Home राज्य हिंदू नववर्ष पर श्रीनगर में खोला गया ‘प्राचीन विचारनाग मंदिर’, कश्मीरी पंडितों ने मनाया ‘नवरेह मोहत्सव’

हिंदू नववर्ष पर श्रीनगर में खोला गया ‘प्राचीन विचारनाग मंदिर’, कश्मीरी पंडितों ने मनाया ‘नवरेह मोहत्सव’

by JP Yadav 9 April 2024, 5:50 PM IST (Updated 22 September 2025, 12:15 PM IST)
9 April 2024, 5:50 PM IST (Updated 22 September 2025, 12:15 PM IST)
ancient vicharnag temple

Hindu Nav Varsh 2024 : कश्मीरी पंडित नववर्ष त्योहार को बहुत खुशियों से मनाते हैं और मां देवी शारिका को समर्पित करते हैं. कश्मीरी हिंदू कैलेंडर के चैत्र (मार्च-अप्रैल) महीने के शुक्ल पक्ष के पहले दिन नववर्ष मनाया जाता है.

09 April, 2024

Hindu Nav Varsh 2024 : जम्मू कश्मीर के श्रीनगर में कश्मीरी पंडितों ने 35 साल बाद प्राचीन विचारनाग मंदिर खुलने पर नववर्ष का पहला दिन ‘नवरेह मोहत्सव’ मनाया. इस अवसर पर भारी संख्या में श्रद्धालु फूलों से सजी थालियां लेकर आरती करते नजर आए. नवरात्रि के पहले दिन और कश्मीरी पंडितों की तिथि के हिसाब से साल आज से शुरू होता है यहां से श्रद्धालु माता के खीर भवानी भी जाते हैं, लेकिन श्रद्धालु दर्शन करने के लिए विचारनाग मंदिर में आज 35 साल बाद आ रहे हैं.

कश्मीरी हिंदू कैलेंडर के चैत्र महीने में आता है नया साल

कश्मीरी पंडित इस त्योहार को बहुत खुशियों से मनाते हैं और मां देवी शारिका को समर्पित करते हैं. कश्मीरी हिंदू कैलेंडर के चैत्र (मार्च-अप्रैल) महीने के शुक्ल पक्ष के पहले दिन होता है. इसके साथ ही इस पूजा-अर्चना में हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय भी प्राचीन विचारनाग मंदिर में ‘नवरेह मोहत्सव’ में शामिल हुए हैं. इस त्योहार पर स्थानीय लोगों ने कहा कि आज का दिन बहुत ही खास है क्योंकि आज का दिन हम लोगों का नया साल है. इस दिन हमारा नया पंचांग शुरू होता है और आज ही के दिन ही नवरात्रि शुरू होता है तो इसलिए ये दिन हमारे लिए काफी खास हो गया है.

धूमधाम से मनाया कश्मीरी पंडितों ने मनाया त्योहार

एक स्थानीय शख्स शेख मंजूर ने कहा कि एक बार फिर से भाईचारा शुरू हो गया है क्योंकि ये कई अरसे बाद आज पहली दफा हुआ है. हम यहां मिलजुलकर रहते थे, बहुत खुश हैं इनका भी अपना मजहब है अपना भी एक धर्म है. वर्ष 1990 में देश के विभिन्न राज्यों में पलायन कर चुके कश्मीरी पंडित भी इस त्योहार को धूमधाम से मना रहे हैं. मंदिरों में कश्मीरी पंडितों ने पूजा-अर्चना कर उम्मीद जताई है कि हम वापिस कश्मीर घाटी में लौटेंगे.

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