Home Top News 40 साल की सेवा के बाद रिटायर हुए जनरल द्विवेदी, भविष्य की लड़ाई पर सेना को दिया ये संदेश

40 साल की सेवा के बाद रिटायर हुए जनरल द्विवेदी, भविष्य की लड़ाई पर सेना को दिया ये संदेश

by Neha Singh 30 June 2026, 2:03 PM IST (Updated 30 June 2026, 2:06 PM IST)
30 June 2026, 2:03 PM IST (Updated 30 June 2026, 2:06 PM IST)
General Upendra Dwivedi Retirement

General Upendra Dwivedi Retirement: भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी 40 साल से ज्यादा सेना में सेवा देने के बाद आज मंगलवार को रिटायर हो गए हैं. उन्हें सेरेमोनियल फेयरवेल में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. अब उनकी जगह जनरल धीरज सेठ ने थल सेना प्रमुख का पदभार संभाला है. उपेंद्र द्विवेदी ने कहा “आज मैं यह जिम्मेदारी जनरल धीरज सेठ को सौंप रहा हूं. वह एक अनुभवी सैनिक और काबिल लीडर हैं. मुझे पूरा भरोसा है कि उनके नेतृत्व में भारतीय सेना अपनी शानदार परंपराओं, प्रोफेशनलिज्म और इरादे को बनाए रखते हुए और भी बड़ी ऊंचाइयों को छुएगी.”

“सेना की सेवा करना मेरा सौभाग्य”

इवेंट के दौरान मीडिया से बात करते हुए जनरल द्विवेदी ने कहा आज, जब मैं आर्मी स्टाफ के चीफ के तौर पर अपना टेन्योर पूरा कर रहा हूं, तो मुझे बहुत शुक्रगुजारी, गर्व और संतुष्टि महसूस हो रही है. जनरल द्विवेदी ने जून 2024 में 30वें आर्मी स्टाफ चीफ का पद संभाला था. उन्होंने कहा, सैनिक स्कूल से अब तक का सफर जबरदस्त रहा है. चार दशकों से ज़्यादा समय तक इंडियन आर्मी की सेवा करना मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा सौभाग्य रहा है. इंडियन आर्मी को अपनी ताकत किसी एक इंसान से नहीं, बल्कि अपने सैनिकों, कमांडरों, वेटरन्स, परिवारों और देश के नागरिकों के अटूट विश्वास से मिलती है.

कैसे होंगे भविष्य में युद्ध

आर्मी चीफ ने इस बात पर जोर दिया कि जिम्मेदारी के साथ नेशनल सिक्योरिटी के लिए काम करके, आर्म्ड फोर्सेज ने “एक न्यू नॉर्मल” तय किया है. जनरल द्विवेदी ने कहा कि मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आर्मी, नेवी और इंडियन एयर फोर्स ने एक जैसी सोच के साथ मिलकर काम किया. उन्होंने कहा भविष्य में, युद्ध संयुक्त, एकीकृत और थिएटर आधारित होगा. इसलिए, हमारी दिशा साफ है साथ मिलकर देखना, साथ मिलकर फैसले लेना और साथ मिलकर काम करना.”

‘भारतीय सैनिकों ने देश का झंडा ऊंचा रखा’

जनरल द्विवेदी ने कहा कि किसी भी कमांडर के लिए, उसकी ताकत उसके सैनिक होते हैं, जिनका कमिटमेंट, बहादुरी और डिसिप्लिन इंडियन आर्मी की पहचान है. UN सैनिकों में तैनाती से लेकर मानवीय सहायता और आपदा राहत ऑपरेशन में हिस्सा लेने तक, भारतीय सैनिकों ने देश का झंडा ऊंचा रखा है, चाहे वह कांगो के घने जंगल हों या वेनेजुएला की भूकंप प्रभावित जमीन. मध्य प्रदेश के रीवा में सैनिक स्कूल के पुराने छात्र, जनरल द्विवेदी को 1984 में जम्मू और कश्मीर राइफल्स में कमीशन मिला था. जनरल ऑफिसर के पास उत्तरी, पूर्वी और पश्चिमी इलाकों में अलग-अलग ऑपरेशनल माहौल में, बैलेंस्ड कमांड के साथ-साथ स्टाफ एक्सपोजर की एक खास पहचान है.

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