Home Top News भारत ने जिनेवा के संयुक्त राष्ट्र ऑफिस को तोहफे में दिए 5 मोर, जानें क्या है इसका महत्व

भारत ने जिनेवा के संयुक्त राष्ट्र ऑफिस को तोहफे में दिए 5 मोर, जानें क्या है इसका महत्व

by Neha Singh 10 August 2026, 10:46 AM IST (Updated 10 August 2026, 11:43 AM IST)
10 August 2026, 10:46 AM IST (Updated 10 August 2026, 11:43 AM IST)
India Gifted Five Peacock

India Gifted Peacocks: भारत ने जिनेवा के संयुक्त राष्ट्र के ऑफिस (UNOG) को पांच भारतीय मोर दान किए हैं, जिसमें एक दुर्लभ सफेद पंख वाला मोर भी शामिल है. इससे दशकों पुरानी परंपरा फिर से शुरू हुई है. शुक्रवार को हुए एक खास समारोह में, जिनेवा में UN में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, अरिंदम बागची ने औपचारिक तौर पर UNOG की डायरेक्टर-जनरल तातियाना वालोवाया को पांच मोर सौंपे. इस तरह उन्होंने देश की समृद्ध प्राकृतिक विरासत और बहुपक्षीयता के प्रति प्रतिबद्धता को दिखाया.

इंदिरा गांधी ने भी भेजी थी मोरों की जोड़ी

पांच युवा मोरों में चार नीले मोर और एक सफेद पंख वाला नर मोर शामिल है, जो संयुक्त राष्ट्र से जुड़े नीले और सफेद रंगों को दिखाता है. यह दान दूसरी बार है जब भारत ने UNOG को मोर दिए हैं. 1981 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दिल्ली चिड़ियाघर से एक ब्रीडिंग जोड़ी भेजी थी. भारतीय मिशन ने कहा, “भारतीय मोर, जो सुंदरता और मजबूती का प्रतीक है, बायोडायवर्सिटी के संरक्षण और पर्यावरण की देखभाल के प्रति भारत की पक्की प्रतिबद्धता को दिखाता है।”

तीन महीने बाद पार्क जाएंगे मोर

जिनेवा में भारत के परमानेंट मिशन की तरफ से जारी एक बयान के मुताबिक, महानिदेशक वालोवाया ने इस काम के लिए भारत सरकार की तारीफ की. मोर शुरू में लगभग तीन महीने तक एक बंद जगह में रहेंगे, जिसके बाद उन्हें एरियाना पार्क में आजादी से घूमने दिया जाएगा, जहां UN का यूरोपियन हेडक्वार्टर है. 46 हेक्टेयर का एरियाना पार्क जिनेवा के सबसे बड़े और सबसे मशहूर पार्कों में से एक है. जिनेवा शहर ने इस पार्क को शुरू में लीग ऑफ नेशंस और फिर यूनाइटेड नेशंस को उपलब्ध कराया.

सांस्कृतिक मूल्यों को दिखाता है मोर

मोर एक सदी से भी ज़्यादा समय से एरियाना पार्क का हिस्सा रहे हैं, यह परंपरा लीग ऑफ नेशंस और यूनाइटेड नेशंस की स्थापना से भी पहले की है. यह परंपरा स्विस आर्कियोलॉजिस्ट और आर्ट कलेक्टर गुस्ताव रेविलियड के समय से चली आ रही है, जिन्होंने 1890 में जिनेवा शहर को वह प्रॉपर्टी दे दी थी जहां अब UN कॉम्प्लेक्स है. इंडियन मिशन ने कहा कि भारत का दान UN परिसर की बायोडायवर्सिटी को बढ़ाता है और देश की प्राकृतिक विरासत और सांस्कृतिक मूल्यों को दिखाता है. इसमें आगे कहा गया कि यह UN के साथ भारत की पुरानी पार्टनरशिप को भी दिखाता है और इंटरनेशनल सहयोग के प्रति उसके कमिटमेंट को फिर से पक्का करता है.

क्या है UNSC, जहां वीटो पावर के कारण रुक जाते हैं बड़े-बड़े फैसले? भारत ने पेश की ये दावेदारी

News Source: PTI

You may also like

Live Times logo

Feature Posts

Newsletter

@2026 Live Time. All Rights Reserved.

Are you sure want to unlock this post?
Unlock left : 0
Are you sure want to cancel subscription?