Protest In Modi Government: नीट परीक्षा पेपर लीक, देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर बीते 6 जून से जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का धरना प्रदर्शन जारी रहा है. इसके सपोर्ट में शिक्षाविद् और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे थे. उनकी बिगड़ती तबीयत को देखते हुए उनके अनशन के 21वें दिन दिल्ली पुलिस वांगचुक को जंतर-मंतर धरना स्थल से लेकर अस्पताल चली गई. फिलहाल वे सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं.
इस बीच आज 20 जुलाई को सीजेपी प्रोटेस्ट के संसद मार्च के दौरान भारी हंगामा हो गया. दिल्ली पुलिस ने बताया कि उन्हें इस मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं दी गई थी और संसद के मानसून सत्र की शुरूआत को देखते हुए धारा 163 लागू कर दी गई थी. जी हां, नई दिल्ली डिस्ट्रिक्ट में सेक्शन 163 BNSS (पहले सेक्शन 144 CrPC) के तहत रोक लगी हुई है. इसके मुताबिक, जंतर-मंतर पर तय स्थान के अलावा कहीं भी प्रदर्शन, मार्च, जुलूस, प्रदर्शन और पांच या उससे ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने पर पूरी तरह रोक है.
हालांकि, इसके बावजूद सीजेपी के नेतृत्व में संसद मार्च निकाला गया और फिर इसमें हिंसा देखी गई. भीड़ को कंट्रोल करने के लिए सुरक्षाकर्मियों के द्वारा प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया और आंसू गैस के गोले दागे गए. इस दौरान प्रदर्शनकारी और कई सुरक्षाकर्मियों के घायल होने की भी खबर सामने आई है.
खैर, यह पहली बार नहीं है जब मोदी सरकार के कार्यकाल में धरना-प्रदर्शन हो रहा है. इससे पहले भी कई ऐसे आंदोलन और प्रदर्शन हो चुके हैं, जिनको देखते हुए मोदी सरकार को कुछ न कुछ फैसला जरूर लेने पड़े हैं. आइए हम अब मोदी सरकार के इस कार्यकाल के दौरान हुए 5 बड़े ऐसे आंदोलनों की बात करते हैं, जिन्होंने देश ही नहीं बल्कि दुनिया की भी नजरें अपनी ओर खींची. शुरुआत हम किसान आंदोलन से करेंगे.

किसान आंदोलन
मोदी सरकार में साल 2020-21 का किसान आंदोलन काफी चर्चा में रहा था. 5 जून 2020 को सरकार ने तीन कृषि बिलों का अध्यादेश लेकर आई. तब इसका विपक्ष ने विरोध किया था. सितंबर 2020 में इन बिलों को संसद में पेश किया गया. विपक्ष ने इसे किसानों के लिए अच्छा नहीं (किसान विरोधी) बताते हुए इसका विरोध किया था. लेकिन वे बिल को संसद में पारित होने से नहीं रोक पाए थे.
संसद के दोनों सदनों में पेश होने के बाद यह बिल पास हो गया और आगे की अन्य प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद यह कानून बन गया. लेकिन इसका जमकर विरोध हुआ. कृषि संबंधित इस कानून का देश के कई राज्यों के किसानों ने विरोध किया. इनमें हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान काफी सक्रिय दिखे और इन्होंने एक तरह से पूरी दिल्ली को घेर लिया. ये दिल्ली के बॉर्डर पर धरना करने लगे.
इस बीच किसान के प्रतिनिधियों की सरकार से कई दौर की बातचीत भी हुई, लेकिन बात नहीं बनी. किसानों ने दिल्ली से सटे बॉर्डर इलाकों जैसे सिंघु बार्डर, टिकरी बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर को घेर लिया था. वहीं, दूसरी ओर सरकार किसानों की बात और मांगों को लेकर एक कमिटी भी बनाई और दोनों पक्षों की ओर से गहनता के साथ बातचीत शुरू हुई.
किसानों ने इस आंदोलन के जरिए 26 जनवरी 2021 को गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली में ट्रैक्टर रैली बुलाई और इस दौरान दिल्ली के कई हिस्सों में इनके और सुरक्षाबलों के बीच हिंसक झड़प भी हुई. प्रदर्शनकारियों ने लाल किले को केवल घेरा ही नहीं बल्कि उसपर चढ़कर विवादित झंडे भी फहराया. इसके बाद यह मामला और तूल पकड़ लिया. सरकार ने कहा कि किसानों के आंदोलन में देश विरोधी ताकतें भी घुसपैठ कर चुकी हैं. भारत के इस किसान आंदोलन को कई लोगों ने सपोर्ट किया था, इसमें ग्लोबल लेवल पर क्लाइमेट एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग, सिंगर रिहाना ने भी अपना समर्थन दिया था.
एक साल से अधिक समय तक चले इस किसान आंदोलन में हुई हिंसा और अन्य चीजों को देखते हुए मोदी सरकार आखिरकार किसानों की बात मान गई. नवंबर 2021 में केंद्र की मोदी सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दे दी.
29 नवंबर 2021 को कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए संसद के दोनों सदनों में बिल को पास कर दिया गया. वहीं, दिसंबर 2021 में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने तीनों कृषि कानूनों को वापसी वाले बिल पर मुहर लगा दी. इस प्रकार से किसान आंदोलन का एक तरह से समापन हुआ. हालांकि, किसानों के मुद्दों पर सरकार और इनके प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की वार्ता चलती रही और फिर यह मामला शांत हुआ.

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सीएए-एनआरसी का विरोध
साल 2019 के आखिरी और 2020 की शुरुआत में सीएए-एनआरसी को लेकर विरोध प्रदर्शन हुआ था. यह प्रदर्शन राजधानी दिल्ली के शाहीन बाग और जामिया नगर इलाके में तेज रूप से हुआ था. शाहीन बाग में महिलाओं ने महीनों तक सड़कों को जाम करके रखा था और धरना-प्रदर्शन हुआ था. यह प्रदर्शन और विरोध देश में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) और नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के खिलाफ हुआ था. इसे अल्पसंख्यकों (मुस्लिम) ने अपने लिए विरोधी बिल बताया था, हालांकि सरकार हमेशा यह कहती रही कि यह देश के अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए है ना कि असुरक्षा के लिए.
इन दोनों बिलों के विरोध में दिल्ली में कई जगहों पर प्रदर्शन के बाद हिंसक झड़पे भी हुई थीं. जामिया में पुलिस को लाठीचार्ज तक करना पड़ गया था. इस दौरान पुलिस वालों को भी प्रदर्शनकारियों ने निशाना बनाया था. वहीं, दिल्ली के सीलमपुर समेत अन्य इलाकों में दंगे भी भड़क गए थे, जिसमें 55 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी. बहरहाल, सरकार ने सीएए और एनआरसी के मुद्दों को ठंडे बस्ते में डाल दिया है.
नवंबर 2021 में गृह मंत्रालय की ओर से बताया गया कि अभी तक सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय नागरिकों की राष्ट्रीय सूची (एनआरआईसी) तैयार करने का कोई निर्णय नहीं लिया है. असम के संदर्भ में, माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर, एनआरसी में शामिल किए गए लोगों की पूरक सूची की हार्ड कॉपी और परिवारवार बहिष्करण सूची की ऑनलाइन प्रतियां 31 अगस्त, 2019 को प्रकाशित की जा चुकी हैं. नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को 12.12.2019 को अधिसूचित किया जा चुका है. तब गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह बात कही थी.
अग्निवीर योजना के खिलाफ प्रदर्शन
साल 2022 में देश में अग्निवीर योजना के खिलाफ प्रदर्शन हुआ था. विपक्ष ने इस मुद्दों पर सरकार को सड़क से लेकर संसद तक घेरा था. इसका विरोध करने वाले पेंशन और स्थायी नौकरी की मांग कर रहे थे और पुरानी रक्षा भर्ती सिस्टम को जारी रखने की बात कह रहे थे. बता दें कि अग्निवीर योजना केवल 4 वर्षों के लिए सेना में अग्निवीर की भर्ती करती है. इसमें से मात्र 25 फीसदी को ही आगे की नियमित सेवा में रखा जाता है. हालांकि, इस योजना के खिलाफ भारी प्रदर्शन को देखते हुए सरकार ने 2022 अधिकतम आयु सीमा को 21 साल से बढ़ाकर के 23 साल तक कर दी थी.
अग्निवीर योजना के खिलाफ देश के कई राज्यों जैसे बिहार, यूपी, हरियाणा समेत अन्य जगहों भारी बवाल भी हुआ था. बिहार में उग्र भीड़ ने ट्रेनों को निशाना बनाया था और उनमें आग लगा दी थी. इस हिंसक प्रदर्शन में कई लोगों के घायल होने की भी खबर थी.
बता दें कि अग्निवीर योजना के तहत भारतीय सशस्त्र बलों जैसे थल सेना, वायु सेना और नौसेना में युवाओं को 4 साल के लिए भर्ती किया जाता है. इन्हें अग्निवीर कहा जाता है. 4 साल की सेवा पूरी होने के बाद इनमें से 25 फीसदी को उनके परफॉर्मेंस और टैलेंट के आधार पर नियमित सैनिकों के रूप में स्थायी नौकरी मिल जाती है. जो लोग इसमें आगे नहीं जा पाते हैं, उन्हें अन्य क्षेत्रों जैसे केंद्रीय अर्धसैनिक बल, राज्य पुलिस में आरक्षण और आयु सीमा में छूट जैसे कई लाभ मिलते हैं.

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पहलवानों का धरना-प्रदर्शन
साल 2023 में देश की महिला पहलवानों के साथ पुरुष पहलवानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन किया था. इन्होंने तब के तत्कालीन भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाकर विरोध- प्रदर्शन किया था. इन पहलवानों में विनेश फोगाट, साक्षी मलिक, बजरंग पुनिया समेत अन्य लोग शामिल हुए थे.
इस प्रदर्शन का नतीजा यह रहा था कि बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज कर ली थी. उन्हें अपने पद से इस्तीफा भी देना पड़ा था. वहीं, मई 2023 में नए संसद भवन के उद्घाटन के दिन पहलवानों ने महिला सम्मान महापंचायत और संसद तक मार्च करने की कोशिश की थी, जिस दौरान भारी हंगामा हुआ था. तब पहलवानों को हिरासत में भी लिया गया था और जंतर-मंतर को खाली करा दिया गया था.

सीजेपी का संसद मार्च
आज 20 जुलाई को सीजेपी के नेतृत्व में संसद तक मार्च निकाला गया. इस दौरान हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी इस मार्च में शामिल हुए. कुछ देर बाद सीजेपी का यह ‘चलो संसद’ मार्च उग्र हो गया. प्रदर्शनकारियों का एक हिस्सा पार्लियामेंट तक पहुंच गया और वहां पर नारेबाजी करनी शुरू कर दी. इसी बीच पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज शुरू कर दिया. इस दौरान पुलिस के द्वारा आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए.
सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने जंतर-मंतर, पार्लियामेंट स्ट्रीट, सेंट्रल विस्टा, कनॉट प्लेस और शंकर चौक जैसे स्थानों पर थ्री टियर ग्रेड की सुरक्षा को तैनात कर दिए थे. इस दौरान दिल्ली पुलिस की दो लेयर और पैरामिलिट्री फोर्स की एक परत को लगाया गया. साथ ही परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए रैपिड रिस्पॉन्स टीमें चौबीसों घंटे स्टैंडबाय पर रही.
इसी बीच नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि एक पब्लिक एडवाइजरी जारी की. उन्होंने लिखा कि दिल्ली पुलिस साफ तौर पर ये स्पष्ट करती है कि इस तरह के आंदोलन के लिए अनुमति नहीं मांगी गई है.
डीसीपी सचिन ने बताया कि मानसून सत्र और प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए नई दिल्ली में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी गई है. इसके तहत इन जगहों पर पांच से ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने और मार्च निकालने की इजाजत नहीं है. सिर्फ जंतर-मंतर के अंदर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की छूट दी गई है. दूसरी तरफ पुलिस ने चेतावनी दी है कि जो भी इन धाराओं का उल्लंघन करेगा उसके खिलाफ BNS की धारा 223 और अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाएगी.
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