Gujarat News : सूरत की नई सिविल अस्पताल में प्रथम वर्ष के रेजिडेंट डॉक्टर की आत्महत्या की घटना ने मेडिकल जगत को झकझोर दिया है. राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए. स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर गठित विशेष जांच कमेटी ने महज 24 घंटे के भीतर अपनी जांच पूरी कर ली है.
जांच कमेटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में रेजिडेंट डॉक्टर के साथ रैगिंग और मानसिक प्रताड़ना किए जाने की बात सामने आई है. रिपोर्ट के आधार पर मानसिक प्रताड़ना के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार पाए गए चार सीनियर डॉक्टरों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है. इसके साथ ही जूनियर डॉक्टरों की सुरक्षा और उचित निगरानी की जिम्मेदारी निभाने में कथित तौर पर विफल रहने पर संबंधित विभाग के HOD और टीचिंग स्टाफ को शो-कॉज नोटिस जारी किया गया है.
24 घंटे में हुई जांच पूरी
स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया के निर्देश के बाद गठित विशेष जांच कमेटी ने लगातार काम करते हुए मामले की जांच पूरी की. मंत्री के मुताबिक कमेटी ने रात करीब 9:30 बजे से सुबह तक लगातार जांच की और प्रथम वर्ष के 80 से अधिक जूनियर डॉक्टरों के बयान दर्ज किए. मृतक डॉक्टर के पास से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है. हालांकि, उनके साथ पढ़ने वाले सहपाठियों के बयानों में सीनियर डॉक्टरों द्वारा कथित तौर पर लगातार मानसिक प्रताड़ना और परेशान किए जाने की जानकारी सामने आई.
इन्हीं बयानों और एंटी-रैगिंग कमेटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर चार सीनियर डॉक्टरों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की गई है. स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित विभाग के HOD और टीचिंग स्टाफ को भी शो-कॉज नोटिस जारी किया है. उनसे पूछा गया है कि जूनियर डॉक्टरों की सुरक्षा और उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी में कथित चूक क्यों हुई. सरकार के इस फैसले से मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग और मानसिक प्रताड़ना के खिलाफ सख्त संदेश देने की कोशिश की गई है.
स्वास्थ्य मंत्री की सीनियर डॉक्टरों को कड़ी चेतावनी
स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने सीनियर डॉक्टरों को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि जूनियर डॉक्टरों का अपमान करना या उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करना हमारी संस्कृति नहीं है. उन्होंने कहा कि मेडिकल क्षेत्र में सेवा के लिए आए डॉक्टर अगर रैगिंग जैसी गतिविधियों में शामिल होते हैं, तो यह उनके पूरे करियर पर गंभीर असर डाल सकता है. मंत्री ने चेतावनी दी कि भविष्य में भी ऐसी घटनाओं में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सरकार द्वारा कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी. मंत्री ने सीनियर डॉक्टरों से अनुशासन और मानवता के साथ जूनियर डॉक्टरों के साथ व्यवहार करने की अपील की.
डॉक्टर्स के उज्जवल भविष्य के साथ सरकार खड़ी
स्वास्थ्य मंत्री ने मेडिकल छात्रों और जूनियर डॉक्टरों से भावुक अपील भी की. उन्होंने कहा कि अगर कॉलेज में कोई सीनियर डॉक्टर उन्हें परेशान करता है, रैगिंग करता है या परीक्षा में फेल करने की धमकी देता है, तो किसी भी छात्र को यह सब अपने मन में दबाकर रखने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में छात्र बिना डरे तत्काल अपने डीन, कॉलेज के निदेशक या सीधे स्वास्थ्य मंत्री अथवा राज्य सरकार से संपर्क करें. मंत्री ने भरोसा दिलाया कि छात्रों की सुरक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए राज्य सरकार उनके साथ खड़ी है. सूरत नई सिविल अस्पताल में हुई इस दुखद घटना पर स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने मृतक डॉक्टर के पिता से टेलीफोन पर बातचीत की और परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की.
सरकार गंभीरता से करेगी कार्रवाई
मंत्री ने परिवार को भरोसा दिलाया कि इस दुख की घड़ी में राज्य सरकार मानवीय दृष्टिकोण के साथ उनके साथ खड़ी है. उन्होंने कहा कि घटना के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति को छोड़ा नहीं जाएगा और मृतक डॉक्टर तथा उनके परिवार को न्याय दिलाने के लिए सरकार पूरी गंभीरता से कार्रवाई करेगी. सूरत की घटना के बाद चार सीनियर डॉक्टरों का निलंबन और HOD समेत संबंधित टीचिंग स्टाफ को शो-कॉज नोटिस यह संकेत देता है कि मेडिकल संस्थानों में रैगिंग और मानसिक प्रताड़ना को लेकर सरकार अब सख्त रुख अपना रही है. स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया है कि जूनियर डॉक्टरों के साथ किसी भी प्रकार की प्रताड़ना को स्वीकार नहीं किया जाएगा. साथ ही छात्रों से भी अपील की गई है कि किसी भी तरह की परेशानी या मानसिक दबाव की स्थिति में वे चुप न रहें और तुरंत जिम्मेदार अधिकारियों तक अपनी शिकायत पहुंचाएं.
‘बार-बार मरने से बेहतर…’ सहारनपुर में कॉलेज अकाउंटेंट ने खुद को मारी गोली; भांजी को भेजा सुसाइड नोट
