Home राज्यजम्मू और कश्मीर J&K: भारतीय सेना को ताशी ने दी कारगिल में घुसपैठ की खबर, आज भी जहन में ताजा हैं जंग की यादें

J&K: भारतीय सेना को ताशी ने दी कारगिल में घुसपैठ की खबर, आज भी जहन में ताजा हैं जंग की यादें

by Pooja Attri 25 July 2024, 1:00 PM IST (Updated 21 July 2025, 4:39 PM IST)
25 July 2024, 1:00 PM IST (Updated 21 July 2025, 4:39 PM IST)
J&K: भारतीय सेना को ताशी ने दी कारगिल में घुसपैठ की खबर, आज भी जहन में ताजा हैं जंग की यादें

Jammu-Kashmir News: लद्दाख के रहने वाले 56 साल के ताशी नामग्याल के जहन में कारगिल युद्ध की यादें आज भी ताजा हैं.

25 July, 2024

Jammu-Kashmir News: लद्दाख के छोटे से गांव गारकोन में रहने वाले ताशी नामग्याल के जेहन में आज भी कारगिल युद्ध की यादें ताजा हैं. 56 साल के ताशी अक्सर अपने दोस्तों के साथ 25 साल पहले की बातें शेयर करते रहते हैं. ताशी अपने किस्सों में बताते हैं कि कैसे पाकिस्तानी घुसपैठी देश में घुसे और फिर जंग शुरू हुई.

घुसपैठियों को कब और कैसे देखा ?

दरअसल, ताशी नामग्याल वही शख्स हैं, जिन्होंने अपने याक की तलाश करते वक्त कारगिल में पाकिस्तानी घुसपैठियों को देखा था. ताशी ने घुसपैठियों को पहाड़ के ऊंचे इलाकों से चट्टानें तोड़ते और बर्फ हटाते देखा. उन्हें देखते ही ताशी को खतरे का अंदेशा हो गया क्योंकि जहां उन्होंने घुसपैठियों को देखा था वहां पर उनकी तरफ पैरों के निशान नहीं थे. इसका मतलब साफ था कि घुसपैठिए सीमा पार से आए थे.

1999 का पूरा किस्सा

ताशी नामग्याल ने बताया कि 2 मई 1999 को वह अपना याक ढूंढने गए थे तभी उन्हें नाले के पास कुछ पैरों के निशान दिखे. उन निशानों को देखकर वह अपनी छत पर गए और वहां से दूरबीन से देखा. उस वक्तक नामग्याल ने कुछ लोगों को पत्थर तोड़ते और बर्फ हटाते देखा.

ताशी की बात पर नहीं किया गया भरोसा

जब ताशी ने इसकी खबर सेना को दी तब किसी ने भी उन पर भरोसा नहीं किया. हालांकि, चौकी पर मौजूद सैनिकों ने ताशी को शाम को दोबारा बुलाया. ताशी ने बताया कि घुसपैठिओं ने काले रंग के कपड़े पहने हुए थे. ताशी ने कहा- मैंने आर्मी को रिपोर्ट दी थी. इसकी खोजबीन करना उनका फर्ज था. इसके 8 दिन बाद ही वहां जंग छिड़ गई थी. पहले पाकिस्तानियों की तरफ से फायरिंग हुई. फिर हमारी फौज ने भगवान की कृपा से जीत हासिल की.

किस बात का अफसोस ?

ताशी अपने एक रिश्तेदार त्सेरिंग नोरफिल के साथ घुसपैठ की खबर देने के लिए सेना के पास गए थे. नोरफिल का मानना है कि अगर ताशी ने समय रहते पाकिस्तानी घुसपैठियों की सूचना भारतीय सेना को नहीं दी होती तो घुसपैठिए अपनी पकड़ और मजबूत कर लेते. ताशी नामग्याल की मानें तो उनकी कोशिशों की बदौलत ही भारतीय सेना को कारगिल में घुसपैठ का पता चला. हालांकि, ताशी को इस बात का अफसोस है कि उनकी कोशिशों को सरकार की तरफ से मान्यता नहीं मिली.

यह भी पढ़ें – राज्यों की खबरें, क्षेत्रीय समाचार, क्षेत्रीय ताज़ा खबरें, राज्य हिंदी समाचार

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