CJP Protest: पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर दानिश कनेरिया ने भारत का बचाव करते हुए संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय की टिप्पणी पर सवाल उठाए हैं. कनेरिया ने दिल्ली में CJP के विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों की हिरासत पर संयुक्त राष्ट्र की चिंता की आलोचना की. उन्होंने पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के साथ कथित अत्याचारों का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि इन मामलों पर संयुक्त राष्ट्र कब आवाज उठाएगा. कनेरिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंसा का सामना कर रहे हिंदू अल्पसंख्यकों तथा चीन में उत्पीड़न का सामना कर रहे उइगर मुसलमानों के पक्ष में आवाज उठाने की मांग की.
दानिश कनेरिया यूएन मानवाधिकार आयोग को एक्स पर टैग करते हुए लिखा कि, ‘ UNHRC अपनी चुप्पी कब तोड़ेगा और पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंसा का सामना कर रहे हिंदू अल्पसंख्यकों और चीन में उत्पीड़न का सामना कर रहे उइगर मुसलमानों के पक्ष में कब आवाज उठाएगा?
When will @UNHumanRights break its silence and speak up for Hindu minorities facing violence in Pakistan and Bangladesh, and Uyghur Muslims facing persecution in China?
— Danish Kaneria (@DanishKaneria61) October 10, 2026
जानें क्या बोला UNHRC?
दिल्ली में शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ हुए सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने लोगों को हिरासत में लिया. इस दौरान पुलिस पर आरोप लग रहे हैं कि उन्होंने बच्चों के साथ मारपीट की और जबरदस्ती हिरासत में लिया. इस पर यूएन मानवाधिकार आयोग ने प्रतिक्रिया दी. आयोग ने कहा कि दिल्ली में आज हो रहे बड़े पैमाने पर प्रदर्शनों से पहले और उनके दौरान प्रदर्शनकारियों, प्रदर्शन के नेताओं, सिविल सोसाइटी संगठनों के सदस्यों, वकीलों और पत्रकारों को बड़ी संख्या में हिरासत में लिए जाने की खबरों से हमें चिंता है.
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प्रदर्शनकारियों के प्रति बहुत संयम बरतें
UNHRC ने कहा कि हम अधिकारियों से अपील करते हैं कि वे शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने के अधिकार का पूरा सम्मान करें और उसे सुनिश्चित करें. शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर लगाई जाने वाली पाबंदियां जरूरत और आनुपातिकता (Proportionality) की कड़ी कसौटी पर खरी उतरनी चाहिए. साथ ही भारतीय अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि कानून लागू करने वाली एजेंसियां शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के प्रति बहुत संयम बरतें, जो देश की लोकतांत्रिक परंपराओं और मानवाधिकारों से जुड़ी जिम्मेदारियों के अनुरूप हो. जिन लोगों को मनमाने ढंग से हिरासत में लिया गया है, उन्हें तुरंत और बिना किसी शर्त के रिहा किया जाना चाहिए. हम अधिकारियों से यह भी आग्रह करते हैं कि वे लोगों की व्यापक चिंताओं को दूर करने के लिए सार्थक बातचीत करें.
भारत ने दिया यूएन को जवाब
दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने पर संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय की टिप्पणी से भारत ने कड़ी नाराजगी जताई थी. भारत ने इसको आंतरिक हस्तक्षेप बताते हुए कहा कि भारत में शांतिपूर्ण आंदोलन का अधिकार भारतीय संविधान में सुरक्षित है और कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए भी व्यवस्था की गई है. MEA ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां पर बड़ी संख्या में एकत्र होने का अधिकार दिया जाता है. साथ ही देश में स्वतंत्र न्यायपालिका और मीडिया भी है, जो नागरिकों को अधिकारों का संरक्षण करती है.
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