‘ये सोच के मां बाप की ख़िदमत में लगा हूं…’ पढ़ें मुनव्वर राना के शानदार शेर
January 20, 2026
27 Nov 2025
'जभी तो उम्र से अपनी ज़ियादा लगता हूं...' पढ़ें दिल को झकझोर देने वाले मुज़फ़्फ़र वारसी के शेर.
एड़ियां रगड़ने दे
1. वतन की रेत ज़रा एड़ियां रगड़ने दे,
मुझे यक़ीं है कि पानी यहीं से निकलेगा.
समझौता करूं
ज़िंदगी तुझ से हर इक सांस पे समझौता करूं,
शौक जीने का है मुझ को मगर इतना भी नहीं.
हर शख़्स
हर शख़्स पर किया न करो इतना ए'तिमाद,
हर साया-दार शय को शजर मत कहा करो.
तजरबा मेरा
जभी तो उम्र से अपनी ज़ियादा लगता हूं,
बड़ा है मुझ से कई साल तजरबा मेरा.
ख़ून निचोड़ा
पहले रग रग से मिरी ख़ून निचोड़ा उस ने,
अब ये कहता है कि रंगत ही मिरी पीली है.
घर में हूं
मैं अपने घर में हूं घर से गए हुओं की तरह,
मिरे ही सामने होता है तज़्किरा मेरा.
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