Home Top News शेयर बाजार में कैसे करें निवेश? डीमैट अकाउंट से लेकर स्टॉक खरीदने तक, जानें आसान तरीका

शेयर बाजार में कैसे करें निवेश? डीमैट अकाउंट से लेकर स्टॉक खरीदने तक, जानें आसान तरीका

by Amit Dubey 1 August 2026, 3:48 PM IST (Updated 1 August 2026, 3:49 PM IST)
1 August 2026, 3:48 PM IST (Updated 1 August 2026, 3:49 PM IST)
Share Market Investment Guide

Share Market Investment Guide: भारतीय शेयर बाजार में आय दिन निवेशकों की संख्या बढ़ती जा रही है. स्टॉक एक्सचेंज NSE (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, मई 2026 तक, शेयर बाजार में 13 करोड़ (130 मिलियन) से ज्यादा यूनिक रजिस्टर्ड निवेशक और 25.7 करोड़ (257 मिलियन) से अधिक कुल क्लाइंट कोड ट्रेडिंग अकाउंट हो गए हैं.

रिपोर्ट बताती हैं कि शेयर बाजार में निवेश के लिए लोग डीमैट अकाउंट तो खोल लेते हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही एक्टिव तौर पर निवेश करते हैं. मतलब कि बाजार में रजिस्टर्ड निवेशकों की संख्या के हिसाब से यहां लगातार निवेश करने वालों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है. इसका साफ संकेत है कि लोगों को शेयर बाजार में निवेश करने के तरीके को और अच्छे से समझने की जरूरत है. बाजार में निवेश के लिए बुनियादी नॉलेज की बहुत ही जरूरत होती है. इसमें डीमैट अकाउंट खोलने से लेकर स्टॉक खरीदने तक जानकारी शामिल है.

अगर आप भी शेयर बाजार में निवेश करना चाहते हैं तो यह खबर आपके लिए खास हो सकती है. आइए बहुत ही आसान भाषा में समझते हैं कि अगर कोई व्यक्ति शेयर बाजार में निवेश शुरू करना चाहता है, तो उसे क्या-क्या करना होगा. हम इसके बारे में जानेंगे, लेकिन शुरुआत बीते कारोबारी सत्र यानी कि शुक्रवार को मार्केट की चाल से करेंगे.

शुक्रवार को कैसी थी बाजार की चाल?

शुक्रवार को शेयर बाजार के बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी लगातार तीसरे दिन बढ़त के साथ बंद हुए थे. ये तीन हफ्ते से ज्यादा के उच्चतम स्तर पर पहुंचे थे. इसकी वजह बजाज फाइनेंस में जबरदस्त तेजी और विदेशी फंड का आना था.

30 शेयरों वाला BSE सेंसेक्स 166.49 अंक या 0.21 प्रतिशत बढ़कर 78,094.64 पर बंद हुआ. इसमें 16 शेयर बढ़त के साथ और 14 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए. दिन के दौरान, यह 344.1 अंक या 0.44 प्रतिशत बढ़कर 78,272.25 तक पहुंच गया था. वहीं, 50 शेयरों वाला NSE निफ्टी 66.45 अंक या 0.27 प्रतिशत बढ़कर 24,383.60 के स्तर पर बंद हुआ था.

सेंसेक्स में शामिल शेयरों में, बजाज फाइनेंस में 8.11 प्रतिशत की तेजी आई. कंपनी ने गुरुवार को जून तिमाही (FY27) के लिए टैक्स के बाद कंसोलिडेटेड मुनाफे (PAT) में साल-दर-साल 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी की रिपोर्ट दी थी, जो 6,081 करोड़ रुपये रहा. यह बढ़ोतरी कोर इनकम में वृद्धि और एसेट क्वालिटी में सुधार के कारण हुई. बजाज फिनसर्व, महिंद्रा एंड महिंद्रा, अडानी पोर्ट्स, टाटा स्टील, रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और टाइटन भी बढ़त बनाने वाले शेयरों में शामिल थे.

वहीं, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इटरनल, इंफोसिस, ITC और इंटरग्लोब एविएशन गिरावट वाले प्रमुख शेयरों में शामिल थे. एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने गुरुवार को 3,623.51 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे.

पश्चिम एशिया में संघर्ष पर ब्रेक! रुपये को हुआ फायदा, डॉलर के मुकाबले कितनी मजबूत हुई भारतीय करेंसी?

धैर्य के साथ फैसला लेने की बात

न्यूज एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय शेयर बाजार में निवेश करना अब सिर्फ फाइनेंस के जानकारों या अनुभवी ट्रेडर्स तक ही सीमित नहीं है. कई नए निवेशक अब इक्विटी को बिजनेस की ग्रोथ में हिस्सा लेने, लंबे समय के लिए संपत्ति बनाने और अपने पैसे को मैनेज करने में ज्यादा सक्रिय भूमिका निभाने के एक जरिया के तौर पर देखते हैं.

फिर भी, बिना बुनियादी जानकारी के शुरुआत करने से उलझन हो सकती है. एक मजबूत शुरुआत के लिए जरूरी है कि आप बुनियादी बातें समझें, सही अकाउंट खोलें, जरूरी औपचारिकताएं पूरी करें और बाजार की हर हलचल पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय धैर्य के साथ फैसले लें.

निवेश के लिए तय करें लक्ष्य

शेयर बाजार में आपके निवेश का सफर एक साफ मकसद और टारगेट के साथ शुरू होना चाहिए. कुछ लोग लंबे समय में संपत्ति बनाने के लिए निवेश करते हैं, जबकि दूसरे लोग पढ़ाई, घर, रिटायरमेंट या भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के लिए योजना बनाते हैं. एक लक्ष्य आपके फैसलों को सही दिशा देता है और आपको सही निवेश के विकल्प चुनने में मदद करता है.

बिना किसी लक्ष्य के, बाजार की बातों या भावनाओं में बहकर फैसले लेना आसान तो होता है, लेकिन यह बहुत रिस्की भी हो जाता है. अपने लक्ष्य ऐसे रखें जो हकीकत के करीब हों, समय-सीमा से बंधे हों और आपकी आमदनी, बचत करने की क्षमता और जोखिम उठाने की आपकी इच्छा के मुताबिक हों.

डीमैट अकाउंट खोलने की बात

अब बात डीमैट अकाउंट या ट्रेडिंग अकाउंट की करेंगे. शेयरों में निवेश करने के लिए, आपको खरीद और बिक्री के ऑर्डर देने के लिए एक ट्रेडिंग अकाउंट और इलेक्ट्रॉनिक रूप में सिक्योरिटीज रखने के लिए एक डीमैट अकाउंट की जरूरत होती है. यह बैंकिंग से जुड़ा एक जरूरी कदम है क्योंकि फंड ट्रांसफर और सेटलमेंट के लिए आपके बैंक अकाउंट का इस्तेमाल होता है.

अकाउंट खोलने से पहले, चार्ज, अकाउंट की सुविधाओं, सर्विस सपोर्ट और इस्तेमाल में आसानी के बारे में पता कर लें. किसी रजिस्टर्ड मध्यस्थ (intermediary) को चुनें और अकाउंट की शर्तों को ध्यान से पढ़ें ताकि आप समझ सकें कि ट्रांजैक्शन, स्टेटमेंट और चार्ज कैसे काम करेंगे.

इन वजहों से बुधवार को 880 अंक उछला था शेयर बाजार, आज क्या है हाल? जानें सेंसेक्स और निफ्टी की चाल

केवाईसी की प्रक्रिया करें पूरी

अब बात केवाईसी की करेंगे. यह एक जरूरी प्रोसेस है जो निवेश करने से पहले आपकी पहचान और बेसिक जानकारी को वेरिफाई करता है. आपसे पहचान का सबूत, पते का सबूत, बैंक की जानकारी और टैक्स से जुड़ी जानकारी जैसे डॉक्यूमेंट्स मांगे जा सकते हैं. यह प्रोसेस निवेशकों की सुरक्षा में मदद करता है और सिक्योरिटीज मार्केट को ज्यादा पारदर्शी बनाता है.

पक्का करें कि आप जो जानकारी दे रहे हैं, वह सही और अपडेटेड हो. गलत जानकारी से बाद में ट्रांजैक्शन, पैसे निकालने, अकाउंट अपडेट करने या कंप्लायंस चेक के दौरान दिक्कतें आ सकती हैं. KYC को सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि सुरक्षा का एक कदम समझें.

जानें निवेश के अलग-अलग विकल्प

घरेलू शेयर बाजार में सिर्फ सीधे इक्विटी शेयर खरीदने से कहीं ज्यादा विकल्प मौजूद हैं. निवेश करने से पहले नए निवेशकों को उपलब्ध विकल्पों को समझना चाहिए. सीधे शेयर खरीदने से आप लिस्टेड कंपनियों में हिस्सेदारी खरीद सकते हैं, जबकि म्यूचुअल फंड (एसआईपी और लमसम) आपको कई तरह की सिक्योरिटीज (प्रतिभूतियों) के समूह में पेशेवर रूप से मैनेज किया गया निवेश करने का मौका देते हैं.

एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF), इंडेक्स-बेस्ड प्रोडक्ट और बाजार से जुड़े दूसरे इंस्ट्रूमेंट भी उपलब्ध हो सकते हैं. हर विकल्प अलग तरह से काम करता है, इसलिए जोखिम, लागत, लिक्विडिटी (नकदी में बदलने की आसानी), समय-सीमा और अपनी जानकारी के आधार पर उनकी तुलना करें.

रिस्क और रिटर्न की बात

न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, शेयर बाजार के हर निवेश में रिस्क होता है. बिजनेस के परफॉर्मेंस, आर्थिक हालात, ब्याज दरों, ग्लोबल घटनाओं और निवेशकों की सोच की वजह से शेयर मार्केट ऊपर या नीचे जा सकता है. ज्यादा रिटर्न की संभावना के साथ आमतौर पर ज्यादा अनिश्चितता भी जुड़ी होती है.

नए निवेशकों को इक्विटी को जल्दी मुनाफा कमाने का जरिया नहीं समझना चाहिए. समझदारी इसी में है कि आप उतना ही पैसा निवेश करें जिसे आप कुछ समय के लिए अलग रख सकें. निवेश करने से पहले खुद से पूछें कि क्या मार्केट गिरने पर आप शांत रह सकते हैं और घबराहट में शेयर बेचने से बच सकते हैं.

निवेश से पहले शेयर की कंपनी को जानें

अब बात निवेश के लिए शेयर्स और उनकी कंपनियों को समझने की करेंगे. शेयर खरीदने का मतलब है किसी बिजनेस का छोटा सा हिस्सा खरीदना, इसलिए बेसिक रिसर्च करना जरूरी है. देखें कि कंपनी क्या काम करती है, वह कैसे कमाई करती है, क्या उसकी मांग स्थिर है, और वह कॉम्पिटिशन का सामना कैसे करती है. आसान भाषा में फाइनेंशियल स्टेटमेंट, बिजनेस अपडेट, मैनेजमेंट की बातें और मार्केट की घोषणाएं पढ़ें.

सिर्फ इसलिए निवेश न करें कि कोई स्टॉक पॉपुलर है या किसी ने यूं ही उसकी सलाह दी है. अच्छी रिसर्च से रिस्क पूरी तरह खत्म नहीं हो सकता, लेकिन इससे आपको बेहतर जानकारी के साथ और भरोसेमंद फैसले लेने में मदद मिलती है.

Indian Currency: रुपये की मजबूती बरकरार, डॉलर के मुकाबले भारतीय करेंसी का 95.63 पर कारोबार

छोटे निवेश से कर सकते हैं शुरुआत

शेयर बाजार में निवेश की शुरुआत आप छोटे निवेश (कम से कम पैसे) से कर सकते हैं. जानकार भी इसकी ही सलाह देते हैं. शुरुआती निवेश में निवेशकों को सीखने की प्रक्रिया पर ध्यान देना चाहिए. छोटा निवेश आपको यह समझने में मदद करता है कि ऑर्डर कैसे दिए जाते हैं, कीमतें कैसे बदलती हैं, स्टेटमेंट कैसे मिलते हैं और भावनाएं फैसलों पर कैसे असर डालती हैं. इस तरीके से आपका आत्मविश्वास भी बढ़ता है और दबाव भी कम होता है.

शुरुआत में किसी एक स्टॉक में मोटा पैसा लगाने से बचें. जब आपको प्रैक्टिकल अनुभव हो जाए और आपकी समझ बेहतर हो जाए, तो आप अपने लक्ष्यों, आय की स्थिरता और जोखिम उठाने की क्षमता के आधार पर धीरे-धीरे अपना निवेश बढ़ा सकते हैं.

एक जगह ही नहीं लगाएं सारे पैसे

आप जब निवेश कर रहे हैं तो एक ही कंपनी के शेयर में पूरा पैसा न लगाएं, बल्कि थोड़ा-थोड़ा करके कई कंपनियों के शेयरों में निवेश कर सकते हैं. इससे आप अपने पोर्टफोलियो में विविधता ला सकते हैं और नुकसान का खतरा कम हो सकता है.

न्यूज एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, विविधता लाने (डाइवर्सिफिकेशन) का मतलब है कि आप अपने निवेश को किसी एक विकल्प पर निर्भर रखने के बजाय अलग-अलग कंपनियों, सेक्टर या निवेश उत्पादों में बांटें. इससे किसी एक निवेश के खराब प्रदर्शन का असर कम करने में मदद मिल सकती है.

उदाहरण के लिए, आपके पोर्टफोलियो में बड़ी और स्थापित कंपनियों, ध्यान से चुने गए फंड या आपकी समझ के आधार पर चुने गए सेक्टर का मिश्रण हो सकता है. विविधता लाने से जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं होता, लेकिन यह उसे बेहतर ढंग से संतुलित करता है. रैंडम तरीके से चुने गए शेयरों से बने पोर्टफोलियो की तुलना में, अच्छी तरह से फैला हुआ पोर्टफोलियो आमतौर पर मैनेज करना आसान होता है.

निवेश को ट्रैक और रिव्यू करें

न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, शेयर या फंड खरीदने के बाद निवेश का काम खत्म नहीं होता. आपको अपने पोर्टफोलियो को रेगुलर रिव्यू करना होता है ताकि यह पता चल सके कि क्या यह अभी भी आपके लक्ष्यों के अनुरूप है. कंपनी के परफॉर्मेंस, बड़े बिजनेस बदलावों, मार्केट की स्थितियों और अपनी वित्तीय जरूरतों की जांच करें.

हर कुछ मिनटों में कीमतें देखने से बचें, क्योंकि इससे बेवजह तनाव हो सकता है. एक समझदारी भरा रिव्यू आपको यह तय करने में मदद करता है कि निवेश को बनाए रखना है, उसमें और निवेश करना है, उसे कम करना है या उससे बाहर निकलना है. जानकारी रखना और अनुशासित रहना लंबे समय के निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण आदतों में से एक है.

Stock Market में उतार-चढ़ाव के बीच बजाज फाइनेंस का धमाका, पर IT शेयर्स ने बिगाड़ा सारा खेल

You may also like

LT logo

Feature Posts

Newsletter

@2026 Live Time. All Rights Reserved.

Are you sure want to unlock this post?
Unlock left : 0
Are you sure want to cancel subscription?