Athlete Lalit Patel : उम्र महज एक आंकड़ा है और अगर इंसान के भीतर जुनून, अनुशासन और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो जिंदगी कितनी भी मुश्किल क्यों न हो, मंजिल हासिल की जा सकती है. अहमदाबाद के 57 वर्षीय एथलीट ललित पटेल की कहानी इसका एक उदाहरण है. कभी महज 10 रुपये की तनख्वाह पर पान के गल्ले पर नौकरी करने वाले ललित पटेल आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन कर रहे हैं. ललित पटेल ने बैंकॉक में आयोजित वर्ल्ड पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में पावरलिफ्टिंग में तीन गोल्ड मेडल और बॉडीबिल्डिंग में दो गोल्ड मेडल जीतकर कुल पांच स्वर्ण पदक अपने नाम किए.
पान के गल्ले पर नौकरी से की शुरुआत
बॉडीबिल्डिंग में उन्होंने प्रतिष्ठित प्रो कार्ड भी हासिल किया. खास बात यह है कि 57 साल की उम्र में मास्टर कैटेगरी में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले ललित पटेल पावरलिफ्टिंग और बॉडीबिल्डिंग दोनों में अपनी पहचान बना चुके हैं. ललित पटेल का जीवन हमेशा उपलब्धियों से भरा नहीं रहा. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत महज 10 रुपये की तनख्वाह पर पान के गल्ले पर नौकरी से की थी. शादी के बाद उन्होंने पतंग और डोर बेचने का कारोबार शुरू किया. हालांकि, इस कारोबार के दौरान उनकी जिंदगी में एक बड़ा झटका आया.
कार्ड प्रिंटिंग का कारोबार शुरू किया
ललित पटेल के मुताबिक, डुप्लीकेट डोर बेचने के मामले में उनके खिलाफ केस दर्ज हुआ और उन्हें जेल जाना पड़ा. जेल जाने के बाद उनके आसपास के कुछ लोग उन्हें ताने मारते हुए ‘लुख्खो’ कहकर बुलाने लगे. लेकिन ललित पटेल ने इन तानों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. उन्होंने लोगों को जवाब देने के बजाय अपनी जिंदगी बदलने का फैसला किया. जेल से बाहर आने के बाद ललित पटेल ने दोबारा शुरुआत की. उन्होंने आमंत्रण पत्रिका यानी कार्ड प्रिंटिंग का कारोबार शुरू किया. मेहनत के दम पर उन्होंने इस कारोबार को आगे बढ़ाया. लेकिन कोरोना महामारी ने एक बार फिर उनकी जिंदगी में बड़ा संकट खड़ा कर दिया. कोरोना के दौरान उनके कारोबार को भारी नुकसान हुआ और उन्हें करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा.
शरीर और फिटनेस पर काम करना शुरू किया
कोरोना के बाद ललित पटेल की जिंदगी में एक बड़ा मोड़ आया. उनकी पत्नी ने उन्हें पावरलिफ्टिंग और बॉडीबिल्डिंग में आने के लिए प्रेरित किया. 57 साल की उम्र में जब आमतौर पर लोग आराम की जिंदगी की ओर बढ़ते हैं, तब ललित पटेल ने अपने शरीर और फिटनेस पर काम करना शुरू किया. उन्होंने नियमित ट्रेनिंग, अनुशासन और पोषण पर ध्यान दिया और धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए खुद को तैयार किया. आज उनकी मेहनत का परिणाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिखाई दे रहा है.12 से 14 जून 2026 के बीच बैंकॉक में आयोजित WRPF आयरन वर्ल्ड इंटरनेशनल पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में ललित पटेल ने टीम इंडिया का प्रतिनिधित्व किया.
3 स्पर्धाओं में तीन गोल्ड मेडल जीते
57 वर्षीय ललित पटेल ने मास्टर कैटेगरी में पावरलिफ्टिंग की तीन प्रमुख स्पर्धाओं (स्क्वॉट, बेंच प्रेस और डेडलिफ्ट) में हिस्सा लिया. उन्होंने कुल 400 किलोग्राम वजन उठाकर तीनों स्पर्धाओं में तीन गोल्ड मेडल अपने नाम किए. इसके बाद उन्होंने इसी चैंपियनशिप में बॉडीबिल्डिंग में भी हिस्सा लिया. यहां उन्होंने दो गोल्ड मेडल जीतने के साथ प्रतिष्ठित प्रो कार्ड हासिल किया. इस तरह एक ही अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में ललित पटेल ने पावरलिफ्टिंग और बॉडीबिल्डिंग में कुल पांच गोल्ड मेडल जीतकर देश का गौरव बढ़ाया. ललित पटेल की अंतरराष्ट्रीय सफलता का सिलसिला 2025 में भी देखने को मिला था.
अंतरराष्ट्रीय पावरलिफ्टिंग में पहचान बनाई
जून 2025 में थाईलैंड के पटाया में आयोजित पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में उन्होंने स्क्वॉट, बेंच प्रेस और डेडलिफ्ट में तीन गोल्ड मेडल जीते थे. उन्होंने तीनों स्पर्धाओं में संयुक्त रूप से 405 किलोग्राम वजन उठाया था. इस प्रदर्शन के बाद अंतरराष्ट्रीय पावरलिफ्टिंग में उनकी पहचान और मजबूत हुई. ललित पटेल की सफलता का एक और खास पहलू उनकी डाइट है. वे पूरी तरह शुद्ध शाकाहारी हैं. उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए ताकत और फिटनेस सिर्फ डाइट पर निर्भर नहीं करती, बल्कि अनुशासित ट्रेनिंग, पोषण और लगातार मेहनत भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. पावरलिफ्टिंग और बॉडीबिल्डिंग दोनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करना उन्हें अलग पहचान देता है.
‘लुख्खो’ नाम से बन रही है फिल्म
ललित पटेल की जिंदगी अब फिल्मी पर्दे पर भी दिखाई देने वाली है. उनके जीवन पर ‘लुख्खो द वर्ल्ड चैंपियन’ नाम से फिल्म बनाई जा रही है. फिल्म के नाम के पीछे भी उनकी जिंदगी की एक भावनात्मक कहानी है. ललित पटेल के मुताबिक, जेल जाने के बाद जब पुलिस उनके घर पहुंची तो आसपास के लोग उन्हें ताने मारते हुए ‘लुख्खो’ कहने लगे थे. उन्होंने लोगों से बहस करने या उन्हें जवाब देने के बजाय अपनी मेहनत पर ध्यान दिया. आज जिस नाम से उन्हें कभी बदनाम करने की कोशिश की गई थी, उसी नाम को उन्होंने अपनी पहचान बना लिया है. ललित पटेल का कहना है कि पावरलिफ्टिंग में तीन गोल्ड और एक ही चैंपियनशिप में बॉडीबिल्डिंग में दो गोल्ड मेडल जीतना उनके लिए बेहद खास उपलब्धि है. उनका मानना है कि उम्र या डाइट की पसंद किसी व्यक्ति की क्षमता तय नहीं करती. भारत का प्रतिनिधित्व करना और जीत के बाद राष्ट्रगान सुनना उनके लिए सबसे गौरवपूर्ण पलों में से एक है।उनकी जिंदगी की कहानी यह संदेश देती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, इंसान अगर मेहनत करना नहीं छोड़ता तो वह अपनी पहचान बदल सकता है.
तानों से लेकर तिरंगे तक का सफर
ललित पटेल की कहानी सिर्फ पांच गोल्ड मेडल की कहानी नहीं है. यह 10 रुपये की नौकरी से शुरू होकर जेल, कारोबार में करोड़ों के नुकसान और फिर अंतरराष्ट्रीय खेल मंच तक पहुंचने की कहानी है. जिन लोगों के तानों ने कभी उन्हें ‘लुख्खो’ कहा, आज वही नाम उनकी जिंदगी पर बनने वाली फिल्म का हिस्सा है. 57 साल की उम्र में ललित पटेल ने यह साबित किया है कि सपने देखने और उन्हें पूरा करने की कोई उम्र नहीं होती. उनकी कहानी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन सकती है कि जिंदगी में असफलता आए, मुश्किलें आएं या लोग ताने मारें, जवाब शब्दों से नहीं बल्कि अपनी मेहनत और कामयाबी से दिया जा सकता है. ललित पटेल की कहानी 10 रुपये की नौकरी से शुरू होकर पांच गोल्ड मेडल और ‘वर्ल्ड चैंपियन’ की पहचान तक पहुंचने की कहानी है.
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