Home धर्म Kailash Mansarovar जर्नी की पूरी गाइड! कैसे पहुंचें, कितना आएगा खर्च और किन बातों का रखें ध्यान

Kailash Mansarovar जर्नी की पूरी गाइड! कैसे पहुंचें, कितना आएगा खर्च और किन बातों का रखें ध्यान

by Preeti Pal 18 June 2026, 7:01 PM IST
18 June 2026, 7:01 PM IST
Kailash Mansarovar जर्नी की पूरी गाइड! कैसे पहुंचें, कितना आएगा खर्च और किन बातों का रखें ध्यान

Kailash Mansarovar: लाखों लोगों के लिए कैलाश मानसरोवर जाना सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि लाइफ का सबसे खास और स्पिरिचुअल एक्सपीरियंस है. बर्फ से ढका कैलाश पर्वत और उसके पास पवित्र मानसरोवर झील सदियों से श्रद्धालुओं और टूरिस्ट्स को अपनी तरफ अट्रैक्ट करते रहे हैं. हिंदू धर्म में कैलाश पर्वत को भगवान शिव का घर माना जाता है, जबकि बौद्ध, जैन और बोन धर्म में भी इस जगह को पूजा जाता है. हालांकि, कैलाश मानसरोवर पहुंचना किसी आम टूरिस्ट प्लेज जैसा बिल्कुल नहीं है.हाइट, मुश्किल रास्ते, बॉर्डर एरिया और कई जरूरी परमिट इस जर्नी को चैलेंजिग बना देते हैं. इसलिए अगर आप फ्यूचर में कैलाश मानसरोवर जाने का सपना देख रहे हैं, तो पहले इसकी पूरी जानकारी होना बहुत जरूरी है.

कहां है कैलाश मानसरोवर?

कई लोग ये मानते हैं कि कैलाश पर्वत भारत में है, लेकिन सच में कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील चीन के तिब्बत में हैं. ये इलाका भारत और नेपाल के बॉर्डर से बहुत नजदीक है. कैलाश पर्वत की ऊंचाई लगभग 6,638 मीटर है, जबकि मानसरोवर झील समुद्र तल से करीब 4,590 मीटर की ऊंचाई पर है. ये दुनिया के सबसे ऊंची और रेयर जगहों में से एक मानी जाती है. हाइट ज्यादा होने की वजह से यहां ऑक्सीजन का लेवल नॉर्मल जगहों से काफी कम होता है. इसी वजह से जर्नी शुरू करने से पहले फिजिकल और मेंटल तैयारी बहुत जरूरी हो जाती है.

कैसे पहुंचे कैलाश मानसरोवर?

कैलाश मानसरोवर पहुंचने के लिए खासतौर से 3 रास्ते हैं. हर रूट का एक्सपीरियंस, टाइम और मुश्किलों का लेवल अलग-अलग होता है. पहला है नेपाल के रास्ते जाना. इसे ओवरलैंड रूट भी कहते हैं. इंटरनेशनल टूरिस्ट्स के लिए नेपाल के रास्ते कैलाश मानसरोवर जाना सबसे पॉपुलर है. इस टूर की शुरुआत नेपाल की राजधानी काठमांडू से होती है. यहां से सड़क के रास्ते टूरिस्टों को क्यिरोंग बॉर्डर तक ले जाया जाता है. इसके बाद तिब्बत से गुजरते हुए दारचेन पहुंचा जाता है, जो कैलाश पर्वत की जर्नी का मेन एंट्री गेट माना जाता है.
इस पूरी जर्नी में आमतौर पर 13 से 16 दिन लग जाते हैं.

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हेलीकॉप्टर रूट

अगर आपके पास टाइम कम है तो हेलीकॉप्टर ऑप्शन भी मौजूद है. इस रूट में काठमांडू से नेपालगंज, फिर सिमिकोट और उसके बाद हिल्सा बॉर्डर तक हेलीकॉप्टर और छोटे प्लेन के जरिए पहुंचा जाता है. इस रास्ते से कैलाश मानसरोवर की यात्रा लगभग 9 से 11 दिनों में पूरी की जा सकती है. हालांकि, ये ऑप्शन काफी महंगा होता है.

ऑफिशियल रास्ता

भारतीय नागरिकों के लिए विदेश मंत्रालय (MEA) हर साल कैलाश मानसरोवर ऑर्गेनाइज करता है. वहीं, आप उत्तराखंड के लिपुलेख से भी यहां जा सकते हैं. ये कैलाश जाने का सबसे पुराना और ट्रेडिशनल रास्ता है. इस रास्ते में बहुत पैदल चलना पड़ता है. इस जर्नी में लगभग 22 से 25 दिन लग जाते हैं. ये रूट फिजिकली काफी चैलेंजिंग होता है.

नाथू ला-सिक्किम

ये रास्ता लिपुलेख से थोड़ा कंफर्टेबल माना जाता है. क्योंकि यहां से आपको आसानी से गाड़ी या बसों की सर्विस मिल जाती है. इस जर्नी में लगभग 21 दिन का टाइम लग जाता है. जिन लोगों को ज्यादा ट्रैकिंग करने में मुश्किल होती है, उनके लिए ये अच्छा ऑप्शन है.

ल्हासा के रास्ते

कुछ लोग पहले तिब्बत की राजधानी ल्हासा पहुंचते हैं और वहां से बाय रोड कैलाश मानसरोवर की तरफ बढ़ते हैं. इस रास्ते का सबसे बड़ा फायदा ये है कि टूरिस्टों को ऊंचाई के एनवायरमेंट में खुद को ढालने के लिए ज्यादा टाइम मिल जाता है. साथ ही रास्ते में तिब्बत के कल्चर और कई फेमस धार्मिक स्थलों को देखने का मौका भी मिलता है.

सबसे अच्छा टाइम

अगर आप कैलाश मानसरोवर जाने की प्लानिंग कर रहे हैं तो मई के मिड से लेकर सितंबर तक का टाइम सबसे बेस्ड रहता है. इस बीच मौसम अच्छा रहता है, सड़कें खुली रहती हैं और पहाड़ों पर बर्फ कम होती है. हालांकि, पहाड़ों का मौसम कभी भी बदल सकता है.

कौन-कौन से परमिट जरूरी हैं?

कैलाश मानसरोवर जर्नी के लिए सिर्फ पासपोर्ट होना काफी नहीं है. ये एक सेंसिटिव बॉर्डर एरिया है, इसलिए लोगों को कई परमिट लेने की जरूरत पड़ती है. विदेश मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, आवेदन करते टाइम कुछ जरूरी डॉक्यूमेंट्स तैयार रखने होते हैं.

पासपोर्ट साइज फोटो की स्कैन कॉपी
पासपोर्ट की स्कैन कॉपी
पर्सनल इनफॉर्मेशन और पारिवारिक विवरण वाले पेज
साथ जाने वाले के डॉक्यूमेंट्स

इसके अलावा तिब्बत ट्रैवल परमिट और बाकी लोकल परमिट भी जरूरी होते हैं. यही वजह है कि इस जर्नी की तैयारी कुछ महीने पहले शुरू कर देनी चाहिए

खर्चा?

कैलाश मानसरोवर जाने का खर्च चुने गए रूट और फेसिलिटी पर डिपेंड करता है. नेपाल से जाने वाले पैकेज आमतौर पर 2 लाख रुपये से 5 लाख रुपये या उससे ज्यादा तक हो सकते हैं. हेलीकॉप्टर पैकेज की कीमत और ज्यादा होती है. भारत सरकार द्वारा आयोजित यात्राएं कम खर्चीली हो सकती हैं, लेकिन इनमें लिमिटेड सीटें होती हैं. यहां जाने के लिए मेडिकल जांच, बीमा, परमिट चार्ज, रहने की जगह, खाना और ट्रेवल का खर्चा भी शामिल होता है.

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