India UK FTA: ग्लोबल भू-राजनीतिक तनाव और दुनिया में बढ़ती टेंशन के बीच भारत अपने व्यापार को और भी अधिक मजबूत करने में लगा हुआ है. आपने देखा होगा कि हाल ही में पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष ने भारत सहित दुनिया के कई देशों की एनर्जी सप्लाई को काफी प्रभावित किया था. इससे देश में तेल और गैस के दाम बढ़े थे.
कारण था कि ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बाधित कर दिया है. यह एक ऐसा अहम समुद्री रास्ता है, जो भारत सहित दुनिया के कई देशों के लिए एनर्जी सप्लाई को लेकर खास है. इसके बाधित होने से भारत में खाड़ी देशों से तेल और गैस के आयात बुरे तरीके से प्रभावित हुए थे. हालांकि, दोनों देशों के बीच अब अंतरिम समझौते के ऐलान के बाद होर्मुज को खोल दिया गया है. इसका बड़ा फायदा यह हुआ है कि जिस कच्चे तेल का भाव 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया था, अब वह काफी नीचे गिरकर करीब 72 डॉलर प्रति बैरल हो गया है.
वहीं, बीते साल अमेरिका ने भारत पर 50 फीसदी का मनमाने ढंग से टैरिफ लगा दिया था, जिसके बाद भारतीय बाजार से अमेरिका में भेजे जाने वाले सामानों पर भारी टैक्स की वसूली की जाने लगी. हालांकि, दोनों देशों के बीच बातचीत से इस मामले को हल कर लिया गया और अब भारत और अमेरिकी द्विपक्षीय ट्रेड पर की बातचीत को अंतिम रूप देने में लगे हैं.
भारत और ब्रिटेन व्यापार समझौता
भारत के सामानों का दुनिया के तमाम देशों में पहुंच आसान हो और अन्य देशों के मनमाने रवैये से इसपर कोई बुरा प्रभाव ना पड़े, इसको देखते हुए भारत अब कई देशों से नए स्तर पर व्यापार डील करता हुआ दिख रहा है. ताजा मामला ब्रिटेन यानी कि यूनाइटेड किंगडम का है.
जी हां, भारत और ब्रिटेन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लागू करने की बात कही जा रही है. इसकी जानकारी फिलहाल ब्रिटेन के दौरे पर गए केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने दी है. बता दें कि भारत और ब्रिटेन ने व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) को अगले महीने यानी जुलाई में लागू करने जा रहे हैं.

ब्रिटेन दौरे पर गए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने यूके-इंडिया वीक 2026 में कहा, “हर व्यापारिक संबंध और हर साझेदारी अपने आप में स्वतंत्र होती है. ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता भारत द्वारा अब तक किए गए सबसे व्यापक समझौतों में से एक होने जा रहा है और यह जुलाई में लागू होगा.” सरकारी जानकारी के अनुसार, इसे 15 जुलाई से लागू होने की संभावना है. इसके लागू होते ही भारत को इस ट्रेड से काफी फायदा होने वाला है. भारत से ब्रिटेन भेजे जाने वाले करीब 99 फीसदी सामानों पर टैक्स (ड्यूटी फीस) शून्य हो जाएगा. मतलब कि एक भी टैक्स नहीं लगेगा.
आइए अब भारत और ब्रिटेन के इस व्यापार समझौते को विस्तार से जानते हैं. इसके साथ ही जानेंगे कि इन दोनों देशों के बीच कितने करोड़ रुपये का द्विपक्षीय व्यापार होता है. बीते कुछ वर्षों के इसके आंकड़े भी जानेंगे. मालूम हो कि इस डील के तहत ही भारत और ब्रिटेन अपने व्यापार को 2030 तक दोगुना करने का टारगेट रखे हैं.
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भारत और ब्रिटेन का CETA पर हस्ताक्षर
करीब एक साल पहले जुलाई 2025 में भारत और ब्रिटेन ने व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) पर हस्ताक्षर किए थे. देश के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, जुलाई 2025(24 तारीख) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) पर हस्ताक्षर किया गया. इससे भारत और यूनाइटेड किंगडम ने एक मजबूत आर्थिक साझेदारी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया.
इस समझौते पर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स ने दोनों प्रधानमंत्रियों की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए. इस समझौते को लेकर कहा गया कि यह मुक्त व्यापार समझौता (FTA) प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ भारत के जुड़ाव में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और आर्थिक एकीकरण को मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है.

2030 तक ट्रेड को दोगुना करने का लक्ष्य
डील पर साइन के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 56 अरब अमेरिकी डॉलर का था, जिसे 2030 तक दोगुना करने का संयुक्त लक्ष्य रखा गया है. मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, सीईटीए ने ब्रिटेन को भारत के 99% निर्यात के लिए अभूतपूर्व शुल्क-मुक्त पहुंच सुनिश्चित की है, जो लगभग पूरे व्यापार क्षेत्र को कवर करता है.
डील पर हस्ताक्षर होने के बाद केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था, “यह सीईटीए दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार संबंधों में एक मील का पत्थर है, जो एक महत्वाकांक्षी और संतुलित ढांचा स्थापित करता है.” उन्होंने आगे कहा था, ” यह ब्रिटेन को 99% भारतीय निर्यात पर टैरिफ-मुक्त पहुंच प्रदान करता है, जिसमें लगभग 100% व्यापार मूल्य शामिल है – जिसमें श्रम-प्रधान क्षेत्र भी शामिल हैं, जो ‘मेक इन इंडिया’ पहल को आगे बढ़ाता है और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का आधार तैयार करता है.”
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भारत को इन क्षेत्रों में होगा फायदा
डील से भारत को कई क्षेत्रों में फायदा होने वाला है. इनमें कपड़ा, समुद्री उत्पाद, चमड़ा, जूते, खेल के सामान, खिलौने और रत्न एवं आभूषण जैसे श्रम-प्रधान उद्योगों के साथ-साथ इंजीनियरिंग सामान, ऑटो कंपोनेंट और जैविक रसायन जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों के लिए नए अवसर खुलने की उम्मीद है. इससे भारत को काफी ज्यादा व्यापार मिलने के साथ फायदे की भी उम्मीद है.
यह समझौता आईटी और आईटी-सक्षम सेवाओं, वित्तीय और कानूनी सेवाओं, पेशेवर और शैक्षिक सेवाओं, और डिजिटल व्यापार में बेहतर बाजार पहुंच प्रदान करता है. भारतीय पेशेवर, जिनमें ब्रिटेन में सभी सेवा क्षेत्रों में काम करने के लिए कंपनियों द्वारा तैनात पेशेवर, आर्किटेक्ट, इंजीनियर, शेफ, योग ट्रेनर और संगीतकार जैसे अनुबंध पर तैनात पेशेवर शामिल हैं, आसान वीजा प्रक्रियाओं और उदार प्रवेश श्रेणियों से लाभान्वित होंगे, जिससे प्रतिभाओं के लिए ब्रिटेन में काम करना आसान हो जाएगा.
भारत ने दोहरे अंशदान समझौते पर भी एक समझौता किया है. इससे भारतीय प्रोफेशनल्स और उनके नियोक्ताओं को ब्रिटेन में तीन साल तक के लिए सामाजिक सुरक्षा भुगतान से छूट मिलेगी, जिससे भारतीय प्रतिभाओं की लागत प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होगा.
यह समझौता व्यापार को और अधिक समावेशी बनाने के लिए तैयार किया गया है. महिला और युवा उद्यमी, किसान, मछुआरे, स्टार्टअप और एमएसएमई को ग्लोबल वैल्यू चैन तक नई पहुंच प्राप्त होगी, जो इनोवेशन को प्रोत्साहित करने, स्थायी प्रथाओं को बढ़ावा देने और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने वाले प्रावधानों द्वारा समर्थित होगी.
सीईटीए से आने वाले वर्षों में व्यापार की मात्रा में उल्लेखनीय वृद्धि होने, रोजगार सृजन, निर्यात का विस्तार और भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच एक गहरे, अधिक लचीले आर्थिक संबंधों को बढ़ावा मिलने की भी उम्मीद है.

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हर साझेदारी अपने आप में स्वतंत्र- पीयूष गोयल
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री ब्रिटेन के दौरे पर रहे हैं. 27 जून को न्यूज एजेंसी पीटीआई को मिली जानकारी के अनुसार, यूके-इंडिया वीक 2026 को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा, “हर व्यापारिक संबंध और हर साझेदारी अपने आप में स्वतंत्र होती है. ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता भारत द्वारा अब तक किए गए सबसे व्यापक समझौतों में से एक होने जा रहा है, और यह जुलाई में लागू होगा.”
उनके बयानों ने यूके-इंडिया एफटीए को भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति में एक प्रमुख मील का पत्थर और वस्तुओं, सेवाओं, निवेश, नवाचार और भविष्य के उद्योगों में गहन द्विपक्षीय सहयोग के लिए एक मंच के रूप में स्थापित किया.
वहीं, गोयल के बाद ब्रिटेन के व्यापार एवं वाणिज्य सचिव पीटर काइल ने कहा कि यह समझौता ब्रिटेन-भारत संबंधों में व्यापक पुनर्विचार का हिस्सा है. उन्होंने कहा, “ब्रिटेन-भारत मुक्त व्यापार समझौता ब्रिटेन और भारत के बीच संबंधों को व्यापक रूप से पुनर्स्थापित करने का एक हिस्सा था. जब दो नेता किसी बात के प्रति इतने प्रतिबद्ध होते हैं, और उनके बीच तालमेल और संबंध इतने मजबूत होते हैं, तो बाधाओं को तोड़ने में इससे हमें बहुत तेजी मिलती है.”

भारत और यूके ट्रेड आंकड़े
अब बात भारत और यूके यानी कि ब्रिटेन के बीच व्यापार आंकड़ों की करते हैं. वाणिज्य मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और ब्रिटेन के बीच कुल ट्रेड 2 लाख 22 हजार 719.04 करोड़ रुपये का रहा है. इनमें भारत का एक्सपोर्ट 1 लाख 18 हजार 783.33 करोड़ रुपये और इंपोर्ट 1 लाख 3 हजार 935.71 करोड़ रुपये का रहा है.
वहीं, दोनों देशों के बीच वित्त वर्ष 2024-25 के व्यापार की बात करें तो यह कुल 1 लाख 95 हजार 734.74 करोड़ रुपये का रहा है. इनमें भारत का एक्सपोर्ट 1 लाख 23 हजार 56.98 करोड़ रुपये और इंपोर्ट 72 हजार 677.76 करोड़ रुपये का रहा है.
दोनों देशों के बीच वित्त वर्ष 2023-24 के व्यापार की बात करें तो यह कुल 1 लाख 76 हजार 695.27 करोड़ रुपये का रहा है. इनमें भारत का एक्सपोर्ट 1 लाख 6 हजार 964.05 करोड़ रुपये और इंपोर्ट 69 हजार 731.22 करोड़ रुपये का रहा है.
ये आंकड़े बता रहे हैं कि भारत और ब्रिटेन के बीच समय के साथ ट्रेड भी बढ़ा है. अब जब बात दोनों देशों के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लागू होने की हो रही है तो जानकार संभावना जता रहे हैं कि इससे केवल व्यापार बढ़ेगा ही नहीं बल्कि निवेश के साथ इसमें और भी भारी बढ़ोतरी होगी.
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