India at CWG 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का शानदार समापन हो चुका है. स्कॉटलैंड के ग्लासगो में इसका भव्य आयोजन किया गया था. बीते 23 जुलाई से 2 अगस्त 2026 तक कुल 11 दिनों तक चले इस खेल के महाकुंभ में भारत ने शानदार प्रदर्शन किया है. कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कुल 74 देशों के 2700 से अधिक खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था.
इन देशों में भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका के भी खिलाड़ी शामिल हुए. इस बीच कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया है. अंक तालिका में भारत टॉप चार स्थान पर रहकर दुनिया में देश के खिलाड़ियों का दम दिखा दिया. हालांकि, इस मामले में पड़ोसियों की हालत बहुत ही खराब रही.
पाकिस्तान, जिसके खिलाड़ी अरशद नदीम ने ओलंपिक के जैवलिन थ्रो में भारत के नीरज चोपड़ा को हराकर गोल्ड मेडल जीता था, वे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सिर्फ पदक से ही नहीं चुके, बल्कि नीरज के सामने वे दूर-दूर तक नहीं दिखे. नदीम नौवें स्थान के साथ कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 से बाहर हो गए थे. वहीं, बांग्लादेश का खाता तक नहीं खुला. हालांकि, इन दोनों की तुलना में श्रीलंका थोड़ा अच्छा रहा और दो पदक जीता. ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का अब समापन हो चुका है. इसके साथ ही भारत को अगले कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी की कमान भी मिल गई है. आइए अब इसे थोड़ा विस्तार से जानते हैं. शुरुआत पड़ोसियों से ही करेंगे.

पाकिस्तान और बांग्लादेश का बुरा हाल
ग्लासगो से पहले कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन साल 2022 में बर्मिंघम में हुआ था. तब पाकिस्तान ने कुल 7 पदक जीते थे, जिसमें दो गोल्ड, 3 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज मेडल थे. लेकिन, कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पाकिस्तान की हालत काफी खराब रही और इसे सिर्फ एक मेडल और वह भी कॉस्य (तीसरा स्थान) से संतोष करना पड़ा.
मिली जानकारी के अनुसार, ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पाकिस्तान के कुल 21 खिलाड़ियों ने भाग लिया था. लेकिन इनमें से 20 को मेडल के नाम पर निराशा हाथ लगी. वहीं, पाकिस्तान की सिर्फ एक महिला खिलाड़ी, जिनका नाम फातिमा जहरा है, उन्होंने पाक की लाज बचाई और पाकिस्तान के लिए महिला मुक्केबाजी में कांस्य पदक जीता. उन्होंने यह मेडल 60 किलोग्राम भारवर्ग में जीता. वह इस जीत के साथ कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतने वाली पहली पाकिस्तानी महिला बॉक्सर बन गईं. इनके एक पदक जीतने के साथ पाकिस्तान कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की अंक तालिका में संयुक्त रूप से 36वें स्थान पर रहा.
बांग्लादेश की बात करें तो इसने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में अपने कुल 15 खिलाड़ियों को भेजा था और मेडल के नाम पर सभी को निराशा हाथ लगी क्योंकि किसी ने एक पदक तक नहीं जीता. वहीं, श्रीलंका की बात करें तो इसके खिलाड़ियों ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कुल दो मेडल जीते हैं. श्रीलंकाई स्टार रुमेश थरंगा पथिरागे ने जैवलिन थ्रो में गोल्ड मेडल जीता. उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में 89.75 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया था. इस खेल में भारत के स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा दूसरे स्थान पर रहे थे और उन्होंने अपने नाम सिल्वर मेडल किया था.
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने जीते 39 मेडल
भारत ने 2026 राष्ट्रमंडल खेलों से एक और प्रभावशाली पदक संग्रह के साथ विदाई ली, जिसमें कुछ पारंपरिक गढ़ों को बाहर करने वाले काफी कम किए गए खेल कार्यक्रम में भाग लेने के बावजूद 39 पोडियम फिनिश के साथ चौथे स्थान पर रहा. जी हां, कुल 39 मेडल के साथ भारत ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की अंक तालिका में चौथे स्थान पर रहा है. इन 39 मेडलों में 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं.
न्यूज एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक मुक्केबाजी बनकर उभरी, जिसने सात स्वर्ण और तीन रजत सहित 10 पदक हासिल किए, जबकि कई ट्रैक एंड फील्ड और पैरा एथलीटों ने भी पोडियम पर कई स्थान प्राप्त किए. जहां मुक्केबाजों ने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया, वहीं जूडो खिलाड़ियों ने पदक तालिका में महत्वपूर्ण पदक जोड़े.
हालांकि शूटिंग, बैडमिंटन, कुश्ती, हॉकी और टेबल टेनिस जैसे खेलों की अनुपस्थिति के साथ-साथ समग्र कार्यक्रम में कमी ने पिछले संस्करणों की तुलना में भारत की पदक जीतने की संभावनाओं को प्रभावित किया, फिर भी दल ने बदले हुए परिदृश्य के अनुरूप खुद को अच्छी तरह से ढाल लिया और खेलों में सबसे सफल टीमों में से एक रहा.
वहीं, भारत के लिए कुछ निराशाएं भी रहीं, जब भारत के अभियान को शुरुआती झटका लगा क्योंकि एंटी-डोपिंग नियमों के तहत तीन बार अपने ठिकाने का खुलासा न कर पाने के कारण जूडोका तुलिका मान को खेलों से पहले ही अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया था.

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122 सदस्यों वाली भारतीय टीम के नाम 39 मेडल
भारत ने 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में कई ऐसे पारंपरिक खेलों के न होने के बावजूद उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया, जिनमें देश को अक्सर मेडल मिलते थे. बॉक्सिंग में रिकॉर्ड-तोड़ प्रदर्शन, जूडो में ऐतिहासिक कामयाबी और पैरा-एथलीटों के शानदार प्रदर्शन के दम पर भारत ने 39 मेडल जीतकर चौथा स्थान हासिल किया.
इन गेम्स में खेलों की संख्या घटाकर सिर्फ 10 कर दी गई थी, जिसमें रेसलिंग, शूटिंग, बैडमिंटन और हॉकी जैसे खेल शामिल नहीं थे. इस वजह से गेम्स शुरू होने से पहले भारत के टॉप-5 में रहने की संभावना पर संदेह था. हालांकि, 122 सदस्यों वाली भारतीय टीम 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और नौ ब्रॉन्ज मेडल के साथ लौटी, जो यह दिखाता है कि देश की क्षमता अब पारंपरिक मजबूत खेलों से कहीं आगे बढ़ गई है.
बॉक्सिंग ने सबसे आगे रहकर किया नेतृत्व
भारतीय मुक्केबाजों ने कॉमनवेल्थ गेम्स में अपना अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया और कुल मिलाकर रिकॉर्ड सात गोल्ड मेडल और 10 पोडियम फिनिश हासिल किए. जहां महिला खिलाड़ियों ने उम्मीदों को पूरा किया, वहीं पुरुष खिलाड़ियों ने भी लगातार अच्छा प्रदर्शन किया, जिससे यह ग्लासगो में भारत का सबसे सफल खेल बन गया.
हालांकि, इस प्रदर्शन को सही संदर्भ में देखा जाना चाहिए. कई यूरोपीय और मध्य एशियाई देशों के शामिल न होने के कारण, मुकाबला उतना कड़ा नहीं था जितना कि ओलंपिक या वर्ल्ड चैंपियनशिप में होता है. फिर भी, भारत ने इस मौके का पूरा फायदा उठाया.

जूडो एक और बड़ी सकारात्मक बात
जूडो को लंबे समय से कम अहमियत वाला मेडल वाला खेल माना जाता था, लेकिन इसने कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन किया. अपने पिता को खोने के कुछ महीनों बाद अस्मिता डे का गोल्ड मेडल जीतना और हर्ष सिंह का खिताब जीतना, इस खेल में पिछले कुछ वर्षों में हुई लगातार प्रगति को दर्शाता है.
पैरा स्पोर्ट्स की तरक्की की रफ्तार
पावरलिफ्टिंग से लेकर एथलेटिक्स तक, भारतीय पैरा एथलीटों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि हालिया पैरालंपिक में उनकी सफलता कोई इत्तेफाक नहीं थी. अलग-अलग खेलों में मिले मेडल देश के पैरा स्पोर्ट्स प्रोग्राम की बढ़ती ताकत को दर्शाते हैं. पैरा स्पोर्ट्स की तरक्की का सिलसिला जारी रहा.
पावरलिफ्टिंग से लेकर एथलेटिक्स तक, भारतीय पैरा एथलीटों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि हालिया पैरालंपिक में उनकी सफलता कोई इत्तेफाक नहीं थी. अलग-अलग खेलों में जीते गए मेडल देश के पैरा स्पोर्ट्स प्रोग्राम की बढ़ती ताकत को दिखाते हैं.
एथलेटिक्स में मिली-जुली दिखी तस्वीर
ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा चोट से वापसी करते हुए सिल्वर मेडल ही जीत पाए और मेडल की उम्मीद वाले कुछ अन्य खिलाड़ी उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके. साथ ही, इस खेल में भारत के कुछ सबसे यादगार प्रदर्शन भी देखने को मिले.
तेजस्विन शंकर ने घुटने की चोट से उबरकर डेकाथलॉन में मेडल जीता, जबकि इससे पहले उनकी हाई जंप की चुनौती चोट के कारण खत्म हो गई थी. गुलवीर सिंह लंबी दूरी की दौड़ में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत के एकमात्र डबल मेडलिस्ट बने. वहीं मुरली श्रीशंकर ने लंबी चोट के बाद वापसी करते हुए एक और कॉमनवेल्थ सिल्वर मेडल अपने नाम किया. भारत के लिए मेडल दिलाने वाले सबसे भरोसेमंद खेलों में से एक, वेटलिफ्टिंग के लिए ये गेम्स कुछ खास नहीं रहे.
चार साल पहले बर्मिंघम में तीन गोल्ड समेत 10 मेडल जीतने के बाद, इस बार वेटलिफ्टर्स आठ बार पोडियम तक तो पहुंचे लेकिन सिर्फ एक गोल्ड मेडल ही जीत पाए, जो मीराबाई चानू ने जीता. पिछली एंटी-डोपिंग पाबंदियों की वजह से कोटा में कटौती के कारण कम खिलाड़ियों वाली टीम के साथ उतरने के बावजूद, टीम ने सम्मानजनक प्रदर्शन किया, लेकिन अपने ही ऊंचे स्टैंडर्ड्स तक नहीं पहुंच पाई.
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2030 में भारत करेगा मेजबानी
न्यूज एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को स्कॉटलैंड और भारत के झंडे लिए ध्वजवाहकों के नेतृत्व में जुलूस ने मुड़े हुए खेलों के ध्वज को नीचे उतारा. ग्लासगो की लॉर्ड प्रोवोस्ट जैकलीन मैकलारेन ने इसे कॉमनवेल्थ गेम्स स्कॉटलैंड की उपाध्यक्ष सुसान जैक्सन, स्कॉटिश नेटबॉल खिलाड़ी एमिली निकोल, कॉमनवेल्थ स्पोर्ट्स के अध्यक्ष डॉ. डोनाल्ड रुकारे, दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा, भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा और गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी को सौंप दिया. इसके साथ ही मेजबानी की जिम्मेदारी आधिकारिक तौर पर स्कॉटलैंड से भारत को हस्तांतरित हो गई.
भारत 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करेगा. इसका आयोजन गुजरात के शहर अहमदाबाद में होगा. बता दें कि इससे पहले भारत ने राजधानी दिल्ली में साल 2010 में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी की थी.

समापन समारोह में भारत-स्कॉटिश संस्कृतियों की ‘जुगलबंदी’
बता दें कि 11 दिनों की कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद, ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों का समापन रविवार को एक भव्य समारोह में हुआ, जिसमें शताब्दी संस्करण के मेजबान भारत को ध्वज और कमान सौंपी गई. इस समापन समारोह की शुरुआत स्कॉटलैंड की सांस्कृतिक बारीकियों को प्रदर्शित करने के साथ हुई, लेकिन जल्द ही यह भारत की सांस्कृतिक विविधता और प्राचीन परंपरा के जीवंत प्रदर्शन में परिवर्तित हो गया.
इस शो में भारत-स्कॉटिश संस्कृतियों की ‘जुगलबंदी’ भी देखने को मिली, जिसमें संगीतकारों और नर्तकों ने अपने कौशल का एक आकर्षक प्रदर्शन किया. समारोह में भारत के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने का भी स्मरणोत्सव मनाया गया, जिसमें अभिनेत्री मानुषी छिल्लर के नेतृत्व में एक भव्य नृत्य प्रस्तुति दी गई.
वहीं, शंकर महादेवन अपने बेटों सिद्धार्थ और शिवम महादेवन के साथ एक संगीत कार्यक्रम के लिए मंच पर लौटे, जिसमें भारत के कुछ सबसे ज्यादा पहचाने जाने वाले गाने शामिल थे, जिनमें “सुनो गौर से दुनिया वालों, भाग मिल्खा, ऐ वतन वतन और लहरा दो” शामिल थे.

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के टॉप 10 मेडल विजेता देश
कुल 170 मेडल के साथ ऑस्ट्रेलिया पहले स्थान पर रहा. इसके खाते में 70 गोल्ड, 45 सिल्वर और 55 कांस्य पदक आए. दूसरे स्थान पर इंग्लैंड रहा. इसके खाते में 29 गोल्ड, 45 सिल्वर और 36 ब्रॉन्ज समेत कुल 110 मेडल आए. तीसरे स्थान पर कनाडा रहा. इसके खिलाड़ियों ने अपने देश के लिए 19 गोल्ड, 20 सिल्वर और 23 ब्रॉन्ज मेडल जीते. कुल 39 मेडल के साथ भारत ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की अंक तालिका में चौथे स्थान पर रहा है. इन 39 मेडलों में 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं.
पांचवें स्थान पर मेजबान स्कॉटलैंड रहा. इसके खाते में 13 गोल्ड, 9 सिल्वर और 17 ब्रॉन्ज समेत कुल 39 मेडल आए. वहीं, छठे स्थान पर न्यूजीलैंड (36 मेडल), सातवें स्थान पर नाइजीरिया (24 मेडल), आठवें स्थान पर जमैका (19 मेडल), नौवें स्थान पर वेल्स (31 मेडल) और दसवें स्थान पर मलेशिया (16 मेडल) रहा.
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