Home लाइफस्टाइल आखिर क्यों इस देश की राजधानी कहलाती है दुनिया की Momo Capital? जानें स्वादिष्ट स्नैक की असली कहानी

आखिर क्यों इस देश की राजधानी कहलाती है दुनिया की Momo Capital? जानें स्वादिष्ट स्नैक की असली कहानी

by Preeti Pal 29 July 2026, 2:40 PM IST (Updated 29 July 2026, 3:46 PM IST)
29 July 2026, 2:40 PM IST (Updated 29 July 2026, 3:46 PM IST)
आखिर क्यों इस देश को कहा जाता है दुनिया का Momo Capital? जानें सबकी फेवरेट इस स्वादिष्ट डिश की दिलचस्प कहानी

Momo Capital of the World: आज-कल कंफर्ट फूड के नाम पर लोग स्ट्रीट फूड को काफी ज्यादा पसंद कर रहे हैं. ऐसे में अगर आप स्ट्रीट फूड के शौकीन हैं, तो यकीनन मोमो आपके फेवरेट स्नैक्स की लिस्ट में जरूर होगा. गर्मागर्म भाप में पके मोमो, तीखी चटनी और मसालेदार फ्लेवर का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के मुंह में पानी आ जाता है. भारत, नेपाल, भूटान और तिब्बत से लेकर दुनिया के कई देशों तक मोमो ने अपनी खास पहचान बना ली है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पूरी दुनिया में एक ऐसा शहर भी है, जिसे ‘मोनो कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड’ यानी दुनिया की मोमो राजधानी कहा जाता है? ये शहर ज्यादा दूर नहीं, बल्कि हमारे पड़ोसी देश नेपाल में है. दरअसल, नेपाल की राजधानी काठमांडू को मोमो राजधानी कहते हैं. यहां मोमो सिर्फ एक लोकप्रिय स्नैक नहीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, संस्कृति और खानपान का बड़ा और अहम हिस्सा बन चुका है. अगर आप कभी काठमांडू जाएं तो आपको शायद हर गली, हर बाजार और हर मोड़ पर मोमो की बढ़िया खुशबू महसूस होगी.

काठमांडू और मोमो का रिश्ता

नेपाल की राजधानी काठमांडू में मोमो का क्रेज किसी त्योहार से कम नहीं है. यहां हजारों छोटे-बड़े रेस्टोरेंट, कैफे और स्ट्रीट फूड स्टॉल सिर्फ मोमो ही बेचते हैं. यानी लाखों लोगों का घर सिर्फ इसी स्नैक की वजह से चलता है. माना जाता है कि इस शहर में करीब 8,000 से ज्यादा मोमो की दुकानें और रेस्टोरेंट हैं. यही वजह है कि काठमांडू को दुनिया की मोमो राजधानी कहा जाता है. दिलचस्प बात ये है कि यहां मोमो सिर्फ शाम के स्नैक तक ही सीमित नहीं है. आपको जानकर हैरानी होगी कि नेपाल के लोग इसे नाश्ते, दोपहर के खाने, शाम की भूख और यहां तक कि रात के डिनर में भी बड़े चाव से खाते हैं. नेपाल के रास्ते भारत पहुंचा ये स्नैक आज हर गली, नुक्कड़ और मॉल का सबसे लोकप्रिय स्ट्रीट फूड बन चुका है.

तिब्बत से शुरू हुआ सफर

वैसे, मोमो की कहानी तिब्बत से शुरू होती है. माना जाता है कि ये डिश सबसे पहले तिब्बत में बनाई गई थी. कहा जाता है कि अब से लगभग 600 साल पहले तिब्बत में ठंड और कम खाने की वजह से इस स्नैक को बनाया गया था. ठंडे मौसम और खाने की कमी के बीच लोगों ने मैदे या आटे की पतली लोई में मांस भरकर भाप में पकाना शुरू किया. इससे कम सामान में पेट भर जाता था. तिब्बती भाषा में इस स्नैक को ‘मोग मोग’ कहा जाता था. तिब्बत से व्यापार और सांस्कृतिक संबंधों के जरिए ये डिश नेपाल तक पहुंची. वैसे भी, काठमांडू की भौगोलिक स्थिति तिब्बत के काफी करीब रही, इसलिए यहां मोमो ने बहुत जल्दी अपनी जगह बना ली. समय के साथ नेपाल के स्थानीय समुदायों ने इसमें अपने स्वाद और मसालों का तड़का लगाया. खासतौर पर काठमांडू घाटी के नेवारी समुदाय ने मोमो को नया रूप दिया. उन्होंने अलग-अलग फिलिंग, मसालों और खास चटनियों के जरिए इसे पूरी तरह नेपाली अंदाज में ढाल दिया. आज काठमांडू का मोमो तिब्बती मोमो से काफी अलग है. फिर 1950 और 1960 के दशक में तिब्बती शरणार्थियों के साथ ये भारत आया. तब भारत के पहाड़ी और उत्तर-पूर्वी राज्यों जैसे दार्जिलिंग, सिक्किम, धर्मशाला और दिल्ली में मोमो की एंट्री हुई. हालांकि, शुरुआत में इसमें सिर्फ मांस यानी याक या पोर्क की फिलिंग की जाती थी. फिर भारत आने के बाद यहां के लोगों की पसंद के हिसाब से इसमें सब्जियां और पनीर भी भरा जाने लगा.

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हर स्वाद का मोमो

अगर आपको लगता है कि मोमो सिर्फ स्टीम्ड होते हैं, तो काठमांडू जाकर आपकी सोच पूरी तरह बदल जाएगी. यहां मोमो की इतनी वैरायटी मिलती है कि पहली बार आने वाला कोई भी व्यक्ति समझ ही नहीं पाता कि कौन सा ऑर्डर करे.

स्टीम्ड मोमो

ये सबसे क्लासिक और पारंपरिक मोमो है. मुलायम आटे या मैदे में भरी स्वादिष्ट फिलिंग और साथ में तीखी चटनी इसका असली स्वाद बढ़ाती है.

झोल मोमो

नेपाल की सबसे लोकप्रिय वैरायटी में से एक है झोल मोमो. इसमें मोमो को मसालेदार ग्रेवी या सूप जैसी चटनी में डिप करके परोसा जाता है. टमाटर, तिल, मूंगफली और मसालों से तैयार ये झोल वाकई में बहुत टेस्टी होता है. नेपाल जाने वाले टूरिस्ट झोल मोमो का स्वाद चखना मिस नहीं करते.

सी मोमो

अगर आपको मसालेदार खाना पसंद है तो सी मोमो आपके लिए ही है. सी मोमो को चिली मोमो भी कहा जाता है. इसमें स्टीम्ड या फ्राइड मोमो को प्याज, शिमला मिर्च और तीखी लाल चटनी के साथ तेज आंच पर पकाया जाता है. तीखा पसंद करने वाले लोग चिली मोमो के दीवाने हैं.

कोथे मोमो

अगर आपने अब तक सिर्फ स्टीम्ड मोमो या फ्राइड मोमो ही खाए हैं, तो एक बार कोथे मोमो ट्राई करके देखें. ये आधा स्टीम्ड और आधा फ्राइड होता है. यही वजह है कि कोथे मोमे नीचे से हल्के कुरकुरे और ऊपर से मुलायम होते हैं. यही कोथे मोमो की सबसे बड़ी खासियत है.

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फ्राइड मोमो

डीप फ्राई किए गए ये मोमो बाहर से बहुत ही कुरकुरे और अंदर से काफी ज्यादा जूसी होते हैं. इन मोमो को बच्चों से लेकर बड़ों तक, सभी पसंद करते हैं.

ओपन मोमो

ओपन मोमो मॉडर्न स्टाइल का मोमो है. इसमें ऊपर से तरह-तरह की सॉस, चीज, मेयो और गार्निशिंग की जाती है. नई जेनेरेशन को ओपन मोमो काफी ज्यादा पसंद आ रहे हैं. इसके अलावा सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें खूब वायरल होती हैं.

फिलिंग भी कमाल की

नेपाल की राजधानी काठमांडू में आपको हर तरह की फिलिंग वाले मोमो आसानी से मिल जाएंगे. जैसे, चिकन मोमो, भैंस के मांस वाले मोमो, मटन मोमो, पोर्क मोमो, वेज मोमो, पनीर मोमो, मशरूम मोमो और चीज मोमो. यही अलग-अलग वैराइटी मोमो को हर उम्र और हर स्वाद वाले लोगों की पसंद बना देती है. हालांकि, मोमो का असली जादू तो इसकी चटनी में छिपा होता है. अगर आप काठमांडू में किसी लोकल व्यक्ति से पूछें कि अच्छे मोमो की पहचान क्या है, तो वो सबसे पहले चटनी का ही नाम लेगा. काठमांडू की मोमो चटनी अपने अनोखे स्वाद के लिए दुनियाभर में मशहूर है. हैरानी की बात नहीं है कि वहां, हर दुकान की चटनी का स्वाद अलग होता है. इतना ही नहीं, कई लोग तो सिर्फ चटनी के लिए खास दुकान पर जाते हैं. मोमो की चटनी बनाने के लिए आमतौर पर बहुत ही सिंपल चीज़ें इस्तेमाल होती हैं. इममें टमाटर, भुने हुए तिल, मूंगफली, लहसुन, अदरक, नेपाली सिचुआन पेपर यानी तिमुर और हरी और लाल मिर्च शामिल होती हैं. इन सभी चीजों का मिश्रण चटनी को तीखा, स्मोकी और बहुत ही ज्यादा टेस्टी बना देता है.

खाना भी और कल्चर भी

नेपाल की राजधानी काठमांडू में मोमो को किसी फास्ट फूड की तरह नहीं देखा जाता. ये वहां के लोगों की डेली लाइफ का बड़ा और खास हिस्सा है. परिवार के लोग छुट्टी के दिन घर पर मिलकर मोमो बनाते हैं. दोस्तों की पार्टी हो या कोई छोटा फैमिली फंक्शन, मोमो लगभग हर खुशी के मौके पर जरूर दिखाई देता है. यहां तक कि कई घरों में अलग-अलग पीढ़ियां एक साथ बैठकर मोमो बनाने की परंपरा निभाती हैं.

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मोमो फेस्टिवल

काठमांडू में मोमो के लिए लोगों का प्यार इतना ज्यादा है कि यहां समय-समय पर मोनो फेस्टिवल, फूड फेयर और कुकिंग प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं. इन आयोजनों में शहर के मशहूर रेस्टोरेंट, शेफ और घरेलू कुक तक हिस्सा लेते हैं. लोग अलग-अलग तरह के मोमो का स्वाद लेते हैं और एक-दूसरे से नई-नई रेसिपी भी सीखते हैं. लोकल लोगों के अलावा वहां आने वाले टूरिस्टों के लिए भी ये किसी फूड पैराडाइज से कम नहीं होता.

टूरिस्टों की पहली पसंद

जो लोग पहली बार नेपाल घूमने जाते हैं, उनकी ट्रैवल लिस्ट में पशुपतिनाथ मंदिर, दरबार स्क्वायर और स्वयम्भूनाथ स्तूप शामिल होते हैं. इन सबके साथ-साथ काठमांडू के मशहूर मोमो भी लोगों की लिस्ट में शामिल होते हैं. कई विदेशी टूरिस्ट तो खासतौर पर यहां के स्ट्रीट फूड का स्वाद लेने ही नेपाल आते हैं. कई लोगों का ऐसा मानना है कि काठमांडू के मोमो जैसा स्वाद दुनिया में कहीं और नहीं मिलता.

भारत में भी लोकप्रिय

भारत के लगभग हर बड़े शहर में आज मोमो आसानी से मिल जाते हैं. दिल्ली-एनसीआर, दार्जिलिंग, गंगटोक, शिलांग, देहरादून, चंडीगढ़ और मुंबई जैसे शहरों में मोमो की भारी डिमांड है. सिर्फ जंग जेनेरेशन ही नहीं, बल्कि हर उम्र के लोगों में मोमो खाने का क्रेज बढ़ रहा है. यही वजह है कि इससे जुड़ा बिजनेस भी काफी लोगों को अपनी तरफ खींच रहा है. कई लोगों तो अपनी अच्छी-खासी नौकरियां छोड़कर मोमो का बिजनेस शुरू कर चुके हैं. इसी से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि भारत में मोमो खाने वालों की संख्या कितनी ज्यादा है. हालांकि, भारत में मिलने वाले मोमो में लोकल स्वाद के हिसाब से बदलाव किए गए हैं. कहीं तंदूरी मोमो मिलते हैं तो कहीं अफगानी मोमो. लेकिन काठमांडू का पारंपरिक स्वाद आज भी सबसे अलग माना जाता है. ऐसे में अगर आप खुद को फूडी मानते हैं और नई-नई डिश ट्राई करना पसंद करते हैं, तो काठमांडू आपके लिए एकदम परफेक्ट जगह है. यहां का हर मोड़, हर बाजार और हर गली मोमो की खुशबू से महकती रहती है. यही वजह है कि काठमांडू ने मोमो को सिर्फ एक खाने की चीज नहीं, बल्कि अपनी पहचान बना लिया है. स्वाद, परंपरा और संस्कृति का ये अनोखा संगम ही उसे दुनिया की असली ‘मोमो कैपिटल’ बनाता है.

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