Home Latest News & Updates सांस फूलने को न करें नजरअंदाज, हाई BP हो सकता है जानलेवा, विशेषज्ञों ने बताया पल्मोनरी हाइपरटेंशन का इलाज

सांस फूलने को न करें नजरअंदाज, हाई BP हो सकता है जानलेवा, विशेषज्ञों ने बताया पल्मोनरी हाइपरटेंशन का इलाज

by Dheeraj Tripathi 10 August 2026, 11:38 AM IST (Updated 10 August 2026, 11:50 AM IST)
10 August 2026, 11:38 AM IST (Updated 10 August 2026, 11:50 AM IST)
Pulmonary Hypertension

Pulmonary Hypertension: अगर थोड़ी सी सीढ़ियां चढ़ने, कुछ दूर चलने या सामान्य काम करने पर ही सांस फूलने लगे, लगातार थकान महसूस हो, चक्कर आए या सीने में दर्द हो तो इसे महज कमजोरी या सामान्य सांस की समस्या समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. ये लक्षण पल्मोनरी हाइपरटेंशन (PH) जैसी गंभीर बीमारी के शुरुआती संकेत हो सकते हैं. इस बीमारी में फेफड़ों की रक्त वाहिकाओं में दबाव बढ़ जाता है और दिल के दाहिने हिस्से को फेफड़ों तक रक्त पहुंचाने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU), लखनऊ में आयोजित दो दिवसीय PH Summit Lucknow 2026 में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने पल्मोनरी हाइपरटेंशन के बदलते इलाज, आधुनिक जांच तकनीकों और मरीजों की बेहतर रिस्क असेसमेंट पर विस्तार से चर्चा की. 8 और 9 अगस्त को आयोजित इस इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस की थीम “Advancing Diagnosis, Therapeutics and Outcomes” रही.

देर से पकड़ में आती है बीमारी

KGMU के पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. वेद प्रकाश के मुताबिक पल्मोनरी हाइपरटेंशन की सबसे बड़ी चुनौती इसका देर से पता चलना है. शुरुआती दौर में इसके लक्षण सामान्य हृदय या फेफड़ों की बीमारी जैसे दिखाई दे सकते हैं. यही वजह है कि मरीज और कई बार शुरुआती स्तर पर इलाज करने वाले चिकित्सक भी इसे आसानी से पहचान नहीं पाते. विशेषज्ञों के मुताबिक सांस फूलना, थकान, चक्कर आना, सीने में दर्द, पैरों या पेट में सूजन और कभी-कभी बेहोशी जैसे लक्षणों को गंभीरता से लेने की जरूरत है. बीमारी की पहचान में देरी होने पर मरीज गंभीर अवस्था में पहुंच सकता है. प्रो. वेद प्रकाश ने बताया कि PH Summit का उद्देश्य पल्मोनरी हाइपरटेंशन के क्षेत्र में हो रहे नए शोध और आधुनिक उपचार तकनीकों को मरीजों के इलाज तक पहुंचाना है, ताकि चिकित्सक बीमारी की जल्द पहचान कर बेहतर उपचार और जोखिम का अधिक सटीक आकलन कर सकें.

सांस फूलना हो सकता है पहला संकेत

पल्मोनरी हाइपरटेंशन में सबसे आम लक्षणों में सांस फूलना और जल्दी थक जाना शामिल हैं. शुरुआत में मरीज को सिर्फ तेज चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर परेशानी महसूस हो सकती है, लेकिन बीमारी बढ़ने पर सामान्य गतिविधियों के दौरान भी सांस फूल सकती है. इसके अलावा- चक्कर आना या बेहोशी, सीने में दर्द, लगातार थकान और कमजोरी, पैरों, पंजों या पेट में सूजन, होंठ या त्वचा का नीला पड़ना, खांसी और कुछ मामलों में खून आना जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि बिना स्पष्ट कारण लगातार सांस फूल रही हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

किसे ज्यादा खतरा?

पल्मोनरी हाइपरटेंशन कई अलग-अलग कारणों से हो सकता है. इसके प्रमुख कारणों में बाईं ओर के हृदय की बीमारियां, पुरानी फेफड़ों की बीमारियां, कम ऑक्सीजन, फेफड़ों में रक्त के थक्के और कुछ अन्य बीमारियां शामिल हैं. जन्मजात हृदय रोग, कोरोनरी आर्टरी डिजीज, रूमैटिक हार्ट डिजीज और COPD जैसी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों में भी PH का खतरा अधिक हो सकता है. इसके अलावा कुछ मरीजों में यह बीमारी बिना किसी स्पष्ट कारण के होती है, जिसे इडियोपैथिक पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन कहा जाता है. क्रोनिक किडनी डिजीज से पीड़ित मरीजों में भी पल्मोनरी हाइपरटेंशन की समस्या देखी जाती है.

पल्मोनरी हाइपरटेंशन के पांच प्रमुख ग्रुप

डॉक्टरों के अनुसार PH को मुख्य रूप से पांच समूहों में बांटा जाता है-

ग्रुप-1: Pulmonary Arterial Hypertension यानी PAH
ग्रुप-2: बाईं ओर के हृदय रोग के कारण PH
ग्रुप-3: फेफड़ों की बीमारी या कम ऑक्सीजन के कारण PH
ग्रुप-4: Chronic Thromboembolic Pulmonary Hypertension यानी CTEPH
ग्रुप-5: कई या अस्पष्ट कारणों से होने वाला PH

इन सभी प्रकारों का कारण और इलाज अलग हो सकता है. इसलिए सही डायग्नोसिस बेहद महत्वपूर्ण है.

निदान के लिए सिर्फ एक जांच काफी नहीं

पल्मोनरी हाइपरटेंशन की पहचान के लिए मरीज की मेडिकल हिस्ट्री और शारीरिक जांच के साथ कई स्तरों पर जांच की जाती है. शुरुआत में ब्लड टेस्ट, ECG और चेस्ट एक्स-रे जैसी जांचें की जा सकती हैं. इसके बाद इकोकार्डियोग्राफी के जरिए हृदय और विशेष रूप से दाई हृदय की स्थिति का आकलन किया जाता है.

जरूरत पड़ने पर ये टेस्ट किए जाते हैं.

  • Pulmonary Function Test
  • Sleep Study
  • Exercise Test
  • CT Scan
  • Cardiac MRI
  • V/Q Scan

हालांकि पल्मोनरी हाइपरटेंशन की पुष्टि के लिए Right Heart Catheterization महत्वपूर्ण जांच है. इसमें हृदय और फेफड़ों की रक्त वाहिकाओं में दबाव का प्रत्यक्ष आकलन किया जाता है.

KGMU में तीन खास हैंड्स-ऑन वर्कशॉप

PH Summit 2026 की सबसे खास विशेषताओं में 9 अगस्त को आयोजित तीन हैंड्स-ऑन वर्कशॉप रहीं. इनका उद्देश्य डॉक्टरों और डेलीगेट्स को सिर्फ सैद्धांतिक जानकारी देना नहीं बल्कि आधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण देना था.

इकोकार्डियोग्राफी वर्कशॉप

डॉ. अमित आनंद और उनकी टीम के नेतृत्व में आयोजित वर्कशॉप में करीब 30 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया. इसमें पल्मोनरी हाइपरटेंशन में इकोकार्डियोग्राफिक असेसमेंट और राइट हार्ट फंक्शन के व्यावहारिक पहलुओं पर प्रशिक्षण दिया गया.

राइट हार्ट कैथीटेराइजेशन

प्रो. डॉ. वेद प्रकाश और उनकी टीम ने करीब 28 प्रतिभागियों को राइट हार्ट कैथीटेराइजेशन की तकनीक और इनवेसिव हेमोडायनामिक असेसमेंट के बारे में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया. यह जांच PH की पुष्टि और बीमारी की गंभीरता समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

CPET वर्कशॉप

डॉ. बाशा जे. खान और उनकी टीम की अगुवाई में हुई Cardiopulmonary Exercise Testing (CPET) वर्कशॉप में करीब 34 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया. इसमें मरीज की एक्सरसाइज क्षमता और फंक्शनल स्टेटस का आकलन करने के लिए CPET के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया गया.

इलाज बीमारी के प्रकार और गंभीरता पर निर्भर

विशेषज्ञों के मुताबिक पल्मोनरी हाइपरटेंशन का इलाज सभी मरीजों में एक जैसा नहीं होता. सबसे पहले यह पता लगाना जरूरी है कि PH किस कारण से हुआ है और मरीज बीमारी के किस स्तर पर है. इलाज में ऑक्सीजन थेरेपी, जीवनशैली और सपोर्टिव उपायों के साथ जरूरत के अनुसार दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है. PAH के कुछ मरीजों में एंडोथेलिन रिसेप्टर एंटागोनिस्ट, PDE-5 इनहिबिटर, प्रोस्टासाइक्लिन आधारित उपचार और अन्य टार्गेटेड थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है.

कुछ विशेष परिस्थितियों में कैल्शियम चैनल ब्लॉकर, डाययूरेटिक्स या एंटीकोआगुलेंट जैसी दवाएं भी दी जा सकती हैं. वहीं CTEPH जैसे कुछ मामलों में सर्जिकल या इंटरवेंशनल उपचार, जैसे pulmonary endarterectomy या balloon pulmonary angioplasty, महत्वपूर्ण विकल्प हो सकते हैं.
बहुत गंभीर और उपचार से नियंत्रित न होने वाले मामलों में लंग ट्रांसप्लांट या हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट पर विचार किया जा सकता है.

देर से डायग्नोसिस क्यों बनता है बड़ी चुनौती?

पल्मोनरी हाइपरटेंशन के शुरुआती लक्षण सामान्य लगने के कारण मरीज अक्सर डॉक्टर तक देर से पहुंचते हैं. कई मरीज सांस फूलने को उम्र, कमजोरी, वजन बढ़ने या सामान्य फेफड़ों की समस्या से जोड़कर देखते रहते हैं. यही देरी बीमारी को गंभीर अवस्था में पहुंचा सकती है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार PAH के बड़ी संख्या में मरीजों में बीमारी का पता गंभीर फंक्शनल स्टेज पर पहुंचने के बाद चलता है. इसलिए विशेषज्ञों का जोर Early Diagnosis, सही Risk Stratification और समय पर Targeted Treatment पर है.

KGMU में मल्टी-स्पेशियलिटी अप्रोच

KGMU का पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग PH के मरीजों की जांच और इलाज में पल्मोनरी फंक्शन टेस्टिंग, इकोकार्डियोग्राफी और एडवांस्ड इमेजिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करता है. जरूरत के अनुसार कार्डियोलॉजी, रुमैटोलॉजी, रेडियोडायग्नोसिस और अन्य विशेषज्ञ विभागों के साथ मिलकर मरीज का मूल्यांकन किया जाता है. गंभीर मरीजों, विशेषकर PH Crisis और Right Ventricular Failure वाले मरीजों के लिए क्रिटिकल केयर सपोर्ट भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

डॉक्टरों की अपील- सांस फूलने को सिर्फ ‘कमजोरी’ न समझें

PH Summit 2026 से निकलने वाला सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि लगातार या बिना स्पष्ट कारण सांस फूलने की समस्या को नजरअंदाज न किया जाए. अगर किसी व्यक्ति को धीरे-धीरे बढ़ती सांस फूलने, असामान्य थकान, चक्कर, सीने में दर्द या पैरों में सूजन जैसी समस्या हो रही है, खासकर यदि पहले से हृदय, फेफड़े या किडनी की बीमारी है, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है. पल्मोनरी हाइपरटेंशन की पहचान जितनी जल्दी होगी, बीमारी के कारण और गंभीरता के अनुसार उपचार शुरू करने का अवसर उतना ही बेहतर होगा.

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