Yoga for Back Pain: आजकल ऑफिस हो या घर, लैपटॉप और कंप्यूटर के सामने घंटों बैठना हमारी लाइफ का हिस्सा बन गया है. सुबह काम शुरू होता है और पता ही नहीं चलता कि कब कई घंटे कुर्सी पर बैठकर निकल गए. इसका असर सिर्फ आंखों और दिमाग पर नहीं, बल्कि गर्दन, कंधों, कमर और पैरों पर भी पड़ता है. गलत पोस्चर की वजह से बॉडी में जकड़न और थकान महसूस होने लगती है. ऐसे में योग का एक आसान आसन आपकी रोज के रूटीन में काफी मदद कर सकता है. इसका नाम है पूर्वोत्तानासन, जिसे अपवर्ड प्लैंक पोज भी कहा जाता है.
क्या है पूर्वोत्तानासन?
‘पूर्वोत्तानासन’ संस्कृत के तीन शब्दों से मिलकर बना है, ‘पूर्व’, यानी शरीर का अगला हिस्सा, ‘उत्तान’, यानी खिंचाव और ‘आसन’, यानी मुद्रा. आसान भाषा में कहें तो ये ऐसा योगासन है, जिसमें शरीर के अगले हिस्से को अच्छा स्ट्रेच मिलता है. वहीं, हाथ, पैर और पीठ की मांसपेशियां मजबूती से काम करती हैं. खास बात ये है कि लंबे समय तक बैठने की वजह से शरीर का जो हिस्सा लगातार सिकुड़ा और जकड़ा रहता है, उसे ये आसन खोलने में मदद करता है.
पीठ और रीढ़ को राहत
दिनभर कुर्सी पर बैठने से रीढ़ की हड्डी की नैचुरल मूवमेंट कम हो सकती है. पूर्वोत्तानासन शरीर को पीछे की ओर खोलता है और रीढ़ में लचीलापन बनाए रखने में मदद करता है. साथ ही पीठ और कंधों की मांसपेशियों को भी एक्टिव करता है. ऐसे में जो लोग लगातार लैपटॉप पर काम करते हैं, उनके लिए ये आसन उपयोगी हो सकता है, क्योंकि इसमें शरीर का अगला हिस्सा अच्छी तरह स्ट्रेच होता है.
पैरों से हिप्स तक फायदा
पूर्वोत्तानासन सिर्फ पीठ का आसन नहीं है. इसे करते समय पैरों को सीधा रखते हुए एड़ियों को जमीन पर दबाया जाता है. इससे पैरों की मांसपेशियों में मजबूती और खिंचाव आता है. इसके अलावा कूल्हों को ऊपर उठाने के दौरान ग्लूट्स यानी हिप्स भी एक्टिव होते हैं. इससे लोअर बॉडी की स्थिरता और लचीलेपन को सपोर्ट मिलता है.
थायरॉयड को लेकर क्या दावा है?
योग से जुड़े स्रोतों में पूर्वोत्तानासन को थायरॉयड क्षेत्र के लिए भी उपयोगी बताया जाता है, क्योंकि आसन के दौरान गर्दन पीछे की ओर जाती है. हालांकि, थायरॉयड की बीमारी के इलाज के तौर पर सिर्फ योग पर निर्भर नहीं रहना चाहिए. किसी भी मेडिकल समस्या में डॉक्टर की सलाह जरूरी है. वहीं, अगर आप योग में नए हैं तो सीधे आसन करने की बजाय पहले कलाइयों, कंधों और पैरों को हल्का वॉर्म अप दें. आसन करते समय शरीर को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं और अपनी क्षमता के अनुसार ही मुद्रा बनाए रखें. इसके अलावा अगर गर्दन या रीढ़ की गंभीर समस्या, चोट या स्लिप डिस्क जैसी परेशानी है, तो इस आसन को करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें.
