Home मनोरंजन ट्रोलिंग के बाद भी नहीं बदले Dia Mirza के सुर, एक्ट्रेस ने समझाया पुरुषों और क्लाइमेट चेंज का रिश्ता

ट्रोलिंग के बाद भी नहीं बदले Dia Mirza के सुर, एक्ट्रेस ने समझाया पुरुषों और क्लाइमेट चेंज का रिश्ता

by Preeti Pal 18 June 2026, 2:32 PM IST (Updated 18 June 2026, 2:33 PM IST)
18 June 2026, 2:32 PM IST (Updated 18 June 2026, 2:33 PM IST)
ट्रोलिंग के बाद भी नहीं बदले Dia Mirza के सुर, एक्ट्रेस ने समझाया पुरुषों और क्लाइमेट चेंज का क्या है आपस में रिश्ता

Dia Mirza: एक्ट्रेस और एनवायरमेंट एक्टिविस्ट दिया मिर्जा इन दिनों अपने एक बयान को लेकर काफी चर्चा में हैं. हाल ही में उन्होंने कहा था कि पुरुषों ने क्लाइमेट क्राइसेस को जन्म दिया है. उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई. कई लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर पुरुषों और क्लाइमेट चेंज के बीच क्या रिश्ता हो सकता है. बढ़ती ट्रोलिंग के बीच दिया मिर्जा ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर करके इस बारे में बात की. उन्होंने क्लियर कहा कि वो अपने बयान पर अभी भी कायम हैं. उनका मानना है कि क्लाइमेट क्राइसेस सिर्फ एनवायरमेंट की प्रोब्लम नहीं, बल्कि असमानता से जुड़ा एक बड़ा सोशल इश्यू भी है.

कमजोर लोगों पर असर

वीडियो में दिया मिर्जा ने बताया कि क्लाइमेट चेंज और पितृसत्ता, दोनों ही ऐसे सिस्टम का नतीजा हैं जो देखभाल और बैलेंस से ज्यादा शोषण, नियंत्रण और जल्दी मिलने वाले फायदों को जरूरी समझते हैं. उनका कहना है कि ऐसे ढांचे अक्सर फ्यूचर की भलाई को नजरअंदाज कर देते हैं. दिया ने ये भी बताया कि क्लाइमेट क्राइसेस का सबसे ज्यादा असर समाज के कमजोर वर्गों पर पड़ता है, खासकर महिलाओं और बच्चों पर. उन्होंने कहा कि जब पानी के सोर्स सूख जाते हैं, तो दूर-दूर से पानी लाने की जिम्मेदारी अक्सर महिलाओं पर आ जाती है. इसी तरह जब सूखा, बाढ़ या तूफान जैसी आपदाएं आती हैं और लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ता है, तब महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा मुश्किलों का सामना करते हैं.

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महिलाओं का योगदान

हालांकि, दिया ने सिर्फ प्रोब्लम्स की बात नहीं की, बल्कि महिलाओं के योगदान को भी सामने रखा. उन्होंने कहा कि एनवायरमेंट की रक्षा में महिलाओं की भूमिका हमेशा से बड़ी रही है. जंगलों को बचाने, बीजों का संरक्षण करने, पानी के सोर्सेस का मैनेजमेंट करना और मुसीबत के टाइम कम्युनिटी की मदद करने में महिलाएं हमेशा आगे रही हैं. दिया मिर्जा का मानना है कि, क्लाइमेट चेंज से लड़ना सिर्फ कार्बन उत्सर्जन कम करने तक ही नहीं है. इसके लिए हमें ये भी समझना होगा कि हम एक-दूसरे और नेचर के साथ कैसा बिहेव करते हैं.

नहीं मिला बराबरी का दर्जा

अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में भी दिया ने खुलकर अपनी बात रखी. उन्होंने लिखा कि सदियों से पावर और रिसोर्सेस को लिमिटेड लोगों के हाथों में रखा और नेचर के साथ-साथ कमजोर वर्ग का भी शोषण किया. जिस तरह कई सोसाइटीज में महिलाओं को बराबरी का दर्जा नहीं मिला. उसी तरह जंगलों, नदियों और बाकी नेचुरल सिरोर्सेस को भी सिर्फ इस्तेमाल की चीज समझा गया. दिया ने कहा कि जलवायु संकट सिर्फ कार्बन या प्रदूषण का मुद्दा नहीं है, बल्कि ये इस बात से भी जुड़ा है कि हम समाज और प्रकृति के प्रति कितना सम्मान और संवेदनशीलता रखते हैं. उनके मुताबिक, बेहतर फ्यूचर के लिए ऐसे सिस्टम की जरूरत है जो सभी के सम्मान पर बेस हो. खैर, भले ही दिया मिर्जा के बयान पर अलग-अलग राय सामने आ रही हों, लेकिन उन्होंने क्लियर कर दिया है कि वो अपनी सोच पर कायम हैं.

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