Home लाइफस्टाइल वजन घटाने के लिए कम खाना जरूरी नहीं? लो फैट Vegan Diet से बिना कैलोरी गिने हो सकता Weight Loss, जानें कैसे

वजन घटाने के लिए कम खाना जरूरी नहीं? लो फैट Vegan Diet से बिना कैलोरी गिने हो सकता Weight Loss, जानें कैसे

by Preeti Pal 24 September 2026, 7:41 PM IST
24 September 2026, 7:41 PM IST
वजन घटाने के लिए कम खाना जरूरी नहीं? लो फैट Vegan Diet से बिना कैलोरी गिने हो सकता Weight Loss, जानें कैसे

Vegan Diet for Weight Loss: वजन कम करने की बात आते ही सबसे पहले दो चीजों का नाम सामने आता है, कैलोरी गिनना और खाना कम करना. सुबह नाश्ते में कितनी कैलोरी, दोपहर में कितनी रोटी और रात को कितना खाना है, इसका हिसाब रखते-रखते कई लोग डाइट से ही परेशान हो जाते हैं. ऊपर से थोड़ी भूख लगे तो मन में यही चलता है कि वजन घटाना है तो पेट को समझाना पड़ेगा. लेकिन एक नई रिसर्च ने वजन घटाने के तरीके को लेकर दिलचस्प सवाल खड़ा किया है. इस रिसर्च के मुताबिक, अगर प्लेट में खाने की ऐसी चीज़ें बढ़ा दी जाएं, जिनमें कैलोरी कम लेकिन पानी और फाइबर ज्यादा हो, तो वजन आसानी से कम हो सकता है. खास तौर पर लो फैट वीगन डाइट को लेकर सामने आई रिसर्च में यही पाया गया है. रिसर्च के मुताबिक, लोगों ने लगभग उतने ही वजन का खाना खाया, लेकिन उनकी रोजाना कैलोरी खपत में काफी कमी आई. ये रिसर्च 16 हफ्ते तक चला और इसमें ओवर वेट यंगस्टर्स को शामिल किया गया. रिसर्च करने वालों ने खास तौर पर ये समझने की कोशिश की कि खाने की मात्रा कम किए बिना उसकी एनर्जी डेंसिटी कम करने से वजन पर क्या असर पड़ता है.

क्या है एनर्जी डेंसिटी?

नाम थोड़ा साइंटिफिक है, लेकिन समझना काफी आसान है. दरअसल, एनर्जी डेंसिटी का मतलब है कि किसी खाने के एक ग्राम में कितनी कैलोरी हैं. उदाहरण के लिए, सब्जियों और कई फलों में पानी और फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है. इसलिए इनका वजन और प्लेट में जगह काफी हो सकती है. हालांकि, प्रति ग्राम कैलोरी कम होती है. दूसरी तरफ, कुछ ज्यादा वसा वाले और कैलोरी डेंस फूड प्रोडक्ट्स थोड़ी मात्रा में ही काफी कैलोरी दे सकते हैं. यही अंतर इस रिसर्च का सबसे बड़ा मुद्दा था. शोधकर्ताओं के मुताबिक, कम कैलोरी वाली वीगन डाइट लेने वाले लोगों के खाने की एनर्जी डेंसिटी लगभग 30 प्रतिशत कम हुई. यानी उनकी प्लेट में खाने की मात्रा बहुत कम किए बिना प्रति ग्राम मिलने वाली कैलोरी कम हो गई.

16 हफ्तों तक की रिसर्च?

रिसर्च में ओवर वेट यंगस्टर्स को दो ग्रुप्स में बांटा गया. एक ग्रुप को ऐसी लो फैट वीगन डाइट दी गई जिसमें ज्यादातर फल, सब्जियां, अनाज, फलियां और दालें शामिल थीं. दूसरे ग्रुप ने अपनी नॉर्मल डाइट जारी रखी और अपने खाने में कोई खास बदलाव नहीं किया. खास बात ये थी कि, किसी भी ग्रुप को रोजाना कैलोरी की कोई लिमिट नहीं दी गई. कंटेस्टेंट्स से ये भी नहीं कहा गया कि वो अपनी प्लेट छोटी करें या जानबूझकर कम मात्रा में खाना खाएं. इसके बाद रिसर्च करने वालों ने लोगों के रोजाना खाने की मात्रा और उसमें मौजूद कैलोरी का आकलन किया. इसका नतीजा काफी दिलचस्प रहा. वीगन डाइट वाले ग्रुप ने खाने के कुल वजन में कोई बड़ी कमी नहीं की. यानी उन्होंने लगभग उतने ही वजन का खाना खाया, लेकिन उस खाने में कैलोरी कम थी. इस ग्रुप में रोजाना कैलोरी की मात्रा करीब 357 कैलोरी तक कम हुई. वहीं, खाने की एनर्जी डेंसिटी में लगभग 30 प्रतिशत की कमी देखी गई.

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बिना भूखे रहे कैलोरी कम

यही इस रिसर्च का सबसे दिलचस्प हिस्सा है. जब कोई व्यक्ति वजन कम करने के लिए सीधे अपने पोर्शन साइज यानी खाने की मात्रा घटाता है, तो पेट को कम खाना मिलता है. ऐसे में कुछ लोगों को बार-बार भूख लग सकती है और डाइट लंबे समय तक जारी रखना मुश्किल हो सकता है. लेकिन एनर्जी डेंसिटी कम करने का तरीका थोड़ा अलग है. इसमें लक्ष्य ये नहीं होता कि प्लेट छोटी कर दी जाए, बल्कि प्लेट के खाने का तरीका बदला जाता है. मान लीजिए आपकी प्लेट में ऐसी सब्जियां, दालें और दूसरे प्लांट फूड ज्यादा हैं जिनमें पानी और फाइबर भरपूर है. इनसे प्लेट भरी हुई दिखाई दे सकती है और खाने की मात्रा भी अच्छी रह सकती है, लेकिन कुल कैलोरी कम होती है. इसी वजह से रिसर्च करने वालों का कहना है कि वजन घटाने का रास्ता सिर्फ कम खाओ तक नहीं होना चाहिए. खाने की क्वालिटी और मात्रा बदलना भी एक अच्छा प्लान हो सकता है.

वीगन डाइट में क्या बदला?

इस डाइट में मीट, डेयरी और अंडे जैसे एनिमल फूड को हटाकर या उनकी जगह प्लांट बेस्ड फूड होते हैं. फल, सब्जियां, साबुत अनाज और फलियां इस डाइट का बेस बने. इस तरह के खाने में आम तौर पर पानी और फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है. वहीं, एनिमल फूड और ज्यादा कैलोरी वाले खाने की तुलना में इनकी एनर्जी डेंसिटी कम हो सकती है. रिसर्च की मुख्य लेखिका हाना काहलेओवा के मुताबिक, ये तरीका सिर्फ इच्छाशक्ति या छोटे पोर्शन साइज पर निर्भर नहीं करता. उनके अनुसार, कम एनर्जी डेंसिटी वाला खाना खाकर भी आराम से वजन कम किया जा सकता है. हालांकि, यहां एक बात समझना भी जरूरी है, कि ये निष्कर्ष इस खास 16 हफ्ते की रिसर्च के कंटेस्टेंट और उनकी डाइट पर आधारित है. इसका मतलब ये नहीं है कि हर किसी के लिए वीगन डाइट फॉलो करना ही वजन घटाने का सबसे अच्छा या एकमात्र तरीका है.

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फाइबर और पानी का खेल

प्लांट बेस्ड फूड की सबसे बड़ी खासियत है पानी और फाइब. फल और सब्जियों में पानी की मात्रा ज्यादा होने की वजह से ये कम कैलोरी में ज्यादा मात्रा में हो सकती हैं. फाइबर भी पेट को ज्यादा देर तक भरे रहने वाली फीलिंग देता है. यही वजह है कि वजन को मैनेज करने के लिए सिर्फ कैलोरी देखने की बजाय खाने के स्ट्रक्चर पर ध्यान देना कुछ लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है. उदाहरण के तौर पर, अगर कोई अपनी प्लेट में सब्जियों, दालों और साबुत अनाज की मात्रा बढ़ाता है और ज्यादा कैलोरी वाला खाना कम करता है, तो हो सकता है कि टोटल कैलोरी कम हो जाए, भले ही उसे लगे कि उसने अच्छी तरह से खाया है. हालांकि, हर वीगन फूड अपने आप लो कैलोरी नहीं होता, ये फर्क समझना बहुत जरूरी है. वीगन होने का मतलब हमेशा कम कैलोरी वाला खाना नहीं होता. कई प्लांट बेस्ड पैकेज्ड फ़ूड, प्राइड फूड, मिठाई और तली हुई चीजों में कैलोरी काफी ज्यादा हो सकती है. इसलिए असली फोकस लो फैट और लो एनर्जी डेंस्टी फूड पर रखना चाहिए.

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क्या कैलोरी गिनने की जरूरत नहीं?

वजन में बदलाव पर टोटल एनर्जी की बड़ी भूमिका है. कुछ लोगों के लिए कैलोरी कम करने का रास्ता हर निवाले की कैलोरी गिनने के बजाय खाने का स्ट्रक्चर बदलना हो सकता है. यानी हर रात कैलकुलेटर लेकर बैठने के बजाय खाने की प्लेट पर ध्यान देना एक ऑप्शन हो सकता है. आपकी प्लेट में क्या ज्यादा है? सब्जियां, दालें, फल और साबुत अनाज या ज्यादा तेल और कैलोरी डेंस फूड? यही अंतर एनर्जी डेंसिटी को बदल सकता है.

वेट लॉस के लिए अलग सोच

अक्सर डाइट प्लान में लिखा होता है, छोटी प्लेट इस्तेमाल करें, पोर्शन कम करें और कैलोरी गिनें. ये तरीका कुछ लोगों के लिए काम कर सकता है, लेकिन हर व्यक्ति के लिए इसे लंबे समय तक फॉलो करना आसान नहीं होता. इस रिसर्च से एक अलग सोच सामने आती है और वो है, खाना कम करने के बजाय खाने को बदलना. अगर प्लेट में कम कैलोरी वाले खाने की हिस्सेदारी बढ़ाई जाए तो कम खाए बिना भी वजन कम किया जा सकता है. लेकिन सवाल यही है कि, क्या कोई भी ये कर सकता है? ऐसे में अगर कोई व्यक्ति इस तरह की डाइट अपनाने के बारे में सोच रहा है तो अचानक पूरी डाइट बदलने के बजाय धीरे-धीरे शुरुआत करना ज्यादा अच्छा ऑप्शन हो सकता है. उदाहरण के लिए खाने में सब्जियों और दालों की मात्रा बढ़ाना, ज्यादा तेल वाली चीज़ों को कम करना और साबुत अनाज के साथ-साथ प्लांट से मिलने वाली चीज़ों को शामिल करना एक तरीका हो सकता है. लेकिन वीगन डाइट में मीट, अंडा और डेयरी पूरी तरह हटाने से पहले पोषक तत्वों के संतुलन पर ध्यान देना जरूरी है. पोर्शन, विटामिन B12, आयरन, कैल्शियम और बाकी पोषक तत्वों की पर्याप्त मात्रा सुनिश्चित करना जरूरी है. खासकर प्रेग्नेंट महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों या किसी मेडिकल कंडीशन वाले इंसान को अपनी डाइट में बड़े बदलाव से पहले डॉक्टर या डाइटीशियन से सलाह ले लेनी चाहिए.

बॉटम लाइन

16 हफ्ते के रैंडमाइज़्ड क्लिनिकल ट्रायल से ये हिंट मिला कि लो फैट वीगन डाइट ने खाने की एनर्जी डेंसिटी को लगभग 30 प्रतिशत कम किया. इसके अलावा कंटेस्टेंट्स के कैलोरी इनटेक में रोज करीब 357 कैलोरी की कमी देखी गई. सिंपल शब्दों में कहें तो रिसर्च का मैसेज क्लियर है कि, वजन घटाने के लिए हमेशा प्लेट को छोटा करना जरूरी नहीं हो सकता, प्लेट में मौजूद खाने को समझदारी से बदलना भी एक रास्ता हो सकता है. फिर भी ये एक खास रिसर्च का रिजल्ट हैं, कोई यूनिवर्सल डाइट फॉर्मूला नहीं. वेट लॉस हर इंसान में अलग तरह से काम करता है. हालांकि, लबें रिजल्ट के लिए बैलेंस्ड खाना, फिजिकल एक्टिविटी और पर्सनल हेल्थ को फोकस में रखना बहुत जरूरी है.

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