Kashmir Target Killing: कश्मीर घाटी में एक बार फिर टारगेट किलिंग की साजिश को लेकर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हैं. जुलाई महीने में घाटी में हुई तीन टारगेट किलिंग की घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. इन घटनाओं में एक हेड कांस्टेबल और दो प्रवासी मजदूरों को आतंकियों ने निशाना बनाया. अब पीएम पैकेज के तहत घाटी में काम कर रहे कर्मचारियों को धमकी मिलने के बाद उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है. जानकारी के मुताबिक, करीब 6 से 7 पीएम पैकेज कर्मचारियों को धमकी दिए जाने की बात सामने आई है.
उपराज्यपाल और पुलिस महानिदेशक को सीधे धमकी
धमकी भरे पत्र में कर्मचारियों को घाटी में दोबारा बसने की कोशिश नहीं करने की चेतावनी दी गई है. पत्र में कहा गया है कि अगर कर्मचारी घाटी में बसने की कोशिश करते हैं तो उन्हें कहीं भी निशाना बनाया जा सकता है. खास बात यह है कि धमकी भरे पत्र में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल और पुलिस महानिदेशक को भी सीधे तौर पर धमकी दी गई है. धमकी देने वालों ने कर्मचारियों को चेतावनी देते हुए कहा है कि ज्यादा जश्न मनाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि उन्हें कहीं भी निशाना बनाया जा सकता है.
1990 में कश्मीरी पंडितों को बनाया गया था निशाना
धमकी भरा पत्र सामने आने के बाद पीएम पैकेज के कर्मचारियों और उनके परिवारों में एक बार फिर डर का माहौल है. प्रशासन की ओर से कर्मचारियों को सतर्क रहने और सुरक्षा से जुड़े निर्देशों का पालन करने को कहा गया है. वहीं, सुरक्षा एजेंसियां धमकी की गंभीरता और इसके पीछे सक्रिय लोगों की पहचान को लेकर इनपुट की जांच में जुटी हैं. कश्मीर में कश्मीरी पंडितों और घाटी में काम कर रहे कर्मचारियों को धमकी मिलने का यह कोई पहला मामला नहीं है. 1990 के दशक में आतंकवाद के दौर में कश्मीरी पंडितों को बड़े पैमाने पर निशाना बनाया गया था. इसके चलते बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडितों को घाटी छोड़कर पलायन करना पड़ा.
कर्मचारियों के परिवारों में बढ़ी चिंता
इसके बाद केंद्र सरकार ने कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी और पुनर्वास के लिए पीएम पैकेज के तहत रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए. हालांकि, साल 2021 के बाद हुई टारगेट किलिंग की घटनाओं ने घाटी में काम कर रहे इन कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए. सुरक्षा कारणों को लेकर पीएम पैकेज के कर्मचारियों ने जम्मू में लंबे समय तक प्रदर्शन भी किया और उन्हें जम्मू स्थानांतरित करने की मांग उठाई. अब नए धमकी भरे पत्र ने कर्मचारियों और उनके परिवारों की चिंता फिर बढ़ा दी है. सवाल यह है कि क्या यह धमकी किसी बड़ी साजिश का संकेत है और सुरक्षा एजेंसियां इस चुनौती से निपटने के लिए क्या कदम उठाती हैं.
-रविंदर कुमार श्रीवास्तव की रिपोर्ट
आतंकियों पर शिकंजा! श्रीनगर में आतंकी मोहम्मद लतीफ भट के पोस्टर लगाए, लोगों से सहयोग की अपील
