Caste Census: जातिगत जनगणना को लेकर देशभर में बहस जारी है. इसी बीच कांग्रेस भी ओबीसी के मुद्दे पर मुखर हो गई है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने बीजेपी को घेरना शुरू कर दिया है. पार्टी का आरोप है कि सरकार की ओर से जारी प्रश्नावली में लोगों की जाति और सामाजिक श्रेणी दर्ज करने की व्यवस्था उचित नहीं है. राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने कहा कि आगामी डिजिटल जनगणना में किसी व्यक्ति की सामाजिक श्रेणी और विशिष्ट जाति के लिए अलग-अलग कॉलम नहीं दिए गए हैं.
कांग्रेस के दबाव के बाद हुआ ऐलान
देवेंद्र यादव ने कहा कि केंद्र ने जाति जनगणना की घोषणा कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य सामाजिक संगठनों के लगातार दबाव के बाद हुई है. उन्होंने आगे कहा कि 22 जनवरी, 2026 को जारी नोटिफिकेशन से यह सवाल उठता है कि सरकार का मकसद जाति से जुड़ा पूरा डेटा इकट्ठा करना नहीं है. उन्होंने इस नोटिफिकेशन के प्वाइंट 12 का जिक्र किया. इसमें पूछा गया है कि क्या परिवार का मुखिया अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य श्रेणी से है? हालांकि, इसमें किसी व्यक्ति की विशिष्ट जाति को दर्ज करने का कोई प्रावधान नहीं है. इस मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने केंद्र को पत्र लिखकर आपत्ति दर्ज कराई है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जाति से जुड़ी जानकारी इकट्ठा करने के लिए कोई स्पष्ट तरीका नहीं बताया है.
कर्मचारी करेंगे घरों का दौरा
उन्होंने कहा कि बाद में केंद्र ने यह बात कही कि जाति से जुड़ी जानकारी जनगणना के अगले चरण में इकट्ठा की जाएगी, जब जनगणना करने वाले कर्मचारी घरों का दौरा करेंगे. यादव ने इस स्पष्टीकरण को खारिज कर दिया और कहा कि जनगणना डिजिटल रूप से की जा रही है. इस प्रश्नावली में बदलाव किए जा सकते हैं. उन्होंने बताया कि जनसंख्या की गिनती फरवरी 2027 में शुरू होनी है. कांग्रेस नेता ने सुझाव दिया कि डिजिटल प्रश्नावली में दो अलग-अलग ड्रॉपडाउन फील्ड होनी चाहिए. एक सामाजिक श्रेणी SC, ST या OBC के लिए होनी चाहिए और दूसरा विशिष्ट जाति के लिए होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि ऐसा करना बहुत जरूरी है क्योंकि अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग नामों से जाना जा सकता है.
तेलंगाना और बिहार को बनाए मॉडल
देवेंद्र यादव ने तेलंगाना और बिहार के जातिगत जनगणना का मॉडल अपनाने की सलाह दी है. उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के विशेषज्ञों को बुलाकर केंद्र सरकार पूरी व्यवस्था को समझ सकती है. देश में वैज्ञानिक पद्धति से आंकड़े जुटाने के बाद ही सामाजिक न्याय की नीतियां प्रभावी ढंग से बनाई जा सकती है. यादव ने कहा कि जातिगत जनगणना का मकसद देश में बंटवारा नहीं करना है बल्कि देश में जानना है कि किसकी कितनी संख्या है और सरकारी योजनाओं का लाभ कितने लोगों तक पहुंच रहा है. अब कांग्रेस पूरे देश में जन-जागरूकता का अभियान चलाएगी और केंद्र को आगाह करेगी कि अगर कोई गड़बड़ी होगी तो देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा.
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News Source: PTI
