Sudarshan Kriya : आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इन दिनों ‘सुदर्शन क्रिया’ को लेकर सुर्खियों में हैं. बेंगलुरु में ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के एक कार्यक्रम में AAP संयोजक ने बताया कि उन्होंने भी सुदर्शन क्रिया को सीखा है. केजरीवाल ने आगे कहा कि तिहाड़ जेल में रहते हुए मनीष सिसोदिया ने भी यह तकनीक सीखी थी और जेल से बाहर आने के बाद सिसोदिया ने उन्हें भी इसे सीखने के लिए प्रेरित किया. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सुदर्शन क्रिया क्या है और इसे इतना खास क्यों माना जाता है?
क्या है सुदर्शन क्रिया?
सुदर्शन क्रिया एक विशेष प्रकार की लयबद्ध श्वास तकनीक है. जिसमें सांस लेने और छोड़ने के अलग-अलग पैटर्न का इस्तेमाल किया जाता है. इसे ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ की प्रमुख श्वास एवं ध्यान तकनीकों में शामिल किया जाता है. संस्था के अनुसार, इसका उद्देश्य सांस के माध्यम से शरीर और मन को अधिक शांत, संतुलित और ऊर्जावान अवस्था में लाना है.
सामान्य तौर पर हम सांस लेने की प्रक्रिया पर ज्यादा ध्यान नहीं देते. लेकिन योग और श्वास आधारित तकनीकों में माना जाता है कि सांस और मानसिक स्थिति के बीच गहरा संबंध है. तनाव या चिंता के दौरान सांस लेने का तरीका बदल सकता है. जबकि नियंत्रित और लयबद्ध श्वास मन को शांत करने में मदद कर सकती है.
सुदर्शन क्रिया कैसे की जाती है?
सुदर्शन क्रिया में सांसों के अलग-अलग लयबद्ध और चक्रीय पैटर्न का अभ्यास किया जाता है. इसमें श्वास की गति और लय को एक निश्चित तरीके से नियंत्रित किया जाता है. यह सामान्य प्राणायाम की तरह केवल कुछ मिनट गहरी सांस लेने तक सीमित नहीं है बल्कि एक संरचित अभ्यास है.
इसकी सही तकनीक सीखने के लिए प्रशिक्षित शिक्षक के मार्गदर्शन में अभ्यास करने की सलाह दी जाती है. खासकर पहली बार इसे करने वाले व्यक्ति को बिना प्रशिक्षण के इंटरनेट पर देखकर कठिन श्वास अभ्यास करने से बचना चाहिए.
तनाव और मानसिक स्वास्थ्य से क्या संबंध?
सुदर्शन क्रिया को लेकर कई वैज्ञानिक अध्ययन किए गए हैं. उपलब्ध शोध में इसके संभावित प्रभावों में तनाव, चिंता और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कुछ लक्षणों में सुधार की संभावना का अध्ययन किया गया है. एक वैज्ञानिक समीक्षा में भी सुदर्शन क्रिया योग से जुड़े कई अध्ययनों का विश्लेषण किया गया है.
‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के अनुसार, इसके अभ्यास से तनाव कम करने, बेहतर नींद और मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़े कुछ सकारात्मक प्रभाव देखे गए हैं. हालांकि, संस्था द्वारा बताए गए सभी स्वास्थ्य लाभों को समान स्तर के वैज्ञानिक प्रमाण के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए और किसी बीमारी के इलाज के विकल्प के तौर पर इसे इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.
क्या इससे शरीर को भी फायदा हो सकता है?
सुदर्शन क्रिया पर हुए कुछ शोधों में श्वसन और हृदय संबंधी कार्यों पर संभावित प्रभावों का अध्ययन किया गया है. एक प्रकाशित अध्ययन में लंबे समय तक सुदर्शन क्रिया योग करने वाले लोगों में हृदय संबंधी कुछ मापदंडों में बदलाव की जांच की गई थी. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सुदर्शन क्रिया हर व्यक्ति में एक जैसी तरह से काम करेगी. किसी भी योग या श्वास तकनीक के प्रभाव व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य, जीवनशैली और नियमित अभ्यास जैसे कई कारकों पर निर्भर कर सकते हैं.
सुदर्शन क्रिया और ध्यान में क्या अंतर है?
ध्यान में आमतौर पर व्यक्ति अपने विचारों, सांस या किसी विशेष बिंदु पर ध्यान केंद्रित करता है. वहीं सुदर्शन क्रिया मुख्य रूप से लयबद्ध श्वास प्रक्रिया पर आधारित है और इसमें सांस के अलग-अलग पैटर्न का अभ्यास किया जाता है. यानी सरल शब्दों में कहें तो ध्यान का मुख्य केंद्र मन को एकाग्र और शांत करना हो सकता है.जबकि सुदर्शन क्रिया में सांस की लय के जरिए शरीर और मन की स्थिति को प्रभावित करने का प्रयास किया जाता है.
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क्या हर कोई इसे कर सकता है?
सुदर्शन क्रिया सामान्यतः स्वस्थ लोगों द्वारा प्रशिक्षित मार्गदर्शन में सीखी जाती है. लेकिन अगर किसी व्यक्ति को गंभीर स्वास्थ्य समस्या है.सांस से जुड़ी परेशानी है या वह किसी गंभीर बीमारी का इलाज करा रहा है.तो किसी भी नए श्वास अभ्यास को शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना श्रेयस्कर है. यह भी समझना जरूरी है कि सुदर्शन क्रिया को किसी बीमारी की दवा या चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए.
केजरीवाल के बयान के बाद फिर चर्चा में
अरविंद केजरीवाल ने अपने हालिया संबोधन में बताया कि उन्होंने पिछले सप्ताह ही सुदर्शन क्रिया सीखी. उन्होंने यह भी कहा कि मनीष सिसोदिया ने तिहाड़ जेल में रहते हुए इसे सीखा था और बाहर आने के बाद उन्हें इसके बारे में बताया. केजरीवाल ने सुदर्शन क्रिया को सीखने के अनुभव का जिक्र करते हुए आध्यात्मिकता और ध्यान को युवाओं के जीवन में शामिल करने की जरूरत पर भी बात की.
कुल मिलाकर, सुदर्शन क्रिया सांस की एक संरचित और लयबद्ध तकनीक है. जिसका उद्देश्य मन और शरीर को अधिक शांत एवं संतुलित अवस्था में लाना है. इसके तनाव और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े संभावित लाभों पर शोध जारी है. लेकिन इसे अपनाते समय सही प्रशिक्षण और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है.
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