Paper Leak: NEET विवादों के बीच दो साल पुराने पेपर लीक विरोधी कानून में बदलाव के लिए एक बिल सोमवार को लोकसभा में पेश किया जाएगा. इस बिल में आरोपियों पर तेज़ी से मुक़दमा चलाने के लिए हर राज्य में फ़ास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने का प्रस्ताव है. ‘पब्लिक एग्ज़ामिनेशन्स (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026’ के अनुसार, पेपर लीक मामलों की जांच दो महीने के अंदर पूरी की जानी है. बिल पेश करने से पहले लोकसभा सदस्यों को जो जानकारी दी गई, उसके मुताबिक़ पेपर लीक या परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वाले लोगों को कम से कम 5 साल और ज़्यादा से ज़्यादा 10 साल की जेल और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है.
संगठित अपराधों के लिए 10 करोड़ तक जुर्माना
इसके अलावा संगठित अपराधों के लिए बिल में कम से कम सात साल की सज़ा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है. बिल में कहा गया है कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का निर्देश दिया जाएगा. ये कोर्ट तेज़ी से सुनवाई करेगी और चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुक़दमा पूरा करेगी. शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग को लेकर जंतर-मंतर और देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्रों के चल रहे विरोध-प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने NEET-UG पेपर लीक जैसे मामलों से निपटने के लिए एक कानून लाने का वादा किया था. उन्होंने यह भी कहा था कि ऐसे मामलों में आरोपियों पर फ़ास्ट-ट्रैक कोर्ट में मुक़दमा चलाया जाएगा.
सोमवार को होगा लोकसभा में पेश
शुक्रवार को केंद्रीय कैबिनेट ने संसद में पेश करने के लिए इस बिल को मंज़ूरी दे दी. इसे सोमवार को लोकसभा में पेश किया जाएगा. ‘पब्लिक एग्ज़ामिनेशन्स (अनुचित साधनों की रोकथाम) एक्ट, 2024’ में बदलाव करने का प्रस्ताव रखने वाला यह बिल, असल में पब्लिक एग्ज़ामिनेशन में अनुचित साधनों के इस्तेमाल को रोकने के लिए बनाया गया था. बिल में कहा गया है कि हाल के वर्षों में पब्लिक एग्ज़ामिनेशन अथॉरिटीज़ द्वारा आयोजित परीक्षाओं में प्रश्न-पत्र लीक होने और गड़बड़ी की कुछ घटनाएं हुई हैं, जिनसे पब्लिक एग्ज़ामिनेशन सिस्टम की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर असर पड़ता है.
हर राज्य में बनेंगे फास्ट-ट्रैक कोर्ट
संशोधन बिल का मकसद सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को यह अधिकार देना है कि वे किसी भी सेशन कोर्ट को प्रस्तावित कानून के तहत अपराधों की सुनवाई के लिए स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट के तौर पर तय कर सकें. इसमें यह भी प्रावधान है कि ऐसी अदालतों में कार्यवाही रोज़ाना के आधार पर चले और चार्जशीट दाखिल होने की तारीख से तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा हो जाए. यह केंद्र सरकार को ज़रूरत पड़ने पर किसी भी अपराध की जांच के लिए एक स्पेशल टास्क फोर्स बनाने का अधिकार भी देता है.
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News Source: PTI
