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CJP प्रदर्शन से पहले अलर्ट! 26 हजार जवान तैनात, शराब की दुकानें बंद, स्कूलों पर नजर

by Preeti Pal 9 October 2026, 10:02 AM IST (Updated 9 October 2026, 10:03 AM IST)
9 October 2026, 10:02 AM IST (Updated 9 October 2026, 10:03 AM IST)
दिल्ली में CJP के प्रदर्शन से पहले हाई अलर्ट! 26 हजार जवान तैनात, शराब की दुकानें बंद, स्कूलों पर भी नजर

CJP Protest: देश की राजधानी दिल्ली में 10 अक्टूबर को होने वाले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन से पहले सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं. हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राजधानी में 26 हजार से ज्यादा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के जवानों की तैनाती की तैयारी की गई है. ये पिछले कई सालों में दिल्ली में की गई सबसे बड़ी सुरक्षा व्यवस्थाओं में से एक है. प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने कई तरह के कदम उठाए हैं. नई दिल्ली इलाके में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. लाउडस्पीकर के जरिए लोगों से भीड़ नहीं जुटाने की अपील की जा रही है. पुलिसकर्मियों को बॉडी-वॉर्न कैमरे दिए गए हैं. शराब की दुकानों को दो दिनों के लिए बंद करने का आदेश भी जारी किया गया है. वहीं, शनिवार को स्कूल खुलेंगे या नहीं, इस पर फैसला होना बाकी है.

यानी इस बार मामला सिर्फ एक प्रदर्शन का नहीं है. अलग-अलग संगठनों की सक्रियता, विपक्षी नेताओं के विरोध प्रदर्शन और पुलिस पर लगे गंभीर आरोपों ने सुरक्षा एजेंसियों की चुनौती बढ़ा दी है. ऐसे में समझते हैं कि दिल्ली में इतनी बड़ी तैयारी क्यों की जा रही है. साथ ही इस बार का प्रदर्शन पहले से अलग कैसे है.

क्यों खास है ये इंतजाम?

दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की बड़ी संख्या में तैनाती की जा रही है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कम से कम 110 अतिरिक्त कंपनियों को भेजने की मंजूरी दी है. इनमें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), सीमा सुरक्षा बल (BSF), सशस्त्र सीमा बल (SSB), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) शामिल हैं. ये अतिरिक्त कंपनियां जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से दिल्ली पहुंची हैं. इससे पहले राजधानी में 111 कंपनियां मौजूद थीं. अब कुल 221 कंपनियां दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगी. एक कंपनी में 120 से 130 जवान हो सकते हैं. हालांकि, आमतौर पर इनमें से 75 से 80 जवान ही फील्ड में तैनात किए जाते हैं. इसलिए कंपनियों की कुल संख्या और वास्तव में ड्यूटी करने वाले जवानों की संख्या अलग-अलग हो सकती है. दिल्ली में इससे पहले फरवरी 2020 में भी बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए थे. उस समय दिल्ली विधानसभा चुनाव, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा और उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगे लगभग एक ही समय पर हुए थे. अब CJP प्रदर्शन की वजह से एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था को बड़े लेवल पर तैयार किया जा रहा है.

वकील, किसान और विपक्षी

इस बार पुलिस की चिंता सिर्फ CJP के प्रदर्शन को लेकर नहीं है. कई और ग्रुप्स ने भी आंदोलन में शामिल होने या अलग से मार्च निकालने की घोषणा की है. वकीलों के कुछ संगठनों ने पटियाला हाउस कोर्ट से जंतर-मंतर तक मार्च निकालने की अपील की है. अधिवक्ता महमूद प्रमोद ने सोशल मीडिया के जरिए वकीलों से 10 अक्टूबर को सुबह 11 बजे गेट नंबर चार पर जुटने की अपील की है. भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने भी CJP को समर्थन देने की घोषणा की है. उम्मीद है कि वो भी दिल्ली पहुंच सकते हैं. इसके अलावा कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और दूसरे विपक्षी नेता भी अलग-अलग जगहों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. जंतर-मंतर, चुनाव आयोग के कार्यालय, आकाशवाणी भवन, राजघाट और कनॉट प्लेस जैसे इलाकों में उनकी गतिविधियों से पुलिस की जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं. वहीं, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भी विपक्षी प्रदर्शन में शामिल होने की बात कही गई है. शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन की तरफ मार्च निकालने की संभावना भी जताई गई थी. हालांकि, इन सबकी शनिवार को होने वाली गतिविधियों को लेकर तस्वीर पूरी तरह क्लियर नहीं है. यही अनिश्चितता सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है.

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हर जगह रखी जा रही है नज़र

पुलिस के सामने एक और बड़ी चुनौती प्रदर्शनकारियों के दिल्ली पहुंचने के तरीकों को लेकर है. प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोग सड़क, ट्रेन या हवाई जहाज से राजधानी आ सकते हैं. पुलिस की प्लानिंग है कि जरूरत पड़ने पर एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और बस टर्मिनल जैसी एंट्रीज पर भी सुरक्षा बढ़ाई जाए. प्रदर्शनकारियों के शहर में प्रवेश करने के समय और उनके संभावित रास्तों की जानकारी जुटाना भी सुरक्षा योजना का हिस्सा है. कुछ प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर उन्हें रास्ते में रोका गया, तो वो वहीं विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं. इससे पुलिस के लिए स्थिति संभालना और कठिन हो सकता है. ऐसे में नई दिल्ली के कई हिस्सों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. लाउडस्पीकर से रिकॉर्ड किए गए संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं. इनके जरिए लोगों को अनावश्यक भीड़ जमा नहीं करने की सलाह दी जा रही है.

राहुल और प्रियंका की सुरक्षा

विरोध प्रदर्शनों के दौरान नेताओं की सुरक्षा पुलिस के लिए एक अहम मुद्दा है. मंगलवार रात विपक्षी नेताओं को हिरासत में लेकर किंग्सवे कैंप ले जाया गया था. उस बस में CRPF के जवान भी मौजूद थे. राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को CRPF की Z-प्लस सुरक्षा मिली हुई है. ऐसे में उनकी सुरक्षा करने वाले अधिकारियों को ये सुनिश्चित करना होता है कि हिरासत में लिए जाने के दौरान भी उन्हें कोई नुकसान न पहुंचे. नवंबर 2019 तक राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और उनकी मां सोनिया गांधी को विशेष सुरक्षा समूह (SPG) की सुरक्षा प्राप्त थी. बाद में केंद्र सरकार ने उनकी सुरक्षा बदलकर CRPF की Z-प्लस सुरक्षा कर दी. SPG की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री की सुरक्षा तक सीमित कर दी गई. CRPF देश के कई महत्वपूर्ण व्यक्तियों को Z-प्लस सुरक्षा प्रदान करती है. इनमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हैं. सुरक्षा व्यवस्था के तहत किसी सुरक्षित व्यक्ति को हिरासत में ले जाने वाली बस में उसके निजी सुरक्षा अधिकारियों की मौजूदगी जरूरी हो सकती है. उनका काम सिर्फ सुरक्षा करना नहीं, बल्कि ये सुनिश्चित करना भी है कि संबंधित व्यक्ति को किसी अज्ञात स्थान पर ले जाने या उसके साथ दुर्व्यवहार की स्थिति न बने.

पत्रकारों के लिए गाइडलाइन

इस बार दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की कवरेज करने वाले पत्रकारों के लिए भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं. 5 अक्टूबर को जारी ‘गाइडलाइंस फॉर जर्नलिस्ट्स’ में बताया गया है कि रिपोर्टिंग के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए. पुलिस ने पत्रकारों से वैध पहचान पत्र साथ रखने को कहा है. उन्हें पुलिस के काम में बाधा नहीं डालने को कहा गया है. साथ ही तनावपूर्ण स्थिति में उचित दूरी बनाकर रिपोर्टिंग करने की सलाह दी गई है. पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन स्थल पर कुछ लोग पत्रकारों के बजाय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हो सकते हैं. इसी वजह से पहचान पत्रों की जांच की जा रही है. कुछ लोगों को मान्यता प्राप्त मीडिया संस्थानों से जुड़ा नहीं होने के कारण हिरासत में लिए जाने की खबरें भी सामने आई हैं. लेकिन इस गाइडलाइन के बाद पुलिस की जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठे हैं. नागरिकों और कई मीडिया समूहों ने पुलिसकर्मियों से ड्यूटी के दौरान अपना आई कार्ड लगाने की मांग की है. वहीं, कुछ पुलिसकर्मियों के बिना आई कार्ड के नजर आने पर उनकी पहचान और जवाबदेही को लेकर चिंता जताई गई. प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण विरोध के दौरान मारपीट नहीं करने और महिलाओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने की भी मांग की है.

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पुलिस की वर्दी पर कैमरा

प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर दुर्व्यवहार के आरोप लगने के बाद दिल्ली पुलिस ने बॉडी-वॉर्न कैमरों का इस्तेमाल शुरू किया है. ये कैमरे पुलिसकर्मियों की वर्दी पर लगाए जाते हैं और ड्यूटी के दौरान होने वाली गतिविधियों को रिकॉर्ड कर सकते हैं. नई दिल्ली जिले में कम से कम 150 ऐसे कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है. इसका उद्देश्य घटनाओं का रिकॉर्ड तैयार करना और किसी विवाद की स्थिति में उपलब्ध फुटेज की मदद से सच्चाई का पता लगाना है. ट्रैफिक पुलिस पहले से ही बॉडी-वॉर्न कैमरों का इस्तेमाल करती रही है. लेकिन प्रदर्शन को संभालने के लिए इतनी बड़ी संख्या में इनका उपयोग खास माना जा रहा है. ऐसे कैमरों का इस्तेमाल सेना के विशेष बल, NSG और CRPF जैसी एजेंसियां भी कुछ अभियानों में करती हैं. सीमा सुरक्षा बल के जवानों और जेल कर्मचारियों के लिए भी कैमरे गतिविधियों का रिकॉर्ड रखने में मददगार होते हैं. इसके अलावा, दिल्ली पुलिस ने घटनाओं की तस्वीरें लेने और वीडियो रिकॉर्ड करने के लिए एक्स्ट्रा फोटोग्राफरों की भी व्यवस्था की है.

बंद रहेंगी शराब की दुकानें

सुरक्षा तैयारियों के बीच दिल्ली के आबकारी विभाग ने शहर में शराब की सभी दुकानों को दो दिनों के लिए बंद करने का आदेश दिया है. ये फैसला कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है. अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस से मिले इनपुट के आधार पर यह कदम उठाया गया. आशंका है कि कुछ असामाजिक तत्व तनावपूर्ण माहौल का फायदा उठाकर अशांति फैलाने की कोशिश कर सकते हैं. चुनाव के दौरान शराब की दुकानों को बंद करना आम बात है. लेकिन किसी एक प्रदर्शन को देखते हुए पूरी दिल्ली में इस तरह का आदेश जारी होना असामान्य बताया गया है. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, उनके लगभग दो दशक के करियर में किसी एक जंतर-मंतर प्रदर्शन को देखते हुए पूरे शहर में शराब की दुकानों को बंद करने का ऐसा फैसला पहली बार हुआ है. इस बीच, नई दिल्ली इलाके में शनिवार को स्कूल खुलेंगे या नहीं, इस पर भी फैसला होना बाकी है.

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अभी जारी है जांच

CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले 20 जुलाई को नई दिल्ली में हुए पिछले प्रदर्शन की हिंसा की जांच भी तेज की गई है. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है. जांच में ये पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हिंसा की प्लानिंग पहले से थी या नहीं. पुलिस ये भी जांच रही है कि संसद की ओर मार्च के आह्वान के बाद प्रदर्शन स्थल पर आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोग पहुंचे थे या नहीं.अधिकारियों के मुताबिक, फेस रिकग्निशन सिस्टम (FRS) के डेटा से 2,873 संदिग्धों की पहचान की गई है. पुलिस का दावा है कि इनमें आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग भी शामिल हैं. इन सभी से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद जुलाई की हिंसा से जुड़ी 17 FIR पहले ही रद्द की जा चुकी हैं. अब क्राइम ब्रांच का ध्यान पुलिसकर्मियों पर कथित हमले, तोड़फोड़ और पुलिस वाहनों समेत सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं पर है. यह जांच इसलिए भी अहम है, क्योंकि पुलिस को होने वाले प्रदर्शन के दौरान पिछली घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की जिम्मेदारी निभानी है.

पुलिस का सख्त संदेश

दिल्ली पुलिस ने 10 अक्टूबर को होने वाले CJP प्रदर्शन को लेकर साफ चेतावनी दी है. पुलिस के मुताबिक, राजधानी में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू हैं. ऐसे में किसी भी अनधिकृत जमावड़े को गैरकानूनी माना जाएगा और संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. पुलिस का कहना है कि, अपनी मांगें उठाने वाले लोगों को कानूनी प्रक्रिया का पालन करना चाहिए. हालांकि, किसी भी स्थिति में कार्रवाई कानून के अनुसार ही होनी चाहिए.

सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी परीक्षा

CJP का प्रस्तावित प्रदर्शन दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. हजारों जवानों की तैनाती, दूसरे संगठनों की सक्रियता, नेताओं की सुरक्षा, पत्रकारों की रिपोर्टिंग और पिछली हिंसा की जांच ने पूरे मामले को संवेदनशील बना दिया है. अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि शनिवार को प्रदर्शनकारी किस संख्या में पहुंचते हैं और पुलिस स्थिति को किस तरह संभालती है. एक तरफ प्रशासन की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना है. दूसरी तरफ शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार और पुलिस की जवाबदेही भी महत्वपूर्ण हैं. ऐसे में आने वाले घंटों में सुरक्षा व्यवस्था, स्कूलों को लेकर फैसले और प्रदर्शन से जुड़ी गतिविधियों पर सबकी नजर रहेगी. राजधानी के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि कानून-व्यवस्था बनी रहे और किसी भी व्यक्ति की सुरक्षा से समझौता न हो.

News Source: ANI

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