Ex-Army Chief Naravane: पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज नरवणे ने गुरुवार को कहा कि भारत का ध्यान पाकिस्तान की तरफ ज्यादातर आतंकवाद के लगातार खतरे की वजह से है, लेकिन हमारा मुख्य प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान नहीं है. वह रूपा पब्लिकेशन्स द्वारा पब्लिश अपनी नई किताब ‘द क्यूरियस एंड द क्लासिफाइड: अनअर्थिंग मिलिट्री मिथ्स एंड मिस्ट्रीज’ के लॉन्च पर बोल रहे थे. उन्होंने कहा, “पाकिस्तान और चीन बिल्कुल अलग तरह के हैं. हमने उन दोनों के साथ युद्ध लड़े हैं. हमारी सीमाएं अनसुलझी हैं. इसलिए वे हमेशा एक खतरे, एक चुनौती के तौर पर हमारे रडार पर रहेंगे.”
चीन है मुख्य प्रतिद्वंद्वी
नरवणे ने दोनों देशों के बीच फर्क बताते हुए कहा कि भारत का पाकिस्तान पर ध्यान ज़्यादातर आतंकवाद के लगातार खतरे की वजह से था, जबकि चीन भारत का मुख्य प्रतिद्वंद्वी है. उन्होंने कहा भविष्य में भी चीन कई मामलों में नई दिल्ली का मुख्य प्रतिद्वंद्वी बनने वाला है. चीन के मामले में “दुश्मन” शब्द का इस्तेमाल करने से बचते हुए, उन्होंने बीजिंग के साथ लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने के साथ-साथ एक मजबूत मिलिट्री रोकथाम की जरूरत पर जोर दिया.
नरवणे ने कहा, “हमने पाकिस्तान के साथ बड़े युद्ध लड़े हैं और आतंकवाद को उनके लगातार सपोर्ट की वजह से, हमारा ध्यान अपनी पश्चिमी सीमाओं की ओर है. लेकिन मुझे लगता है कि हम बहुत साफ हैं कि लंबे समय में और आने वाले सालों में, चीन हमारा मुख्य प्रतिद्वंद्वी होगा. मैं जानबूझकर प्रतिद्वंद्वी शब्द का इस्तेमाल कर रहा हूं, दुश्मन नहीं.” उन्होंने कहा कि चीन, राजनीति, अर्थशास्त्र, व्यापार और सैन्य मामलों सहित कई क्षेत्रों में भारत के साथ मुकाबला करेगा.
‘हर समय तैयार रहना होगा’
31 दिसंबर, 2019 से 30 अप्रैल, 2022 तक आर्मी चीफ रहे नरवणे ने जोर देकर कहा, “यह हम पर है कि हम उन झगड़ों, उन मतभेदों को बातचीत, डायलॉग के तरीकों से सुलझाने की कोशिश करें और ताकत का इस्तेमाल करना हमेशा आखिरी समाधान होना चाहिए.” साथ ही, उन्होंने कहा कि भारत को किसी भी संभावित गलत काम को रोकने के लिए भरोसेमंद मिलिट्री तैयारी बनाए रखनी चाहिए. नरवणे ने कहा, किसी को भी फोर्स का इस्तेमाल करने या कोई भी गलत काम करने से रोकने के लिए आपके पास एक मजबूत डिटरेंस होना चाहिए.
‘उत्तर-पूर्व में स्थिरता पक्की करना चाहिए’
भारत के बड़े पड़ोस के बारे में, नरवणे ने कहा कि नई दिल्ली को नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और म्यांमार जैसे पड़ोसी देशों में स्टेबिलिटी पक्का करने की दिशा में काम करना चाहिए. उन्होंने कहा, “आप अपने पड़ोसियों को चुन नहीं सकते, असल जिंदगी में भी और भू-राजनीति में भी. आपके पास जो है, उसका सबसे अच्छा इस्तेमाल करना होगा.” नरवणे ने जोर देकर कहा कि भारत की अपनी शांति और डेवलपमेंट के लिए स्थिर पड़ोसी देश जरूरी है. पड़ोसी देशों में अस्थिरता से रिफ्यूजी फ्लो, स्मगलिंग, ड्रग ट्रैफिकिंग और गैर-कानूनी हथियारों की मूवमेंट भी हो सकती ह. उन्होंने म्यांमार से भारत में रिफ्यूजी इनफ्लो का उदाहरण देते हुए कहा, “अगर आपका पड़ोसी देश जल रहा है, तो इससे आपको खुश नहीं होना चाहिए.”
‘शांति के लिए युद्ध करना होगा’
पूर्व आर्मी चीफ ने कहा कि बॉर्डर पर अस्थिरता का आखिर में भारत पर सीधा असर पड़ता है, जिसमें नारकोटिक्स और दूसरे गैर-कानूनी सामानों की मूवमेंट भी शामिल है. नरवणे ने कहा, “इसलिए, हमें इन देशों को स्थिर रहने में मदद करने की जरूरत है.” शांति बनाए रखने के महत्व पर जaर देते हुए, उन्होंने सेना से अपील करते हुए कहा “अगर आप शांति चाहते हैं, तो युद्ध के लिए तैयार रहें.”
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News Source: PTI
