Shri Ram Temple: श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की रकम की कथित चोरी और गड़बड़ियों के मामले में पहली FIR दर्ज की गई है. इस मामले में टिन्नू यादव और अनुकल्प मिश्रा को नामज़द किया गया है. इसके अलावा अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष और करुणेश के साथ एक अज्ञात पर भी केस दर्ज किया गया है. यह कार्रवाई श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर की गई है. यह मामला राम जन्मभूमि कोतवाली पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है. पुलिस ने सभी आरोपियों को हिरासत में ले लिया है. उधर, सूत्रों ने बताया कि चंपत राय और अनिल मिश्रा से इस्तीफा ले लिया गया है.
जांच में कई कर्मचारियों के बयान भी शामिल
मंदिर में चढ़ावे के कलेक्शन और जमा करने की प्रक्रिया की जांच के दौरान वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई. SIT की शुरुआती रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है. इस मामले की जांच कर रही SIT अब आरोपियों की भूमिका, चढ़ावे के प्रबंधन, वित्तीय लेन-देन और अन्य संबंधित पहलुओं की गहराई से जांच कर रही है. जांच के दायरे में CCTV फुटेज, दस्तावेज़ और संबंधित कर्मचारियों के बयान भी शामिल हैं.
SIT फिर कर सकती है पूछताछ
SIT अभी तक मिली शिकायतों, वीडियो सबूतों, कागज़ात और डोनेशन सिस्टम से जुड़े रिकॉर्ड्स की दोबारा जांच कर रही है. इसके बाद, ज़रूरत पड़ने पर शिकायत करने वालों, गिनती की प्रक्रिया में शामिल लोगों और दूसरे संबंधित पक्षों से फिर से पूछताछ की जा सकती है. जांच के हिस्से के तौर पर SIT राम मंदिर ट्रस्ट के अकाउंटिंग सिस्टम की भी जांच करेगी और मंदिर की आय और खर्च के बारे में मौजूद जानकारी का आकलन करेगी. साथ ही ज़मीन अधिग्रहण से जुड़ी फाइलों की भी बारीकी से जांच की जाएगी और संबंधित लोगों से पूछताछ की जाएगी. SIT ने अब अपनी विस्तृत जांच का दायरा बढ़ाते हुए मंदिर ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई ज़मीन को भी इसमें शामिल कर लिया है.
SIT ने बढ़ाया जांच का दायरा
2021 से हुए ज़मीन के सौदों से जुड़े दस्तावेज़ों, पेमेंट रिकॉर्ड और रेवेन्यू फ़ाइलों की बारीकी से जांच की जा रही है. पिछले कुछ सालों में लगे आरोपों और सामने आए दस्तावेज़ों के आधार पर SIT यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या सभी लेन-देन तय प्रक्रियाओं के अनुसार किए गए थे. उम्मीद है कि इस जांच से मामले के कई पहलू सामने आएंगे. राम मंदिर के लिए ज़मीन की खरीद को लेकर समय-समय पर कई विवाद सामने आए हैं. अलग-अलग पक्षों ने कुछ सौदों में गड़बड़ी का आरोप लगाया था और दस्तावेजों के आधार पर कीमतों में भारी अंतर और वित्तीय अनियमितताओं का हवाला दिया था.
ट्रस्ट के कामकाज पर उठे सवाल
हालांकि, ट्रस्ट का हमेशा से यही कहना रहा है कि खरीद की सभी प्रक्रियाएं पारदर्शी थीं और नियमों के मुताबिक थीं. अब SIT ने अपनी विस्तृत जांच में इन आरोपों को भी शामिल कर लिया है. SIT की शुरुआती रिपोर्ट के बीच एक ऐसी बात सामने आई है जिससे ट्रस्ट के कामकाज पर नए सवाल उठ रहे हैं. 2020 में ट्रस्ट के बनने के कुछ ही महीनों बाद एक प्राइवेट ऑडिट फर्म ने डोनेशन मैनेजमेंट, गहनों के रिकॉर्ड, फाइनेंशियल देखरेख और एडमिनिस्ट्रेटिव व्यवस्थाओं में गंभीर कमियों की ओर इशारा किया था और चेतावनी दी थी कि सुधार के कदम उठाने की ज़रूरत है. इसके बावजूद, इस मामले पर कोई ध्यान नहीं दिया गया.फर्म ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि फाइनेंशियल रिपोर्टिंग के लिए ज़रूरी रिकॉर्ड्स की कमी थी और मैनेजमेंट की जवाबदेही तय करने के लिए कोई साफ़ प्रशासनिक सिस्टम नहीं था.
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News Source: PTI
