Hepatitis C: दुनिया में हेपेटाइटिस C जानलेवा बीमारियों में से एक है. मिस्र के बाद इंग्लैंड अब दुनिया में हेपेटाइटिस C को पूरी तरह खत्म करने वाले देशों में शामिल होने की राह पर है. नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) के अनुसार, इंग्लैंड में पिछले 10 वर्षों से जारी एक विशेष स्वास्थ्य कार्यक्रम के कारण यह बड़ी सफलता मिलने जा रही है. साल 2015 में नई एंटी वायरल दवाओं की शुरुआत के बाद से इंग्लैंड में 1 लाख से अधिक हेपेटाइटिस C मरीजों की पहचान कर उनका इलाज किया जा चुका है.
8 से 12 हफ्तों का मुफ्त इलाज
इस सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत मरीजों को 8 से 12 हफ्तों तक एंटी वायरल गोलियों का मुफ्त कोर्स दिया जाता है. स्वास्थ्य अधिकारियों का दावा है कि इस इलाज से 95 प्रतिशत से अधिक मामलों में मरीज पूरी तरह ठीक हो जाते हैं. यूके हेल्थ सिक्योरिटी एजेंसी (UKHSA) की डिप्टी डायरेक्टर डॉ. सीमा मंडल ने बताया कि साल 2015 के बाद से बड़े पैमाने पर की गई टेस्टिंग और आधुनिक इलाज की आसान पहुंच के कारण मामलों में तेजी से कमी आई है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक ऐतिहासिक प्रगति है.
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10 सालों में 1 लाख से ज्यादा लोगों का इलाज
सिर्फ़ 10 सालों में 1 लाख से ज़्यादा लोगों का इलाज करना एक बड़ी उपलब्धि है. यह इंग्लैंड को दुनिया के उन पहले देशों में से एक बनने के और करीब लाता है जो इस बीमारी को पब्लिक हेल्थ के लिए खतरा बनने से रोक देंगे. डिप्टी डायरेक्टर ने कहा कि भले ही वायरस से पीड़ित लोगों की संख्या लगातार कम हो रही है, लेकिन यह बहुत ज़रूरी है कि जिन लोगों को सबसे ज़्यादा खतरा है, उनकी टेस्टिंग की जाए ताकि नए संक्रमण को रोका जा सके. NHS ने इस हफ़्ते एक मुहिम को और तेज़ किया है.

इसमें उन लोगों से अपील की जा रही है जिन्हें हेपेटाइटिस C होने का ज़्यादा ख़तरा है, जैसे कि पूर्वी यूरोप के कुछ देशों से इंग्लैंड आए लोग, जिन्होंने विदेश में टैटू बनवाया हो, या जो इंजेक्शन से ड्रग्स लेते हैं या पहले लेते रहे हैं कि वे वायरस की जांच के लिए ऑनलाइन मुफ़्त और गोपनीय होम टेस्टिंग किट मंगवाएं. यूक्रेन, रोमानिया, एस्टोनिया, लातविया, पोलैंड, अल्बानिया, लिथुआनिया, बुल्गारिया, चेकिया या स्लोवाकिया में पैदा हुए लोगों से जांच कराने की अपील की जा रही है, क्योंकि उनमें से कई लोग 1991 से पहले, जब स्टेरिलाइज़ेशन के आधुनिक मानक लागू हुए थे , मेडिकल या डेंटल प्रक्रियाओं के दौरान संक्रमित हो सकते हैं.
लिवर ट्रांसप्लांट में आएगी कमी
UK की हेल्थ सेक्रेटरी यवेट कूपर ने कहा कि यह ठीक वैसी ही बचाव वाली और भविष्य को ध्यान में रखने वाली हेल्थ केयर है जिसे हम चाहते हैं कि NHS हर जगह लागू करे. जिससे लोगों की बीमारी का जल्दी पता लगे, अस्पतालों पर दबाव कम हो और लोगों को ज़्यादा समय तक स्वस्थ जीवन जीने का मौका मिले. NHS इंग्लैंड ने कहा कि हेपेटाइटिस C, जो कभी जानलेवा बीमारी मानी जाती थी, अब ठीक हो सकती है. अनुमान है कि असरदार इलाज से अगले दशक में लिवर ट्रांसप्लांट की ज़रूरत वाले लोगों की संख्या में 80 प्रतिशत की कमी आएगी, साथ ही लिवर कैंसर और सिरोसिस के मामलों में भी कमी आएगी.
हेपेटाइटिस C से लिवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी
NHS की नेशनल मेडिकल डायरेक्टर प्रोफ़ेसर फ्रेंकी स्वॉर्ड्स ने कहा कि हेपेटाइटिस C से लिवर फेलियर और कैंसर जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं, फिर भी कई लोग बिना जाने या बिना किसी लक्षण के सालों तक इसके साथ जीते रहते हैं, जब तक कि बहुत देर नहीं हो जाती. इसीलिए NHS ने पब्लिक हेल्थ टीमों और चैरिटी संस्थाओं के साथ मिलकर छिपे हुए मामलों का पता लगाने और उनका इलाज करने के लिए कड़ी मेहनत की है.
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यह वाकई बहुत अच्छी बात है कि सिर्फ़ एक दशक में 1 लाख से ज़्यादा लोगों को ऐसी चिकित्सा मिली है जिससे उनकी जान बच सकती है. चूंकि हेपेटाइटिस C के 10 में से 9 से ज़्यादा मामलों का इलाज संभव है, इसलिए हम उन सभी लोगों का पता लगाने और उनका इलाज करने के लिए प्रतिबद्ध हैं जिन्हें मदद की ज़रूरत है. हम ज़्यादा जोखिम वाले लोगों से अपील करते हैं कि वे आगे आएं और ऑनलाइन मुफ़्त और गोपनीय होम टेस्टिंग किट मंगवाएं.

एक वायरस है हेप C
प्रोफ़ेसर स्वॉर्ड्स ने कहा कि इंग्लैंड न सिर्फ़ इस बीमारी को खत्म करने के मिशन में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है, बल्कि 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस को पब्लिक हेल्थ के लिए खतरा न रहने देने के विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के लक्ष्य को हासिल करने की राह पर भी है. हेप C एक वायरस है जो लिवर को संक्रमित कर सकता है. अगर इसका इलाज न किया जाए, तो कभी-कभी यह लिवर को गंभीर और जानलेवा नुकसान पहुंचा सकता है. अक्सर इसके कोई साफ़ लक्षण तब तक दिखाई नहीं देते जब तक लिवर को काफ़ी नुकसान न हो चुका हो. इसका मतलब है कि कई लोगों को पता ही नहीं चलता कि उन्हें यह संक्रमण है.
मिस्र Hepatitis C खत्म करने वाला पहला देश
इंग्लैंड का दावा है कि वह दुनिया के उन चुनिंदा देशों में से एक है जिन्होंने सभी ज्ञात मामलों में से 80 प्रतिशत के इलाज के WHO के बेंचमार्क को पार कर लिया है. कहा कि पिछले 10 वर्षों में इस वायरस से होने वाली मौतों में 36 प्रतिशत की कमी आई है. मुफ़्त NHS होम टेस्टिंग पोर्टल को बिना डॉक्टर से बात किए टेस्ट करने के एक गोपनीय तरीके के तौर पर बनाया गया है. हेपेटाइटिस C को खत्म करने के रास्ते पर बढ़ने वाला दुनिया का पहला देश मिस्र (Egypt) है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अक्टूबर 2023 में आधिकारिक तौर पर मिस्र को Hepatitis C के उन्मूलन की राह पर अभूतपूर्व प्रगति के लिए ‘गोल्ड टियर’ (Gold Tier) का दर्जा दिया था.
इंग्लैंड का स्थान और वर्तमान स्थिति
- शीर्ष देशों में शामिल: इंग्लैंड आधिकारिक तौर पर Hepatitis C को पूरी तरह खत्म करने वाला पहला देश तो नहीं है, लेकिन यह दुनिया के उन चुनिंदा शुरुआती देशों में शामिल होने की कगार पर है जो इस वायरस को पूरी तरह समाप्त करने वाले हैं.
- ग्लोबल लीडर: इंग्लैंड के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में इंग्लैंड इस बीमारी को खत्म करने के मिशन में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है.
- WHO के लक्ष्य से आगे: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसके उन्मूलन के लिए 2030 का लक्ष्य रखा है, लेकिन इंग्लैंड इस लक्ष्य को समय से पहले ही हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.
मुख्य उपलब्धियां: इंग्लैंड ने अपने 80% ज्ञात मामलों के इलाज का लक्ष्य पहले ही पूरा कर लिया है और पिछले एक दशक में इस वायरस से होने वाली मौतों में 36% की कमी दर्ज की गई है. यहां 2015 से अब तक 1 लाख से अधिक लोगों का सफल इलाज किया जा चुका है.
मिस्र की ऐतिहासिक सफलता
एक समय ऐसा था जब मिस्र में दुनिया के सबसे अधिक हेपेटाइटिस C के मामले थे. लेकिन अपनी ‘100 Million Healthy Lives’ जैसी विशाल राष्ट्रीय स्क्रीनिंग और मुफ्त इलाज मुहिम के जरिए उन्होंने सिर्फ एक दशक के भीतर इस खतरनाक वायरस को लगभग नामोनिशान मिटाने के स्तर तक पहुंचा दिया.
भारत में हेपेटाइटिस C की स्थिति
भारत भी वैश्विक स्तर पर इस बीमारी को हराने के लिए ठोस कदम उठा रहा है, लेकिन यहां कुछ चुनौतियां भी हैं.
- मुफ्त राष्ट्रीय कार्यक्रम: भारत सरकार ने साल 2018 में नेशनल वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम (NVHCP) लॉन्च किया था. इसके तहत देश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में हेपेटाइटिस C की जांच और इलाज (दवाएं) पूरी तरह मुफ्त दी जाती हैं.
- सस्ती जेनेरिक दवाएं : भारत दुनिया में जीवन रक्षक जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा उत्पादक है. भारत में बनने वाली सस्ती दवाओं के कारण ही मिस्र जैसे देशों ने अपने यहां महामारी को खत्म किया है.
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- सबसे बड़ी चुनौती: स्वास्थ्य विशेषज्ञों और WHO 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सबसे बड़ी समस्या दवाइयों की कमी नहीं, बल्कि जांच की कमी है. लाखों लोग इस वायरस के साथ जी रहे हैं लेकिन वे इसके लक्षणों से अनजान हैं और उनकी जांच नहीं हो पाती.
- जीनोटाइप 3: भारत में हेपेटाइटिस C का ‘जीनोटाइप 3’ सबसे ज्यादा पाया जाता है, जो लिवर को तेजी से नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए समय पर जांच और इलाज बेहद जरूरी है.
हेपेटाइटिस C के लक्षण
हेपेटाइटिस C को अक्सर एक ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है क्योंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, संक्रमित होने के बाद कई हफ्तों, महीनों या दशकों तक मरीज में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते. लक्षण आमतौर पर वायरस के शरीर में जाने के 2 से 24 हफ्तों के भीतर उभरते हैं.
शुरुआती लक्षण
- लगातार बहुत ज्यादा थकान और कमजोरी महसूस होना.
- अचानक भूख न लगना, उल्टी या जी मिचलाना.
- पेट के दाहिने हिस्से (लिवर की जगह) में दर्द और जोड़ों में दर्द होना.
- पेशाब का रंग गहरा और मल का रंग मिट्टी जैसा पीला होना
- पीलिया (Jaundice) होना यानी त्वचा और आंखों का पीला पड़ना.
गंभीर लक्षण: जब यह बीमारी पुरानी हो जाती है, तो बिना किसी लक्षण के धीरे-धीरे लिवर को सड़ा देती है (लिवर सिरोसिस या कैंसर), जिसके बाद पेट में पानी भरना , पैरों में सूजन और वजन कम होने जैसे गंभीर लक्षण दिखते हैं.

कैसे फैलता है हेपेटाइटिस C?
- असुरक्षित इंजेक्शन: अस्पताल या क्लिनिक में संक्रमित सुई/सिरिंज का दोबारा इस्तेमाल करना या नशा करने वाले लोगों द्वारा एक-दूसरे की सुई शेयर करना.
- असुरक्षित टैटू या पियर्सिंग: अनस्टेरलाइज्ड (बिना साफ किए गए) उपकरणों से टैटू बनवाना या कान-नाक छिदवाना.
- खून चढ़ाना: बिना जांच किए हुए संक्रमित खून या ब्लड प्रोडक्ट्स को शरीर में चढ़वाना.
- निजी वस्तुएं शेयर करना: संक्रमित व्यक्ति के रेज़र, टूथब्रश या नेल कटर का इस्तेमाल करना (यदि उनमें सूक्ष्म खून लगा हो).
- मां से बच्चे में: प्रसव के दौरान संक्रमित मां से नवजात शिशु में वायरस फैल सकता है.
नोट: यह बीमारी छूने, गले मिलने, चूमने, खांसने, छींकने या साथ में खाना-पानी शेयर करने से बिल्कुल नहीं फैलती है.
