Home Latest News & Updates FCRA बिल के खिलाफ तमिलनाडु में पेश हुआ प्रस्ताव, TVK सरकार ने किया विरोध; केंद्र के आगे रखी ये मांग

FCRA बिल के खिलाफ तमिलनाडु में पेश हुआ प्रस्ताव, TVK सरकार ने किया विरोध; केंद्र के आगे रखी ये मांग

by Sachin Kumar 11 August 2026, 2:03 PM IST (Updated 11 August 2026, 2:43 PM IST)
11 August 2026, 2:03 PM IST (Updated 11 August 2026, 2:43 PM IST)
TVK resolution against FCRA Bill Tamil Nadu Assembly

FCRA Bill: तमिलनाडु विधानसभा में TVK सरकार ने मंगलवार को FCRA बिल के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया. इस प्रस्ताव के माध्यम से राज्य सरकार ने केंद्र से ‘फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026’ वापस लेने की मांग की है. विधानसभा में यह प्रस्ताव स्कूल शिक्षा मंत्री राजमोहन ने पेश किया. प्रस्ताव में कहा गया है कि केंद्र सरकार द्वारा तैयार किए गए बिल के प्रावधान चैरिटेबल संगठनों की स्वायत्तता पर बुरा असर डाल सकते हैं. साथ ही शैक्षणिक और सामाजिक कल्याण संस्थानों पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा.

प्रस्ताव में ये है केंद्र से मांग

तमिलनाडु में FCRA बिल का मुद्दा गरमाया हुआ है. FCRA भारत में संघों, संगठनों और अन्य संस्थानों द्वारा विदेशी अंशदान प्राप्त करने और उस पर नियंत्रित करता है. साथ ही प्रस्ताव में केंद्र सरकार से आग्रह किया गया है कि संशोधन पर फिर से विचार किया जाए और यह सुनिश्चित करें कि नियामक कदम उन संगठनों के खिलाफ न उठाए जाए, जो शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम कर रहे हैं.

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संगठनों की होनी चाहिए रक्षा

टीवीके सरकार की ओर से पेश किए गए प्रस्ताव में विदेशी योगदान में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के साथ-साथ कानूनी रूप से काम कर रहे धर्मार्थ, शैक्षिक, चिकित्सा, धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कल्याण संगठनों के अधिकारों की रक्षा की भी मांग की गई है. स्पीकर जेसीडी प्रभाकर ने विधायकों को इस प्रस्ताव पर बोलने के लिए आमंत्रित किया. DMK की प्रमुख प्रेमलता विजयकांत ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए अपनी बात रखी.

संसद में उठी जेपीसी की मांग

केंद्र सरकार इस बात पर जोर दे रही है कि FCRA बिल जल्द से जल्द संसद के दोनों सदनों से पारित करवा लिया जाए. इस विधेयक का उद्देश्य है कि विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता लाना. इसी बीच ईसाई मिशनरी और अल्पसंख्यक संगठनों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है. उन्होंने बिल को वापस लेने या फिर JPC के पास भेजने की मांग की है. दूसरी तरफ डीएमके के राज्यसभा सांसद तिरुचि शिवा ने कहा कि यह बिल ईसाई समुदाय के खिलाफ है और वह इसका संसद में विरोध करेंगे.

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