Rishikeshs Bajrang Setu: अगर आप घूमने-फिरने के शौकीन हैं, तो उत्तराखंड के ऋषिकेश से आपके लिए शानदार खबर है. दरअसल, लंबे इंतजार के बाद बजरंग सेतु ग्लास स्काईवॉक अब टूरिस्टों के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है. गंगा नदी के ऊपर बना ये अनोखा ग्लास स्काईवॉक लोगों को ऐसा अनुभव देगा, जिसे वो शायद ही कभी भूल पाएंगे. हालांकि, इसका मजा लेने के लिए अब टूरिस्टों को एंट्री फीस भी देनी होगी.
देनी पड़ेगी फीस
उत्तराखंड सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) को मंजूरी दे दी है. इसके बाद अब जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी. फिर टिकट व्यवस्था लागू कर दी जाएगी. यानी आने वाले दिनों में ग्लास स्काईवॉक पर जाने वाले हर टूरिस्ट को निर्धारित शुल्क देकर ही इसका हिस्सा बनने का मौका मिलेगा.
एंट्री फीस और टाइमिंग?
नई व्यवस्था लागू होने के बाद वयस्कों को 100 रुपये और बच्चों को 50 रुपये की टिकट लेनी होगी. इस टिकट के जरिए टूरिस्ट दो घंटे तक ग्लास स्काईवॉक पर घूम सकेंगे और गंगा नदी का शानदार नजारा करीब से देख पाएंगे. लोक निर्माण विभाग (PWD) के मुताबिक, ग्लास स्काईवॉक पर टूरिस्टों की आवाजाही सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक होगी. हालांकि, अच्छी बात ये है कि पुल का बीच वाला यानी कंक्रीट वाला हिस्सा 24 घंटे खुला रहेगा. उस हिस्से पर चलने के लिए किसी तरह की फीस नहीं देनी पड़ेगी. यानी स्थानीय लोग और बाकी यात्री बिना किसी फीस के इस हिस्से का इस्तेमाल कर सकेंगे.
क्यों खास है बजरंग सेतु?
बजरंग सेतु को भारत का पहला ग्लास फ्लोर वाला केबल सस्पेंशन ब्रिज बताया जा रहा है. ये पुल ऋषिकेश में पुराने लक्ष्मण झूले के पास गंगा नदी पर बनाया गया है. ये टिहरी गढ़वाल के तपोवन और पौड़ी गढ़वाल के जोंक क्षेत्र को जोड़ता है. इस पुल की सबसे बड़ी खासियत इसका कांच का फर्श है. जब टूरिस्ट इस पर चलेंगे तो उन्हें नीचे बहती गंगा नदी साफ दिखाई देगी. खासकर एडवेंचर पसंद करने वाले और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए ये पुल बिल्कुल परफेक्ट होगा.
सुरक्षा का पूरा ध्यान
ग्लास स्काईवॉक को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए इसमें 12-12 मिमी मोटे टेम्पर्ड ग्लास की कई परतों का इस्तेमाल किया गया है. इससे ये मजबूत और टिकाऊ बनता है. इसके अलावा टूरिस्टों की सुरक्षा और सुविधा के लिए करीब 48 कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी. ये कर्मचारी तीन शिफ्टों में काम करेंगे और पूरे परिसर की निगरानी करेंगे.
करोड़ों की लागत
करीब 60 से 70 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए इस पुल की लंबाई 132 मीटर और चौड़ाई 8 मीटर है. पुल के बीच में 5 मीटर चौड़ा स्टील डेक बनाया गया है, जिस पर दोपहिया वाहन भी चल सकेंगे. वहीं, दोनों तरफ बने ग्लास वॉकवे टूरिस्टों के लिए आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र होंगे.
टूरिज्म को बढ़ावा
ऋषिकेश पहले से ही योग, आध्यात्म, रिवर राफ्टिंग और एडवेंचर एक्टिविटी के लिए दुनियाभर में मशहूर है. अब बजरंग सेतु ग्लास स्काईवॉक खुलने के बाद यहां आने वाले टूरिस्टों की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है. माना जा रहा है कि ये नया पुल उत्तराखंड के पर्यटन उद्योग को नई पहचान देगा. साथ ही स्थानीय कारोबार को भी फायदा पहुंचाएगा. ऐसे में अगर आप भी गंगा नदी के ऊपर कांच के पुल पर चलने चाहते हैं, तो अपनी अगली ऋषिकेश ट्रिप की प्लानिंग अभी से शुरू कर सकते हैं.
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