Mehmood: हिंदी सिनेमा में कुछ कलाकार ऐसे रहे हैं, जिनकी एंट्री से ही पर्दे पर माहौल बदल जाता था. महमूद भी उन्हीं सितारों में शामिल थे. महमूद की कॉमेडी, टाइमिंग और अलग अंदाज ने उन्हें ऐसा मुकाम दिया, जहां वो सिर्फ फिल्म के एक्टर नहीं बल्कि अपने आप में एक बड़ा अट्रैक्शन बन गए थे. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक बार महमूद ने अमिताभ बच्चन के साथ आए एक यंगस्टर को देखकर उसे फिल्म में साइन करने के लिए तुरंत 5 हजार रुपये निकाल लिए थे? मजेदार बात ये थी कि वो कोई नया एक्टर नहीं, बल्कि आगे चलकर देश के प्रधानमंत्री बने राजीव गांधी थे. इस दिलचस्प किस्से का जिक्र राइटर हनीफ जावेरी की किताब ‘महमूद: ए मैन ऑफ मैनी मूड’ में मिलता है.
अमिताभ के साथ मुंबई पहुंचे राजीव
कहानी उस दौर की है, जब अमिताभ बच्चन फिल्मों में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे थे. तब महमूद इंडस्ट्री में एक बड़ा नाम बन चुके थे. ‘बॉम्बे टू गोवा’ में अमिताभ को मौका देने के बाद दोनों के बीच अच्छी दोस्ती हो गई थी. इसी दौरान अमिताभ दिल्ली से अपने एक दोस्त को मुंबई लेकर आए. महमूद की नजर जब उस लड़के पर पड़ी तो वो उसकी पर्सनालिटी और लुक से काफी इम्प्रेस हुए. महमूद को लगा कि ये लड़का तो फिल्मी दुनिया के लिए बिल्कुल फिट है. इतना ही नहीं, उन्हें लगा कि ये आगे चलकर इंटरनेशनल स्टार बन सकता है. बस फिर क्या था. महमूद ने ज्यादा सोचने में वक्त नहीं लगाया और 5 हजार रुपये निकालकर अपने भाई अनवर अली को दे दिए. महमूद का इरादा था कि उस लड़के को अपनी अगली फिल्म के लिए साइन कर लिया जाए.
फिर आया असली ट्विस्ट
अनवर अली को जब पैसे दिए गए तो उन्हें समझ नहीं आया कि आखिर माजरा क्या है. उन्होंने महमूद को बताया कि जिसे वो नया एक्टर समझ रहे हैं, वो कोई फिल्मी स्ट्रगलर नहीं बल्कि राजीव गांधी हैं. राजीव गांधी कोई आम नाम भी नहीं था. वो उस समय देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे थे. ये सुनते ही महमूद को अहसास हुआ और उन्होंने पैसे वापस ले लिए. इस बात पर अमिताभ बच्चन और राजीव गांधी दोनों खूब हंसे. लेकिन कहानी का सबसे मजेदार हिस्सा तो आगे आया.
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सच निकली भविष्यवाणी
किस्मत का खेल देखिए, जिस लड़के को महमूद ने देखकर कहा था कि ये इंटरनेशनल स्टार बन सकता है, वो सचमुच देश-दुनिया में मशहूर हुआ. फर्क सिर्फ इतना था कि राजीव गांधी ने फिल्मी दुनिया में नहीं, बल्कि राजनीति की दुनिया में अपनी पहचान बनाई. बाद में जब राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री बने, तब अमिताभ बच्चन ने मजाकिया अंदाज में कहा था कि महमूद की बात आखिर सच साबित हो गई.
कॉमेडी से बने हिंदी सिनेमा के बड़े सितारे
29 सितंबर 1932 को बॉम्बे यानी आज की मुंबई में पैदा हुए महमूद का बचपन आसान नहीं था. उनके पिता मुमताज अली अपने टाइम के जाने-माने डांसर और एक्टर थे. हालांकि, परिवार की आर्थिक परिस्थितियों की वजह से महमूद को छोटी उम्र में ही काम करना पड़ा. उन्होंने साल 1943 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘किस्मत’ से बाल कलाकार के तौर पर फिल्मों में कदम रखा. आगे चलकर उन्होंने कई छोटे-मोटे काम किए. इतना ही नहीं महमूद ने फिल्ममेकर पी.एल. संतोषी के ड्राइवर की नौकरी भी की. धीरे-धीरे फिल्मों में उन्हें मौके मिलने लगे. ‘दो बीघा जमीन’ और ‘प्यासा’ जैसी फिल्मों में छोटे रोल करने के बाद 1958 की ‘परवरिश’ उनके करियर का अहम मोड़ बनी. फिर आया 1960 और 70 का दशक, जब महमूद की कॉमेडी ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई. ‘गुमनाम’, ‘प्यार किए जा’, ‘पड़ोसन’, ‘बॉम्बे टू गोवा’, ‘दो फूल’, ‘कुंवारा बाप’ और ‘सबसे बड़ा रुपैया’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अपनी खास छाप छोड़ी. ‘पड़ोसन’ का मास्टर पिल्लई वाला किरदार तो आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है.
अमिताभ को भी दिया बड़ा मौका
महमूद सिर्फ खुद चमकने वाले कलाकार नहीं थे. वो नए टैलेंट को पहचानने के लिए भी जाने जाते थे. उन्होंने अमिताभ बच्चन को ‘बॉम्बे टू गोवा’ में मौका दिया. उस टाइम पर अमिताभ का करियर शुरू ही हुआ था. 4 फिल्मफेयर अवॉर्ड जीतने वाले महमूद ने चार दशक से ज्यादा लंबे करियर में 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया. 23 जुलाई, 2004 को 71 साल की उम्र में अमेरिका के पेंसिल्वेनिया में महमूद का निधन हुआ. लेकिन उनके किस्से, किरदार और कॉमेडी आज भी दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान ले आती है.
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