ED Action In Chit Fund Scam: 2000 करोड़ रुपये के महाघोटाले में ईडी ने बड़ी कार्रवाई की है. इसके एक्शन से आरोपियों में हड़कंप मच गया है. जांच एजेंसी ने इस मामले में छापेमारी कर 182 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है. इसके अलावा ईडी ने मामले में एक करोड़ रुपये से अधिक कैश बरामद की है और 6 महंगी कारों को जब्त किया है. इन कारों में मर्सिडीज और बीएमडब्ल्यू समेत अन्य गाड़ियां शामिल हैं.
न्यूज एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 2,000 करोड़ रुपये के मल्टी-स्टेट चिट फंड घोटाले के सिलसिले में छापेमारी के दौरान 182 बैंक अकाउंट फ्रीज कर दिए हैं और 1 करोड़ रुपये से ज्यादा नकद और छह महंगी कारें जब्त की हैं.
ED, Bhubaneswar Zonal Office, has conducted search operations under PMLA, 2002 on 05.08.2026, at five premises linked with M/s. Wellfare Buildings and Estates Pvt. Ltd.(WBEPL) and its Directors at Visakhapatnam and Hyderabad in connection with investigation in a multi-crore Chit… pic.twitter.com/ocRKDvgxdR
— ED (@dir_ed) August 10, 2026
विशाखापत्तनम और हैदराबाद में कार्रवाई
ईडी ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर इस कार्रवाई की जानकारी भी दी है. ईडी ने कहा है, “ED के भुवनेश्वर जोनल ऑफिस ने करोड़ों रुपये के चिट फंड घोटाले की जांच के सिलसिले में, 05.08.2026 को विशाखापत्तनम और हैदराबाद में M/s. वेलफेयर बिल्डिंग्स एंड एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड (WBEPL) और उसके डायरेक्टरों से जुड़ी पांच जगहों पर PMLA, 2002 के तहत तलाशी अभियान चलाया.”
जांच एजेंसी ने आगे बताया, “तलाशी के दौरान, 1.01 करोड़ रुपये नकद (भारतीय मुद्रा) के साथ-साथ M/s. WBEPL, उसके डायरेक्टरों और उनसे जुड़ी संस्थाओं की चल और अचल संपत्तियों की जानकारी और आपत्तिजनक सामग्री/दस्तावेज (जैसे प्रॉपर्टी के कागजात, कई डिजिटल डिवाइस) बरामद और जब्त किए गए.”
ईडी ने इसमें बताया, “M/s. WBEPL और उसके डायरेक्टरों से जुड़े 182 बैंक खातों फ्रीज करने के आदेश जारी किए हैं और छह महंगी लग्जरी गाड़ियां भी जब्त की हैं.”
कैसे हुआ 2,000 करोड़ रुपये का घोटाला?
जांच एजेंसी ने बताया कि आंध्र प्रदेश के पूर्व विधायक मल्ला विलाया प्रसाद, वराह रामकृष्ण सत्य श्रीनिवास राव अल्ला और अन्य लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की गई. ईडी के भुवनेश्वर ऑफिस ने ओडिशा पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW), CBI और झारखंड के एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा दर्ज कई FIR और उसके बाद दाखिल चार्जशीट के आधार पर जांच शुरू की थी.
ईडी के आधिकारिक बयान के अनुसार, जांच में पता चला कि WBEPL के निदेशकों और मैनेजिंग डायरेक्टर ने विशाखापत्तनम में जमीन देने का झूठा वादा करके कई स्कीमों के जरिए ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों के हजारों भोले-भाले निवेशकों से 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम गैर-कानूनी तरीके से जुटाई थी.
बयान में कहा गया है कि बाद में कंपनी ने भारत के कई राज्यों में स्थित अपने ब्रांच ऑफिस बंद कर दिए और निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की. बयान के मुताबिक, निदेशकों ने निवेशकों के पैसे का इस्तेमाल दूसरे कामों और निजी फायदे के लिए किया, जमा रकम को छिपाने के लिए फाइनेंशियल स्टेटमेंट में हेरफेर की और जमीन के ऐसे लेन-देन किए जिनसे असली कीमत छिपाई जा सके और कानूनी जिम्मेदारियों से बचा जा सके.
अरविंद केजरीवाल के PA समेत AAP नेताओं के घर ईडी की छापेमारी
News Source: PTI
