Home Top News अमित शाह के बयान पर अड़ा विपक्ष, सरकार ने बदली रणनीति; रिजिजू बोले- गृह मंत्री जवाब देंगे

अमित शाह के बयान पर अड़ा विपक्ष, सरकार ने बदली रणनीति; रिजिजू बोले- गृह मंत्री जवाब देंगे

by Kamlesh Kumar Singh 10 August 2026, 5:08 PM IST (Updated 10 August 2026, 5:09 PM IST)
10 August 2026, 5:08 PM IST (Updated 10 August 2026, 5:09 PM IST)
Opposition stands firm Amit Shah statement

Monsoon Session : आखिरी तीन दिन में संसद के रण का नैरेटिव बदलने की कोशिश शुरू हो गई है. संसद के मानसून सत्र के आखिरी दौर में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है. ऐसे में 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर पिछले करीब तीन सप्ताह से जारी गतिरोध खत्म होने के बजाय और गहराता दिख रहा है. विपक्ष लगातार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सदन में बयान की मांग पर अड़ा हुआ है. वहीं, सरकार ने अब विपक्ष के सामने सीधी चुनौती रखते हुए कहा है कि गृह मंत्री सदन में न सिर्फ बयान देंगे, बल्कि पूरी बहस का जवाब भी देंगे. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से यह भी कहा कि जब अमित शाह सदन में जवाब दें तो विपक्ष हंगामा न करे और सदन से बाहर न जाए.

गृह मंत्री शाह संसद में जवाब देने के लिए तैयार

सरकार के इस रुख से साफ है कि उसने अब संसद में जारी गतिरोध की राजनीतिक जिम्मेदारी विपक्ष के पाले में डालने की रणनीति बनाई है. सरकार का तर्क है कि वह चर्चा से भाग नहीं रही है और विपक्ष के मुद्दों पर सदन में जवाब देने के लिए तैयार है. लेकिन विपक्ष लगातार हंगामा कर सदन की कार्यवाही बाधित कर रहा है. सरकार का सवाल है कि जब गृह मंत्री जवाब देने के लिए तैयार हैं तो विपक्ष सदन चलने क्यों नहीं दे रहा.

सरकार इस मामले पर स्थिति स्पष्ट करें

20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष पिछले कई दिनों से सरकार पर हमलावर है. विपक्ष का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस ने बल प्रयोग किया और इस पूरे मामले पर सरकार को सदन में जवाब देना चाहिए. विपक्ष की मांग है कि केंद्रीय गृह मंत्री स्वयं सदन में आकर इस मामले पर स्थिति स्पष्ट करें. इसी मांग को लेकर संसद के दोनों सदनों में लगातार गतिरोध देखने को मिला है. अब सरकार ने इस मांग को स्वीकार करने का संकेत देते हुए गेंद विपक्ष के पाले में डाल दी है. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बयान का राजनीतिक संदेश साफ है. सरकार चर्चा के लिए तैयार है, गृह मंत्री जवाब देने के लिए तैयार हैं. अब विपक्ष को भी सदन चलने देना चाहिए. सरकार की कोशिश यह स्थापित करने की है कि संसद में कामकाज बाधित होने के लिए वह नहीं, बल्कि विपक्ष जिम्मेदार है.

गतिरोध के कारण सदन का कामकाज प्रभावित हुआ

इस रणनीति के पीछे संसद के बचे हुए तीन दिनों का दबाव भी है. मानसून सत्र में अब तक हंगामे और गतिरोध के कारण सदन का कामकाज प्रभावित हुआ है. लोकसभा की कार्यवाही करीब 15 घंटे ही चल पाने का आंकड़ा सरकार के लिए विपक्ष पर हमला करने का आधार बन रहा है. सरकार यह भी रेखांकित कर रही है कि महज 41 मिनट में सात विधेयक बिना चर्चा के पारित हुए. हालांकि, विपक्ष इसे सरकार की जल्दबाजी बताता रहा है और उसका आरोप है कि जब सरकार खुद सदन में पर्याप्त चर्चा नहीं होने देती तो इसके लिए विपक्ष को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है.

बिना चर्चा के पारित हुआ बिल

विपक्ष के हंगामे के बीच ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल बिना चर्चा के पारित हो गया. इससे सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए हैं. सरकार का कहना है कि विधायी कामकाज को अनिश्चितकाल तक रोका नहीं जा सकता, जबकि विपक्ष का तर्क है कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के बिना विधेयकों को पारित करना संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है.

विपक्षी दल पहले आपसी मतभेद को खत्म करें

सरकार की ओर से कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच मुद्दों को लेकर मतभेद का संकेत भी दिया गया है. सरकार का कहना है कि विपक्षी दल पहले आपसी मतभेद सुलझाएं और उसके बाद सदन में आगे बढ़ें. यह सरकार की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है जिसमें विपक्षी एकजुटता को कमजोर दिखाकर संसद के गतिरोध का राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है.

विपक्ष ने दो मुद्दों पर जवाबदेही तय करने के लिए कहा

वहीं, विपक्ष भी अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं है. विपक्ष की ओर से स्पष्ट किया गया है कि उसके प्रमुख मुद्दे दो हैं. पहला चढ़ावा चोरी का मामला और दूसरा छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई. विपक्ष इन दोनों मुद्दों पर सदन में चर्चा और सरकार से जवाब चाहता है. विपक्षी सांसदों का कहना है कि जब तक गृह मंत्री छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई पर सदन में जवाब नहीं देते, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा. दोनों पक्षों के बीच मूल विवाद अब सिर्फ चर्चा को लेकर नहीं, बल्कि चर्चा की शर्तों को लेकर भी है. सरकार कह रही है कि वह चर्चा और जवाब दोनों के लिए तैयार है, जबकि विपक्ष चाहता है कि पहले उसके द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों पर सरकार स्पष्ट जवाब दे.

ये महत्वपूर्ण बिल पेंडिंग पड़े

इस बीच संसद के आखिरी तीन दिन कई अहम विधायी मुद्दों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो गए हैं. महिला आरक्षण, परिसीमन और FCRA जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों से जुड़े विधेयकों को लेकर अभी भी तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. सोमवार को चार विधेयक पेश किए गए, लेकिन इन बड़े राजनीतिक और संवैधानिक मुद्दों से जुड़े विधेयक एजेंडे में नहीं आए. ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार बचे हुए समय में इन विधेयकों को सदन में ला पाती है या नहीं.

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परिसीमन हो सकता है काफी विरोधाभास मुद्दा

खास तौर पर महिला आरक्षण और परिसीमन का मुद्दा आने वाले राजनीतिक वर्षों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. वहीं, FCRA संशोधन विधेयक को लेकर भी सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद हैं। सरकार इसे नियमन और पारदर्शिता से जोड़कर देख रही है, जबकि विपक्ष इसके कुछ प्रावधानों को लेकर सवाल उठा रहा है.

राजनीतिक नैरेटिव के लिए भी अहम है सत्र

ऐसे में संसद के आखिरी तीन दिन केवल विधायी कामकाज के लिहाज से नहीं, बल्कि राजनीतिक नैरेटिव के लिहाज से भी बेहद अहम होंगे. सरकार की कोशिश है कि वह यह संदेश दे कि वह चर्चा के लिए तैयार है और विपक्ष ही संसद को बाधित कर रहा है. दूसरी तरफ विपक्ष अपनी इस रणनीति पर कायम है कि सरकार को छात्रों पर हुई कार्रवाई और अन्य आरोपों पर जवाब देना होगा.

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमित शाह वास्तव में सदन में विपक्ष के सवालों का जवाब देंगे और क्या विपक्ष उस दौरान सदन में मौजूद रहकर चर्चा में हिस्सा लेगा? क्या दोनों पक्ष गतिरोध खत्म करने के लिए कोई बीच का रास्ता निकाल पाएंगे? और क्या संसद के बचे हुए तीन दिनों में महिला आरक्षण, परिसीमन और FCRA जैसे अहम मुद्दों पर कोई ठोस प्रगति हो पाएगी?

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