MP News: मध्य प्रदेश के उज्जैन से इस वक्त का सबसे बड़ा अपडेट, महाकाल की नगरी में सिंहस्थ 2028 की भव्य तैयारियों के बीच प्रशासन का ऐसा बुलडोजर एक्शन सामने आया है, जिसने पूरे प्रदेश को हैरान कर दिया है. कानून और नियम सबके लिए बराबर होते हैं और इसकी सबसे बड़ी मिसाल पेश हुई है उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के रास्ते में आने वाले 272 मकानों और निर्माणों को चिन्हित किया गया है. चौंकाने वाली बात यह है कि इस लिस्ट में स्वयं मुख्यमंत्री मोहन यादव का पैतृक निवास और उनकी बहन कलावती यादव का मकान भी शामिल है. नगर निगम ने सीएम के घर पर भी लाल निशान लगा दिया है.
मोहन यादव का पैतृक मकान भी जद में आया
बता दें कि महाकाल की नगरी उज्जैन को सिंहस्थ 2028 के लिए दिव्य और भव्य बनाने की कवायद अब धरातल पर उतर चुकी है. लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए उज्जैन की प्रमुख सडक़ों का चौड़ीकरण तेजी से किया जा रहा है. इसी कड़ी में जब नगर निगम और प्रशासन की टीम सड़कों की नाप-जोख करने निकली, तो नक्शे के दायरे में मोहन यादव का पैतृक मकान भी आ गया.
प्रशासन ने बिना किसी हिचकिचाहट के मुख्यमंत्री के मकान और उनकी बहन कलावती यादव के घर के प्रभावित हिस्से पर लाल निशान लगा दिया है. यानी सड़क चौड़ी करने के लिए सीएम के घर का भी एक हिस्सा तोड़ा जाएगा.
बुलडोजर की जद में क्या-क्या?
- कुल प्रभावित निर्माण: 272 मकान एवं व्यावसायिक परिसर
- अन्य मुख्य संरचनाएं: मस्जिद और धार्मिक स्थल भी शामिल
- मकसद: सिंहस्थ 2028 के लिए सडक़ों का चौड़ीकरण व सुगम यातायात
सड़क चौड़ीकरण की जद में कुल 272 मकान
प्रशासन की इस कार्रवाई में किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जा रहा है. सड़क चौड़ीकरण की जद में कुल 272 मकान और दुकानें आ रही हैं. इसमें एक मस्जिद समेत कई धार्मिक और निजी निर्माण भी शामिल हैं. शहर के चौराहों और मुख्य मार्गों को चौड़ा कर आने वाले सिंहस्थ महाकुंभ के लिए मास्टर प्लान को अमलीजामा पहनाया जा रहा है.
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नियम सबके लिए एक समान
आमतौर पर जब वीआईपी या सत्ताधारी नेताओं के निर्माण की बात आती है तो कार्रवाई में सुस्ती देखने को मिलती है, लेकिन उज्जैन प्रशासन ने साफ संदेश दे दिया है कि महाकाल के दरबार और जनता के विकास के आगे नियम सबके लिए एक समान हैं. मुख्यमंत्री के मकान पर लाल निशान लगने के बाद अब स्थानीय लोगों का भी कहना है कि जब सीएम खुद अपने घर पर बुलडोजर चलने के लिए तैयार हैं तो पूरे शहर के विकास को कोई रोक नहीं सकता.
उज्जैन का यह लाल निशान केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं बल्कि इस बात की गवाही है कि सिंहस्थ 2028 की तैयारी में कोई समझौता नहीं होगा, फिर चाहे दायरा आम आदमी का हो या फिर प्रदेश के मुख्यमंत्री का.
