Global Unicorn Index 2026: आज के समय में देश की अर्थव्यवस्था की गति 7.5 फीसदी से 7.8 फीसदी के बीच बनी हुई है. दुनिया की तमाम बड़ी अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों में भारत का अपना एक अच्छा खासा स्थान है. इतना ही नहीं रिपोर्ट के अनुसार, विश्व में सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अभी भारत की ही अर्थव्यवस्था रही है. तमाम चुनौतियों के बीच देश की जीडीपी अपनी तीव्र गति को बनाई हुई है.
इस बीच एक और खास खबर सामने आई है. जी हां, बीते दिनों हुरुन ग्लोबल यूनिकॉर्न इंडेक्स 2026 के आंकड़े जारी किए गए. इसमें भारत ने शानदार प्रदर्शन किया है. दुनिया में स्टॉर्टअप इंडिया का डंका बज चुका है. यह देश के लिए और भी खास इसलिए है क्योंकि इस साल भारत ने स्टार्टअप इंडिया के 10 साल पूरे किए हैं. जी हां, साल 2016 में स्टार्टअप इंडिया की शुरुआत की गई थी. यह भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देना और भारत में नवाचार और उद्यमिता के लिए एक मजबूत और समावेशी इकोसिस्टम का निर्माण करना है.
हम भारत के इस खास मिशन के बारे में जानेंगे, लेकिन उससे पहले हम बात करेंगे हुरुन ग्लोबल यूनिकॉर्न इंडेक्स 2026 की. इस इंडेक्स में भारत दुनिया में यूनिकॉर्न कंपनियों क मामले में चौथे स्थान पर पहुंच चुका है. इस रैंक में अमेरिका 806 यूनिकॉर्न के साथ पहले स्थान पर है. आइए हुरुन ग्लोबल यूनिकॉर्न इंडेक्स 2026 में भारत के बारे में जानते हैं इसके साथ ही जानेंगे दुनिया के 5 बड़े यूनिकॉर्न देश.
यूनिकॉर्न कंपनी क्या होती है?
सबसे पहले हम जानेंगे कि आखिर यह यूनिकॉर्न कंपनियां क्या होती हैं. यूनिकॉर्न कंपनी की बात करें तो कोई भी प्राइवेट स्टार्टअप जिसकी वैल्यूएशन एक अरब डॉलर (करीब 8300 करोड़ रुपये) की और उससे अधिक हो, तो वह यूनिकॉर्न कंपनी कहलाती है. भारत में ऐसे स्टार्टअप्स की कुल संख्या अभी 61 है.

61 यूनिकॉर्न के साथ चौथे स्थान पर भारत
बीते दिनों हुरुन ग्लोबल यूनिकॉर्न इंडेक्स 2026 के आंकड़े सामने आए. इनमें विश्व के टॉप स्टार्टअप इकोसिस्टम में भारत का चौथा स्थान रहा. इस स्थान पर भारत कुल 61 यूनिकॉर्न कंपनियों के साथ पहुंच चुका है. यह स्थान बताता है कि दुनिया में भारत स्टार्टअप के क्षेत्र में एक बहुत ही बड़ा हब बन चुका है और आगे इसमें और भी मजबूती देखी जा सकती है. जानकारी के अनुसार, भारत के कुल 61 यूनिकॉर्न में से अकेले 25 यूनिकॉर्न कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में है. यही वजह है कि बेंगलुरु को देश की ‘यूनिकॉर्न राजधानी’ भी कहा जा रहा है.
बेंगलुरु के बाद देश में दूसरा सबसे अधिक यूनिकॉर्न मुंबई में है. यहां इनकी कुल संख्या 13 है. देश में तीसरे स्थान पर दिल्ली-एनसीआर है. यहां कुल यूनिकॉर्न कंपनियों की संख्या 8 है. वहीं, हैदराबाद में 5 और चेन्नई में 4 यूनिकॉर्न हैं. रिपोर्ट के अनुसार, देश की सबसे अधिक वैल्यूएशन वाली यूनिकॉर्न कंपनियां ब्रोकरेज, क्विक कॉमर्स और फिनटेक सेक्टर से जुड़ी हैं. जानकारी के मुताबिक, इस साल में अभी तक कुल 6 भारतीय यूनिकॉर्न शेयर बाजार में लिस्ट हुए.
दुनिया में बढ़ता भारत का दबदबा
हुरुन की इस रिपोर्ट में भारत के उद्यमियों के बढ़ते ग्लोबल दबदबे को भी बताया गया है. इसके अनुसार, विश्व भर में भारतीय उद्यमियों ने करीब 217 यूनिकॉर्न में अपनी अहम भूमिका निभाई है. इसमें वे या तो फाउंडर रहे हैं या फिर को-फाउंडर. इन यूनिकॉर्न में भारत से बाहर 156 यूनिकॉर्न शामिल हैं. इनमें अकेले अमेरिका में कुल 142 यूनिकॉर्न हैं. इन सभी कंपनियों की कुल वैल्यू करीब 600 अरब अमेरिकी डॉलर है. बताया गया है कि इन सभी यूनिकॉर्न की वैल्यू में एआई यूनिकॉर्न का करीब 36 प्रतिशत हिस्सा है. वैसे तो एआई और फिनटेक यूनिकॉर्न की संख्या बराबर (216) है, लेकिन इसमें एआई यूनिकॉर्न की वैल्यू बहुत अधिक है.

दुनिया के टॉप 5 यूनिकॉर्न देश
हुरुन ग्लोबल यूनिकॉर्न इंडेक्स 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के टॉप 5 यूनिकॉर्न वाले देशों में सबसे ऊपर अमेरिका है. अमेरिका में कुल यूनिकॉर्न कंपनियों की संख्या 806 है. दूसरे स्थान पर चीन है. यहां कुल यूनिकॉर्न कंपनियों की संख्या 278 है. तीसरे स्थान पर ब्रिटेन (यूनाइटेड किंगडम) है. यहां कुल यूनिकॉर्न की संख्या 104 है. वहीं, चौथे स्थान पर भारत है, जहां 61 यूनिकॉर्न कंपनियां हैं. पांचवें स्थान पर जर्मनी है. यहां पर 32 यूनिकॉर्न कंपनियां हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल स्तर पर इस साल रिकॉर्ड 308 स्टार्टअप ने यूनिकॉर्न का दर्जा प्राप्त किया है. इनमें से 75 यूनिकॉर्न शेयर बाजार में लिस्ट हुए हैं. 64 विलय या अधिग्रहण के माध्यम से यूनिकॉर्न इकोसिस्टम से बाहर हुए हैं. वहीं, विश्व की 88 कंपनियां ऐसी रही हैं, जिन्होंने अपना यूनिकॉर्न का दर्जा खो दिया है. मतलब कि इनकी वैल्यूएशन एक अरब डॉलर के नीचे आ गई है.
यूनिकॉर्न के अलावा स्टार्टअप्स के ये भी प्रकार
यूनिकॉर्न के साथ स्टार्टअप के और भी कई प्रकार हैं, जिनमें मिनीकॉर्न, डेकाकॉर्न और हेक्टाकॉर्न शामिल हैं. आपने ऊपर तो यूनिकॉर्न के बारे में जान लिया. अब हम बात बाकी के स्टार्टअप्स प्रकार की करते हैं. इनको इनकी वैल्यूएशन के आधार पर निर्धारित किया जाता है कि कौन सा स्टार्टअप कौन से कैटेगरी में है.
जानकारी के मुताबिक, मिनीकॉर्न का मतलब होता है, वे स्टार्टअप कंपनियां जिनकी वैल्यूएशन 1 मिलियन डॉलर से अधिक है. डेकाकॉर्न हम उन कंपनियों को कहते हैं, जिनकी वैल्यूएशन 10 बिलियन डॉलर या उससे अधिक होती है. वहीं, हेक्टाकॉर्न की बात करें तो यह उन स्टार्टअप कंपनियों को कहा जाता है, जिनकी वैल्यूएशन 100 बिलियन डॉलर या उससे अधिक होती है.

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क्या है स्टार्टअप इंडिया मिशन?
भारत सरकार के मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, 16 जनवरी 2016 को देश में स्टार्टअप इंडिया पहल शुरू की गई थी. इसके तहत उद्यमियों को सहयोग देने, एक मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम बनाने और भारत को नौकरी चाहने वालों के बजाय नौकरी सृजन करने वालों का देश बनाने के उद्देश्य से कई कार्यक्रम शुरू किए गए. इन कार्यक्रमों का प्रबंधन एक समर्पित स्टार्टअप इंडिया टीम द्वारा किया जाता है, जो उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) को रिपोर्ट करती है.
इस साल 16 जनवरी को देश में ‘राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस’ खास तरीके से मनाया गया, क्योंकि यह साल स्टार्टअप इंडिया पहल का एक युगांतकारी दशक को पूरा कर चुका है. भारत सरकार के अनुसार, 2016 में उद्यमशीलता को प्रोत्साहित करने के लिए यह नीतिगत कदम यानी कि स्टार्टअप इंडिया उठाया गया था, आज दुनिया के सबसे बड़े और सबसे विविध स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक बन चुका है.
स्टार्टअप इंडिया के नेतृत्व में इस मिशन ने भारत के उद्यमशीलता और नवाचार तंत्र पर एक परिवर्तनकारी प्रभाव डाला है. यह आर्थिक आधुनिकीकरण को समावेशी क्षेत्रीय उत्थान के साथ मिलाते हुए, ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने की भारत की यात्रा के साथ आगे बढ़ रहा है.
भारत में 2 लाख से अधिक स्टार्टअप्स
भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय के अधीन उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) आता है. यह देश में स्टॉर्टअप्स की सारी चीजें और मान्यता को भी देखता है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में दिसंबर 2025 तक 2 लाख से अधिक स्टार्टअप हैं, जो DPIIT द्वारा मान्यता प्राप्त हैं. इनके साथ ही भारत दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम के रूप में मजबूती से खड़ा है.
जानकारी के अनुसार, करीब 50 प्रतिशत DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप टियर-II और टियर-III शहरों से आते हैं, जो उद्यमशीलता के लोकतांत्रिकरण का संकेत हैं. स्टार्टअप इंडिया के एक दशक ने विचार, वित्तीय सहायता, मार्गदर्शन और विस्तार तक एक सम्पूर्ण सहायता प्रणाली का निर्माण किया है.
अटल इनोवेशन मिशन (एआईएम) 2.0 सरकार, उद्योग, शिक्षा जगत और समुदायों के सहयोग से इकोसिस्टम की कमियों को दूर करने और सिद्ध मॉडलों को बढ़ाने के लिए नई पहल शुरू करने पर केंद्रित है. एसवीईपी, एस्पायर और पीएमईजीपी जैसे ग्रामीण और जमीनी स्तर के कार्यक्रम सूक्ष्म उद्यमों, महिला नेतृत्व वाले उपक्रमों और स्थानीय रोजगारों को सक्षम बना रहे हैं.
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भारत के स्टार्टअप में महिलाओं की बड़ी भूमिका
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में स्टार्टअप कृषि-तकनीक, टेलीमेडिसिन, माइक्रोफाइनेंस (सूक्ष्म-ऋण), पर्यटन और शिक्षा टेक्नोलॉजी में समाधान लागू करके भारत की ग्रामीण-शहरी खाई को पाट रहे हैं. ये सीधे तौर पर विकास की दिशा में बढ़ते हुए कमियों को दूर कर रहे हैं और ग्रामीण आजीविका को सहायता दे रहे हैं.
इस परिदृश्य के भीतर, महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप समावेशी और क्षेत्रीय रूप से संतुलित विकास के एक प्रमुख चालक के रूप में उभर रहे हैं. दिसंबर 2025 तक, मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में से 45 प्रतिशत से अधिक में कम से कम एक महिला निदेशक हैं या उसमें भागीदार हैं. यह न केवल एक आर्थिक इंजन के रूप में, बल्कि सामाजिक समानता और संतुलित क्षेत्रीय विकास के वाहक के रूप में इनोवेशन के उद्भव को दर्शाता है. रिपोर्ट के अनुसार, देश में मान्यता प्राप्त 2 लाख स्टार्टअप्स ने 21 लाख से अधिक युवाओं को नौकरी दिए हैं. ये आंकड़े वाणिज्य और इंडस्ट्री मंत्रालय के हैं.

भविष्य में भारत के स्टार्टअप्स
भारत सरकार के अनुसार, इस साल जनवरी में देश में स्टार्टअप इंडिया के 10 साल पूरे हो चुके हैं. अब इस क्षेत्र में भारत भविष्य को लेकर काम कर रहा है. जैसे-जैसे भारत 2030 तक 7.3 ट्रिलियन अमरीकी डॉलर की अर्थव्यवस्था और विकसित भारत 2047 के व्यापक दृष्टिकोण की ओर बढ़ रहा है, स्टार्टअप देश के विकास पथ के केंद्र में बने रहने के लिए तैयार हैं. ये केवल विकास के उत्प्रेरक के रूप में ही नहीं बल्कि भारत के भविष्य के लिए तैयार, नवाचार-आधारित आर्थिक मॉडल के स्थायी प्रतीकों के रूप में भी कार्य करेंगे.
आने वाले समय में देश में तेजी के साथ यूनिकॉर्न कंपनियों की संख्या में बढ़ोतरी की संभावना है. इसमें स्टार्टअप इंडिया का बहुत ही बड़ा योगदान होने वाला है. भविष्य यानी आगे भी हुरुन ग्लोबल यूनिकॉर्न इंडेक्स जारी होते रहेंगे, इसमें भारत की स्थिति और भी सुधरेगी. भारत की तैयारी है कि देश दुनिया में यह स्टार्टअप का एक बड़ा हब बने.
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