Mirzapur The Movie Review: अगर आपने कभी ‘मिर्जापुर’ देखते हुए सोचा है कि कालीन भैया, मुन्ना और गुड्डू पंडित की दुनिया बड़े पर्दे पर कैसी लगेगी, तो अब इसका जवाब सिनेमाघरों में मिल चुका है. ‘मिर्जापुर: द मूवी’ ने 4 सितंबर, 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक दी. रिलीज होते ही इस फिल्म को लेकर बातें शुरू हो गईं. OTT की दुनिया पर सालों तक राज करने वाली ये फ्रेंचाइजी अब थिएटर में अपना भौकाल दिखाने निकली है. फिल्म में पंकज त्रिपाठी एक बार फिर कालीन भैया के अंदाज में नजर आ रहे हैं. अली फजल गुड्डू पंडित के रोल में लौटे हैं. वहीं, दिव्येंदु एक बार फिर मुन्ना त्रिपाठी के रोल में ऑडियन्स के सामने हैं. इनके साथ रवि किशन, जितेंद्र कुमार, श्वेता त्रिपाठी शर्मा, श्रिया पिलगांवकर और कई पुराने-नए चेहरे कहानी को आगे बढ़ाते हैं. फिल्म का डायरेक्शन गुरमीत सिंह ने किया है और इसकी कहानी पुनीत कृष्णा ने लिखी है.

कहानी का टाइमलाइन
‘मिर्जापुर: द मूवी’ की सबसे दिलचस्प बात ये है कि फिल्म सीधे वेब सीरीज के आखिरी सीजन के बाद की कहानी नहीं है. इसकी टाइमलाइन को सीजन 1 के एपिसोड 6 और एपिसोड 7 के बीच रखा गया है. मतलब कहानी उस दौर में जाती है जब मिर्जापुर की गद्दी के लिए खेल अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था. यही वजह है कि फिल्म में ऐसे कई किरदार भी वापस दिखाई देते हैं, जिनकी किस्मत आगे चलकर पूरी तरह से बदल जाती है. कालीन भैया अपनी सत्ता और साम्राज्य को बचाए रखने की कोशिश में हैं. दूसरी तरफ गुड्डू और मुन्ना के बीच सत्ता की खींचतान कहानी को लगातार आगे बढ़ाती है. फिल्म में पूर्वांचल की राजनीति, अपराध, बदला और गद्दी की भूख फिर से नज़र आ रही है. यानी आसान भाषा में कहें तो मामला वही पुराना है, गद्दी एक, दावेदार कई और भरोसा किसी पर नहीं.
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कालीन भैया की वापसी
‘मिर्जापुर’ की दुनिया में अगर किसी एक नाम का अपना अलग वजन है, तो वो है कालीन भैया. पंकज त्रिपाठी ने इस किरदार को जिस अंदाज में निभाया है, वो इस फ्रेंचाइजी की सबसे बड़ी ताकतों में से एक रहा है. फिल्म में भी उनकी मौजूदगी कहानी को वजन देती है. उनके चेहरे की शांति और डायलॉग बोलने का अंदाज कई बार ऐसा माहौल बना देता है कि ऑडियन्स को लगता है कि अब कुछ बड़ा होने वाला है. कालीन भैया के सामने इस बार सिर्फ पुराने दुश्मनों का मामला नहीं है. सत्ता को लेकर बदलते और नए किरदार कहानी में नई टेंशन पैदा करते हैं.
मुन्ना भैया की एंट्री
दिव्येंदु का मुन्ना त्रिपाठी वाला किरदार ‘मिर्जापुर’ की पहचान बन चुका है. मुन्ना का गुस्सा, उसका अजीब सा कॉन्फिडेंस और उसका बेबाक अंदाज फैंस को आज भी याद है. फिल्म में मुन्ना की वापसी उन दर्शकों के लिए किसी पुराने दोस्त से मिलने जैसी है, जो सीरीज के शुरुआती सीजन से इस कैरेक्टर से जुड़े हुए हैं. रिलीज से पहले ही ये सवाल काफी बड़ा था कि फिल्म में मुन्ना को किस तरह पेश किया जाएगा. शुरुआती दर्शक रिएक्शन में भी दिव्येंदु और पंकज त्रिपाठी के काम की तारीफ हो रही है.

बरकरार है भौकाल
अली फजल का गुड्डू पंडित भी कहानी का अहम हिस्सा है. सीरीज में गुड्डू का सफर एक साधारण लड़के से सत्ता की दुनिया के खिलाड़ी तक पहुंचने का रहा है. फिल्म में भी उसकी सत्ता की भूख कहानी को आगे बढ़ाती है. गुड्डू अब पहले वाला गुड्डू नहीं है. उसे पता है कि मिर्जापुर की गद्दी सिर्फ ताकत से नहीं, शकुनी मामा वाली चालों से भी हासिल की जाती है. यही वजह है कि फिल्म में गुड्डू और मुन्ना के बीच की टक्कर सिर्फ दो किरदारों की लड़ाई नहीं रह जाती, बल्कि ये पूरी सत्ता की लड़ाई बन जाता है. इसके अलावा फिल्म में रवि किशन की एंट्री कहानी को नया रंग देती है. वो बब्बन बबुआ के कैरेक्टर में नजर आ रहे हैं. फिल्म में उनका होना कहानी में एक नया खतरा लेकर आया है. फैंस भी रवि किशन की एक्टिंग की जमकर तारीफ कर रहे हैं. रवि किशन का अंदाज ऐसा है कि वो आते ही कहानी का माहौल बदल देते हैं. उनके किरदार में देसीपन भी है और खतरा भी.
‘मिर्जापुर’ की दुनिया
क्या फिल्म सिर्फ पुराने फैंस के लिए है? ये एक बड़ा सवाल था. आखिर ‘मिर्जापुर’ एक बहुत ही पॉपुलर OTT सीरीज है और उसके फैंस पहले से ही किरदारों और उनकी पूरी कहानी को जानते हैं. फिल्म को इस तरह बनाया गया है कि जिसने सीरीज नहीं भी देखी है, वो भी इसे समझ सके. पंकज त्रिपाठी ने रिलीज से पहले कहा था कि फिल्म को सिर्फ पुराने फैंस के लिए नहीं बनाया गया है. इसे हर किसी को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. लेकिन सच ये भी है कि अगर आपने सीरीज देखी है, तो फिल्म का मजा कई गुना बढ़ जाता है. क्योंकि पुराने किरदारों को स्क्रीन पर देखते ही उनके पुराने किस्से और डायलॉग याद आने लगते हैं.
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फिल्म की सबसे बड़ी ताकत
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी फ्रैंचाइजी वेल्यू है. ‘मिर्जापुर’ सिर्फ एक सीरीज नहीं रही. इसके किरदार पॉप कल्चर का हिस्सा बन चुके हैं. कालीन भैया, मुन्ना और गुड्डू के नाम सुनते ही ऑडियन्स को एक अलग ही दुनिया याद आने लगती है. ऐसे में फिल्म भी इस फैमिलियरिटी का पूरा फायदा उठाती है. दूसरी बड़ी ताकत है कलाकारों की कास्टिंग. पंकज त्रिपाठी, अली फजल और दिव्येंदु जैसे एक्टर्स की मौजूदगी पहले से ही फिल्म के लिए दर्शकों में क्रेज पैदा करती है. इसके साथ रवि किशन और जितेंद्र कुमार जैसे नए एडिशन कहानी को अलग एनर्जी देते हैं.
लेकिन हर चीज परफेक्ट नहीं है
अब आते हैं उस हिस्से पर जिसे फैंस शायद सुनना नहीं चाहेंगे. दरअसल, फिल्म को ऑडियन्स से सिर्फ अच्छा रिएक्शन ही नहीं मिला. कुछ दर्शकों ने इसे बहुत एंटरटेनिंग और मैसी बताया. वहीं, कुछ ने कहानी को काफी स्लो माना. यानी अगर आप ऐसी फिल्म चाहते हैं जो पहले मिनट से आखिरी पल तक सिर्फ गोली, गाली और एक्शन से भरी रहे, तो आपको ‘मिर्जापुरः द मूवी’ की शुरुआत थोड़ी स्लो लग सकती है. लेकिन अगर आप किरदारों की बातचीत, पुराने रिश्तों और सत्ता के खेल का आनंद लेते हैं, तो फिल्म धीरे-धीरे अपना असर छोड़ना शुरू कर देती है.
एक्शन के साथ मिर्जापुर वाला स्वाद
‘मिर्जापुर’ की पहचान सिर्फ इसके किरदार नहीं हैं. इसकी दुनिया में वॉयलेंस, खून खराबा, हार्क ह्यूमर और क्राइम हमेशा से रहा है. फिल्म भी इस फ्लेवर को बनाए रखने की कोशिश करती है. यही वजह है कि CBFC ने इसे ‘A’ सर्टिफिकेट दिया है और फिल्म में फ्रैंचाइजी के रॉ और अनफिल्टर्ड फुटेज भी बरकरार रखे गए हैं. इसलिए फैमिली ऑडियन्स के लिए ये मूवी बिल्कुल भी नहीं है. अगर आप ‘मिर्जापुर’ के पुराने अंदाज के फैन हैं, तभी थिएटर में जाकर इस दुनिया का मजा लेने का मन बनाइए.

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बॉक्स ऑफिस पर भी ‘भौकाल’
जहां एक तरफ फिल्म को लेकर रिव्यू और ऑडियन्स रिएक्शन की चर्चा है. वहीं बॉक्स ऑफिस पर ‘मिर्जापुर: द मूवी’ ने शानदार शुरुआत की है. फिल्म ने पहले दिन करीब 25.75 करोड़ रुपये की कमाई की. दूसरे दिन इसकी कमाई बढ़कर करीब 32 करोड़ रुपये हो गई. तीसरे दिन फिल्म ने लगभग 36 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया. इस तरह तीन दिनों में फिल्म करीब 93.75 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर गई. मंगलवार तक इस फिल्म ने भारत में 129.55 करोड़ रुपये का बिजनेस कर लिया था. वहीं, फिल्म के वर्ल्डवाइड परफॉर्मेंस की बात करें तो, ओवरसीज में भी फिल्म ने अच्छी कमाई की. पहले तीन दिनों में इसका वर्ल्डवाइड कलेक्शन करीब 132.35 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था. यानी OTT से निकली ये कहानी अब थिएटर की कमाई की भाषा भी अच्छी तरह समझ रही है.
क्या देखनी चाहिए फिल्म?
अगर आपने ‘मिर्जापुर’ सीरीज देखी है और कालीन भैया, गुड्डू और मुन्ना के फैन हैं, तो फिल्म आपके लिए नॉस्टैल्जिया, एक्शन और पुराने किरदारों का बड़ा पैकेज तैयार है. अगर आपने सीरीज नहीं देखी है, तो भी फिल्म को समझाने की कोशिश की गई है. हालांकि, कई कैरेक्टर्स और रिश्तों का पूरा मजा लेने के लिए पहले की दुनिया से परिचित होना आपके एक्सपीरियंस को बढ़िया कर सकता है. फिल्म में कुछ जगह इसकी स्लो स्पीड की प्रोब्लम फील हो सकती है, लेकिन इसके बड़े मूमेंट्स, कलाकारों की परफॉर्मेंस और फ्रैंचाइजी की पहचान इसे देखने लायक बनाती है. सबसे खास बात यह है कि ‘मिर्जापुर: द मूवी’ सिर्फ एक फिल्म की तरह नहीं आती. ये उस दुनिया जैसी लगती है, जिससे ऑडियन्स पहले ही इमोशनली जुड़ चुकी है.

किसकी है मिर्जापुर की गद्दी?
अंत में एक ही सवाल रह जाता है कि, कालीन भैया के पुराने राज का? गुड्डू पंडित की नई महत्वाकांक्षा का? या फिर मुन्ना भैया के भौकाल का? क्या होता है. इन सवालों के जवाब पाने के लिए थिएटर में बैठना पड़ेगा. क्योंकि मिर्जापुर की दुनिया में एक बात तो पक्की है कि, यहां कुर्सी कभी खाली नहीं रहती, बस उसे हथियाने वाला बदलता रहता है. वैसे, हमारी तरफ से ‘मिर्जापुरः द मूवी’ को 5 में से 2.5 स्टार. यानी अगर आप 18 साल से ऊपर के हैं, तो इस फिल्म को एक बार देखा जा सकता है. खासतौर से अगर आप इस सीरीज के फैन रहे हैं तो.
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