Cocktail 2 Movie Review: बॉलीवुड में जब भी रिश्तों, प्यार और दोस्ती की बात होती है, तो साल 2012 में रिलीज हुई फिल्म ‘कॉकटेल’ का नाम जरूर याद आता है. उस फिल्म ने प्यार और दोस्ती के बीच के इमोशन्स को बड़ी खूबसूरती के साथ पर्दे पर उतारा था. अब करीब 14 साल बाद आई ‘कॉकटेल 2’ उसी मैजिक को फिर से क्रिएट करने की कोशिश कर रही है. हालांकि, इस बार मामला थोड़ा अलग नजर आ रहा है.
इमोशनल अत्याचार
आपको टीवी का पुराना और पॉपुलर शो इमोशनल अत्याचार याद है? इस शो में पार्टनर लॉयल्टी का टेस्ट लिया जाता था. फिर पूरा ड्रामा सामने आता था. ‘कॉकटेल 2’ उसी का एक ग्लैमरस और बड़े बजट वाला वर्जन लगती है. फर्क सिर्फ इतना है कि यहां कैमरे के सामने आम लोग नहीं बल्कि शाहिद कपूर, कृति सेनन और रश्मिका मंदाना हैं. फिल्म की कहानी कुणाल यानी शाहिद कपूर और दीया यानी रश्मिका मंदाना के साथ शुरू होती है. दोनों पिछले 16 सालों से रिलेशनशिप में हैं. दोनों एक-दूसरे से प्यार करते हैं और शादी को सिर्फ एक लीगल फॉर्मेलिटी मानते हैं. उनकी लाइफ ठीक चल रही होती है, तभी एंट्री होती है एली यानी कृति सेनन की.

बदलने लगती हैं फीलिंग
एली का कैरेक्टर शुरू में कुणाल को अट्रैक्ट करने की कोशिश करता है. फिर धीरे-धीरे खुद उससे प्यार करने लगता है. यहीं से रिश्ते बदलना शुरू कर देते हैं. फिल्म प्यार, कमिटमेंट, अट्रैक्शन और मॉर्डन रिलेशनशिप्स की उलझनों पर बात करने की कोशिश करती है. हालांकि, ऑडियन्स इन कैरेक्टर्स से इमोशनली कनेक्ट नहीं हो पाती. यही वजह है कि ‘कॉकटेल 2’ कई सवाल उठाती है. जैसे, क्या बिना शादी के लंबे टाइम तक रिश्ते सक्सेसफुल रह सकते हैं? क्या रिश्तों में बहुत ज्यादा कंफर्ट बोरिंग हो जाता है? क्या सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स ने प्यार को लेकर हमारी उम्मीदें बदल दी हैं? क्या आज की जेनेरेशन कमिटमेंट से ज्यादा डरती है? लेकिन प्रोब्लम ये है कि फिल्म इन मुद्दों को गहराई से दिखाने की बजाय सिर्फ उन्हें टच करके आगे बढ़ जाती है.
पहली कॉकटेल का मैजिक
जहां सैफ अली खान, दीपिका पादुकोण और डायना पेंडी वाली ‘कॉकटेल ‘ में वेरोनिका जैसे कैरेक्टर की फीलिंग रीयल लगी थीं. वहीं, ‘कॉकटेल 2’ के कैरेक्टर्स बनावटी फील होते हैं. ऐसा लगता है जैसे वो अपने इमोशन के हिसाब से नहीं बल्कि स्क्रिप्ट की जरूरत के हिसाब से फैसले ले रहे हों. खैर, एक्टर तो वहीं, करेंगे जो डायरेक्टर कहता है. इसके अलावा फिल्म में सबसे ज्यादा निराश रश्मिका मंदाना का कैरेक्टर करता है. दीया को एक अनसेफ, शक करने वाली और जरूरत से ज्यादा कंट्रोल करने वाली गर्लफ्रेंड की तरह दिखाया गया है. वहीं, दूसरी तरफ कृति सेनन का कैरेक्टर ग्लैमरस, कॉन्फिडेंट और अट्रैक्टिव है. वैसे भी, कृति को फिल्म में ज्यादा अच्छे सीन्स मिले हैं. एली को पता है कि वो खूबसूरत है और लोगों पर उसका असर पड़ता है. लेकिन कई मौकों पर उसका कैरेक्टर जरूरत से ज्यादा सेल्फिश और चालाक हो जाता है.

शाहिद का जादू
फिल्म का सबसे दिलचस्प कैरेक्टर है कुणाल यानी शाहिद कपूर. कुणाल शायद इस कहानी का सबसे बैलेंस और पसंद करने लायक इंसान है. वो अपनी पार्टनर की परवाह करता है, रिश्ते को ऊपर रखता है. उसके लिए प्यार सिर्फ थ्रिल नहीं बल्कि रोज के छोटे-छोटे पलों में भी होता है. देखा जाए तो, ‘कॉकटेल 2’ का सबसे स्ट्रॉन्ग मैसेज भी यही है. टाइम के साथ रिलेशनशिप में एक्साइटमेंट कम हो सकता है, लेकिन प्यार वही होता है. इसके अलावा विजुअल्स की बात करें तो ‘कॉकटेल 2’ काफी खूबसूरत फिल्म है. सिसिली की लोकेशन्स पोस्टकार्ड जैसी सुंदर लगती हैं. गाने शानदार हैं, फैशन और स्टाइलिंग अट्रैक्टिव हैं. फिल्म का हर फ्रेम बड़े बजट की झलक देता है. मगर जहां फिल्म की आंखों को खुश करने वाली दुनिया मजबूत है, वहीं दिल को छू लेने वाली केमिस्ट्री कमजोर पड़ जाती है.
देखें या नहीं?
‘कॉकटेल 2’ एक ऐसी फिल्म है जो दिखने में बहुत खूबसूरत है, लेकिन उसके अंदर इमोशन्स की कमी लगती है. फिल्म खत्म होने के बाद आपको इसके गाने, लोकेशन्स और शानदार आउटफिट्स तो याद रहेंगे, लेकिन कहानी और कैरेक्टर्स शायद ज्यादा देर तक आपके साथ नहीं रह पाएंगे. हालांकि, अगर आप स्टाइलिश रोमांटिक ड्रामा और शानदार विजुअल्स के शौकीन हैं, तो ये फिल्म आपको पसंद आ सकती है. लेकिन अगर आप पहली वाली ‘कॉकटेल’ जैसी कहानी की उम्मीद लेकर जा रहे हैं, तो शायद आप थोड़ा निराश हो सकते हैं.
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