Most Peaceful Countries: आज की दुनिया पहले से कहीं ज्यादा मॉर्डन हो चुकी है. लेकिन इसके साथ ही वॉर, पॉलिटिकल स्ट्रेस, बॉर्डर कंट्रोवर्सी, टेररिज्म और सोशल चैलेंजेस भी लगातार बढ़ रहे हैं. ऐसे माहौल में हर इंसान ऐसी जगह पर रहना चाहता है जहां सिक्योरिटी हो, स्टेबिलिटी हो और लाइफ में सुकून हो. यही वजह है कि हर साल जारी होने वाली ग्लोबल पीस इंडेक्स (GPI) रिपोर्ट दुनियाभर में काफी चर्चा में बनी रहती है. ये रिपोर्ट बताती है कि दुनिया के कौन-से देश सबसे पीसफुल हैं और किन देशों में हालात सबसे ज्यादा परेशान करने वाले हैं. साल 2026 की रिपोर्ट भी कई दिलचस्प और हैरान करने वाले आंकड़े लेकर आई है. कुछ देशों ने अपनी हालत मजबूत की है. वहीं, कई देशों की रैंकिंग में गिरावट आई है. सिडनी की इंडिपेंडेंट रिसर्च ऑर्गेनाइजर इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (IEP) हर साल ये रिपोर्ट जारी करती है. संस्था 2007 से लगातार दुनिया के 163 देशों की स्टडी कर रही है. ये अलग-अलग सोशल, पॉलिटिकल और सिक्योरिटी संबंधी स्टैंडर्स के बेस पर उनकी रैंकिंग तय करती है.
लगातार घटती शांति
2026 की रिपोर्ट में काफी परेशान करने वाली है. दरअसल, ग्लोबल लेवल पर शांति में लगातार 12वें साल गिरावट आई है. रिपोर्ट के मुताबिक, 163 देशों में से 99 देशों की सिचुएशन पिछले साल के मुकाबले खराब हुई है. इतना ही नहीं, 119 देश ऐसे हैं जो पहले से खराब हालत में हैं. दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ते स्ट्रगल, रीजनल वॉर, पॉलिटिकल ड्रामा और इंटरनेशनल टेंशन इस गिरावट की बड़ी वजह हैं. रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि पहले जहां वॉर और स्ट्रगल अक्सर शांति समझौतों के जरिए खत्म हो जाती थीं, लेकिन अब ऐसा कम ही होता है. 1970 के दशक में लगभग 23 प्रतिशत लड़ाई शांति समझौतों के जरिए खत्म होते थे. वहीं, 2010 के दशक में ये आंकड़ा घटकर करीब 4 प्रतिशत रह गया.

ग्लोबल पीस इंडेक्स
कई लोगों को लगता है कि किसी देश की शांति सिर्फ क्राइम रेट से तय होती है, लेकिन ग्लोबल पीस इंडेक्स की इवैल्यूएशन इससे कहीं ज्यादा बड़ी है. ऐसे में रिपोर्ट तैयार करते हुए 23 अलग-अलग इंडीकेटर्स पर फोकस किया जाता है. इन्हें 3 सेक्शन्स में बांटा गया है.
- सोशल सिक्योरिटी और स्टेबिलिटी
इसमें देखा जाता है कि देश में क्राइम का लेवल कितना है. वायलेट प्रोटेस्ट कितनी बार होते हैं, जेलों में बंद लोगों की संख्या कितनी है. इसके अलावा आम जनता अपने देश को कितना सेफ मानती है.
- डोमेस्टिक और इंटरनेशनल कॉन्फ्लिक्ट
इस कैटेगरी में ये देखा जाता है कि कोई देश कितने इंटरनर और बाहरी कॉन्फ्लिक्ट में कितना शामिल है. इस वजह से कितने लोगों ने अपनी जान गवाई है.
- सेना की पावर
इसमें ये देखा जाता है कि देश अपने डिफेंस या मिलिट्री बजट पर कितना खर्च करता है. हथियारों का इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट कितना है. साथ ही सेना में काम करने वाले लोग कितने हैं.
इन सभी स्टैंडर्स के बेस पर देशों को 1 से 5 के बीच स्कोर दिया जाता है. जितना कम स्कोर होगा, देश उतना ही ज्यादा पीसफुल माना जाएगा.
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भारत की रैंकिंग?
भारत इस साल 163 देशों की लिस्ट में 127वें नंबर पर है. पिछले साल की तुलना में भारत 3 नंबर नीचे खिसक गया है. रिपोर्ट के अनुसार भारत की रैंकिंग में गिरावट की बड़ी वजह पाकिस्तान और म्यांमार के साथ बढ़ा तनाव है. साथ ही मणिपुर की हिंसा भी इसकी वजह है. वैसे, पूरे साउथ एशिया में भी इस साल शांति के लेवल में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई है. इस इलाकों में शांति 2.3 प्रतिशत कम हुई. नेपाल और पाकिस्तान की रैंकिंग में आई गिरावट इसकी बड़ी वजह रही. हालांकि, भूटान इस जगह का सबसे पीसफुल देश बना हुआ है. इस लिस्ट में उसका 16वां नंबर है. अब उन 10 देशों के बारे में जानते हैं, जो 2026 में दुनिया की सबसे पीसफुल कंट्रीज की लिस्ट में शामिल हैं.
जापान
स्कोर: 1.489
जापान इस साल तीन नंबर ऊपर चढ़कर टॉप 10 में पहुंचा है. एशिया के सबसे विकसित देशों में शामिल जापान डिसिप्लिन, सिक्योरिटी और सोशल सिस्टम के लिए जाना जाता है. यहां क्राइम रेट बहुत कम है. साथ ही पब्लिक लाइफ काफी ऑर्गेनाइज है. ट्रेनें टाइम पर चलती हैं, लोग रूल्स फॉलो करते हैं और सरकारी ऑफिसों पर लोगों का भरोसा मजबूत है. यही वजह है कि जापान दुनिया के सबसे सेफ देशों में गिना जाता है. सोलो ट्रेवल करने वाले टूरिस्टों के लिए भी ये दुनिया के सबसे फेवरेट देशों में से एक है.

फिनलैंड
स्कोर: 1.478
फिनलैंड सिर्फ हैप्पी देशों की लिस्ट में ही नहीं, बल्कि सबसे पीसफुल देशों की लिस्ट में भी लगातार टॉप पर बना रहता है. यहां की सरकार ट्रांसपेरेंट है और लोगों का एक-दूसरे पर भरोसा भी है. हेल्थ, एजुकेशन और सोशल सिक्योरिटी के लिहाज़ से भी ये जगह बहुत अच्छी है. फिनलैंड की लाइफस्टाइल भी स्ट्रेस फ्री मानी जाती है. नेचर के करीब रहना, काम और प्राइवेट लाइफ के बीच बैलेंस बनाए रखना और सोशल इक्वेलिटी इस देश की सबसे बड़ी ताकत हैं.
सिंगापुर
स्कोर: 1.435
सिंगापुर भले ही साइज में छोटा हो, लेकिन सिक्योरिटी, लॉ एंड ऑर्डर के मामले में दुनिया के सबसे मजबूत देशों में शामिल है. यहां क्राइम रेट बहुत कम है. यहां रहने वाले लोग रूल्स को सख्ती से फॉलो करते हैं. शहर की साफ-सफाई, मॉर्डन इंफ्रास्ट्रक्चर और पॉलिटिकल स्टेबिलिटी इसे रहने और घूमने के लिए आइडल बनाते हैं. सिंगापुर की सबसे बड़ी खासियत ये है कि यहां इंटरनल कॉन्फ्लिक्ट लगभग न के बराबर हैं.
पुर्तगाल
स्कोर: 1.427
पुर्तगाल पिछले कुछ सालों में तेजी से दुनिया के सबसे पीसफुल देशों में शामिल हुआ है. साल 2014 में ये 18वें नंबर पर था, लेकिन अब टॉप 10 में अपनी मजबूत जगह बना चुका है. कम क्राइम रेट्स, फाइनेंशियल इम्प्रूवमेंट और कंफर्टेबल लाइफस्टाइल इस देश की पॉपुलैरिटी को बढ़ाने में बड़ा रोल प्ले कर रही है. यूरोप का ये खूबसूरत देश अपने खूबसूरत बीच, पुराने शहरों और पीसफुल एनवायरमेंट की वजह से टूरिस्ट्स के बीच भी खूब पॉपुलर है.
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ऑस्ट्रिया
स्कोर: 1.421
ऑस्ट्रिया लंबे टाइम से दुनिया के सबसे सेफ और पीसफुल देशों में शामिल रहा है. यहां का बिजनेस एनवायरमेंट काफी स्ट्रॉन्ग है. इसके अलावा अपने पड़ोसी देशों के साथ ऑस्ट्रिया के रिश्ते भी काफी अच्छे हैंय. रिच कल्चर वाला ये देश अपनी खूबसूरत वादियों, म्यूज़िक ट्रेडिशन और हाई स्टैंडर्स ऑफ लिविंग के लिए भी फेमस है. हालांकि यूरोप में बढ़ते सैन्य खर्च का असर यहां भी दिखाई दे रहा है, फिर भी ये देश इस लिस्ट में मजबूत से टिका हुआ है.
आयरलैंड
स्कोर: 1.371
आयरलैंड इस साल एक नंबर नीचे जरूर आया है, लेकिन अब भी दुनिया के टॉप 5 पीसफुल देशों में शामिल है. आज का आयरलैंड फाइनेंशियल स्ट्रॉन्ग, सोशयली स्टेबल और पॉलिटिकली बैलेंस्ड माना जाता है. हैरानी की बात ये है कि एक टाइम पर ये देश लंबे स्ट्रगल के लिए जाना जाता था, लेकिन आज ये पीस और ग्रोथ का एग्जाम्पल बन चुका है.

स्लोवेनिया
स्कोर: 1.369
स्लोवेनिया ने इस साल दो नंबर की छलांग लगाई है. 1991 में आज़ाद होने वाला ये देश आज यूरोप की सबसे सेफ कंट्रीज में गिना जाता है. यहां क्राइम रेट काफी कम है और आतंकवाद का खतरा लगभग ना के बराबर है. खूबसूरत झीलों, पहाड़ों और नेचुरल ब्यूटी से भरपूर ये देश धीरे-धीरे टूरिस्ट्स के बीच भी पॉपुलर हो रहा है.
स्विट्जरलैंड
स्कोर: 1.363
स्विट्जरलैंड का नाम आते ही लोगों के दिमाग में यश चोपड़ा की फिल्मों के सीन घूमने लगते हैं. इसके अलावा यहां के खूबसूरत बर्फीले पहाड़, साफ-सुथरे शहर और शानदार लाइफस्टाइल की भी याद आ जाती है. लेकिन इस देश की असली ताकत इसकी लंबे टाइम से चली आ रही न्यूट्रल पॉलिसी है. ये देश बाहर की प्रोब्लम्स से खुद को दूर रखता आया है. हाई इनकम, स्ट्रॉन्ग इकोनॉमी और कम क्राइम रेट इसे लगातार दुनिया के सबसे पीसफुल देशों में बनाए रखते हैं.
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न्यूजीलैंड
स्कोर: 1.343
न्यूजीलैंड ने इस साल दूसरा नंबर हासिल किया है. ये देश अपनी नेचुरल ब्यूटी, पीसफुल माहौल और बढ़िया क्वालिटी ऑफ लाइफ के लिए दुनिया भर में मशहूर है. यहां क्राइम रेट बहुत कम है. इसके अलावा यहां की सरकार भी काफी ट्रांसपेरेंट तरीके से काम करती है.
दुनिया के की कॉन्फ्लिक्ट जोन से इस देश की दूरी भी इसे और सिक्योर बनाती है.

आइसलैंड
स्कोर: 1.161
लगातार 19वें साल आइसलैंड दुनिया का सबसे पीसफुल देश बना हुआ है. ये उपलब्धि अपने आप में काफी बड़ी है. आइसलैंड की पॉपुलेशन कम है, क्राइम रेट बहुत ही ज्यादा कम है और यहां स्थायी सेना भी नहीं है. यूरोप में सबसे कम कैदियों वाले देशों में शामिल आइसलैंड सोशल ट्रस्ट और सामुदायिक सहयोग के लिए जाना जाता है. साथ ही इसका बॉर्डर किसी और देश के साथ नहीं लगता, जिससे कई सिक्योरिटी चैलेंज खुद ही कम हो जाते हैं. ऐसे समय में जब दुनिया के कई हिस्से वॉर, स्ट्रेस और वायलेंस को झेल रहे हैं, तब आइसलैंड शांति, स्टेबिलिटी और अच्छी लाइफ का शानदार एग्जाम्पल बनकर सामने आता है.
क्या सिखाती है रिपोर्ट?
ग्लोबल पीस इंडेक्स 2026 सिर्फ देशों की रैंकिंग नहीं बताता, बल्कि ये भी दिखाता है कि शांति सिर्फ वॉर न होने का नाम नहीं है. बेहतर एजुकेशन, मजबूत संस्थाएं, सोशल इक्वालिटी, कम क्राइम और लोगों का एक-दूसरे पर भरोसा भी किसी देश को पीसफुल बनाते हैं. दुनिया के सबसे पीसफुल देशों की ये लिस्ट हमें बताती है कि प्रोग्रेस और पीस एक-दूसरे के एंटी नहीं, बल्कि सप्लीमेंट्स हैं. जिन देशों ने अपने लोगों की सिक्योरिटी, इक्वालिटी और क्वालिटी ऑफ लाइफ पर ध्यान दिया, वो आज दुनिया के सबसे बेहतर देशों में गिने जाते हैं. यही वजह है कि ये देश न सिर्फ रहने के लिए बेहतरीन माने जाते हैं, बल्कि हर साल लाखों टूरिस्ट्स को भी अपनी तरफ अट्रैक्ट करते हैं. शांति, सिक्योरिटी और हैप्पी लाइफ की तलाश में दुनिया की नजरें आज भी इन्हीं देशों पर टिकी हुई हैं.
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