Forgotten Indian Breakfast: आज की भागदौड़ भरी लाइफ में सुबह का मतलब अक्सर ब्रेड, टोस्ट या सैंडविच बनकर रह गया है. लेकिन एक टाइम ऐसा भी था, जब भारतीय घरों की सुबह फैक्ट्री में बनी ब्रेड से नहीं, बल्कि मिट्टी की खुशबू, देसी अनाज और ट्रेडिशनल खाने से महकती थी. हर स्टेट का अपना अलग नाश्ता था, जो सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि हेल्थ, टेस्ट और कल्चर का कॉम्बिनेशन हुआ करता था. चावल, बाजरा, ज्वार, दाल, दही, गुड़ और घी जैसी सिंपल चीजों से बनने वाले ये नाश्ते दिनभर एनर्जी देते थे. टाइम के साथ इनकी जगह ब्रेड और प्रोसेस्ड फूड ने ले ली. आज हम आपके लिए भारत के उन्हीं ट्रेडिशनल नाश्तों की लिस्ट लेकर आए हैं.
जोल्पान-असम
असम की सुबह जोल्पान के बिना अधूरी मानी जाती थी. इसमें फूला हुआ चावल, चूड़ा या कुटा हुआ चावल गर्म दूध और गुड़ के साथ परोसा जाता था. खासतौर पर बिहू के दौरान. ये सिंपल नाश्ता टेस्ट और हेल्थ दोनों का बढ़िया कॉम्बो था.
दही-चूड़ा-बिहार
बिहार का दही-चूड़ा आज भी अपनी अलग पहचान रखता है. चूड़ा, दही, दूध, गुड़ और सीजनल फ्रूट्स से तैयार ये नाश्ता गर्मियों में ठंडक देने के साथ बॉडी को एनर्जी भी देता था. बिना ज्यादा मेहनत के तैयार होने वाला ये खाना गांव के लोगों के लिए सूपर फूड हुआ करता था.
वेन पोंगल- तमिलनाडु
तमिलनाडु का वेन पोंगल चावल और मूंग दाल से बनाया जाता है. इसमें राई, अदरक और हींग का तड़का लगाया जाता है, जो इसे अलग टेस्ट देता है. ये सॉफ्ट और लाइट नाश्ता ठंडी सुबहों में बॉडी को गर्माहट और पेट को सुकून देता था.
हांडवो-गुजरात
गुजरात का हांडवो घरों की रसोई का छुपा हुआ हीरा माना जाता है. चावल और दाल के खमीर वाले घोल में सब्जियां मिलाकर इसे बनाया जाता है. बाहर से कुरकुरा और अंदर से नरम ये डिश स्वाद के साथ डाइजेशन के लिए भी बढ़िया है.
रोगनी रोटी और आलू की कतली-अवध
अवध के शाही खानपान में रोगनी रोटी और मसालेदार आलू की कतली की खास जगह थी. मलाई और घी से बनी ये रोटी किसी शाही दावत से कम नहीं लगती थी. ये नाश्ता खास मौकों और मेहमाननवाजी की पहचान माना जाता था.
झुनका-भाकरी-महाराष्ट्र
महाराष्ट्र में ज्वार, बाजरा, रागी या चावल के आटे से बनी भाकरी को बेसन से तैयार झुनका के साथ खाया जाता था. फाइबर से भरा ये नाश्ता लंबे टाइम तक पेट भरा रखता था. आज जब हाई-प्रोटीन डाइट का ट्रेंड है, तब भी ये ट्रे़डिशनल डिश किसी सुपरफूड से कम नहीं मानी जाती.
पीठा और पातिशप्ता-बंगाल
बंगाल और ईस्ट इंडिया में सर्दियों की सुबह पीठा और पातिशप्ता के बिना अधूरी मानी जाती थी. चावल के आटे से बने इन पकवानों में नारियल और गुड़ की स्टफिंग होती थी. पूरी फैमिली के साथ मिलकर इन्हें बनाना सिर्फ खाना पकाना नहीं, बल्कि एक ट्रेडिशन निभाने जैसा था.
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