‘अजब नशा है तिरे क़ुर्ब में कि जी चाहे…’ पढ़ें ऐतबार साजिद के बेहतरीन शेर
March 7, 2026
17 Jan 2026
'सूरज सितारे चांद मिरे साथ में रहे...' पढ़ें राहत इंदौरी के वह शेर जिन्होंने युवाओं का दिल लूटा.
दुनिया-दारी
घर के बाहर ढूंढता रहता हूं दुनिया,
घर के अंदर दुनिया-दारी रहती है.
चांद मिरे
सूरज सितारे चांद मिरे साथ में रहे,
जब तक तुम्हारे हाथ मिरे हाथ में रहे.
मरज़ की दवा
बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिए,
मैं पीना चाहता हूँ पिला देनी चाहिए.
तेरी महफ़िल
तेरी महफ़िल से जो निकला तो ये मंज़र देखा,
मुझे लोगों ने बुलाया मुझे छू कर देखा.
किनारे दोस्तो
एक ही नद्दी के हैं ये दो किनारे दोस्तो,
दोस्ताना ज़िंदगी से मौत से यारी रखो.
मैं पर्बतों से
मैं पर्बतों से लड़ता रहा और चंद लोग,
गीली ज़मीन खोद के फ़रहाद हो गए.
हाथ का पत्थर
अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है,
उम्र गुज़री है तिरे शहर में आते जाते.
बोतलें खोल
बोतलें खोल कर तो पी बरसों,
आज दिल खोल कर भी पी जाए.
काग़ज़ का बदन
ये हवाएँ उड़ न जाएँ ले के काग़ज़ का बदन,
दोस्तो मुझ पर कोई पत्थर ज़रा भारी रखो.
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