हैं जिसमें सिर्फ खूबसूरती ही नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और हुनर की कहानी भी छिपी हो, तो आरी एम्ब्रॉयडरी से अच्छा ऑप्शन कोई नहीं.

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