Home Furnishing: घर सजाना अब सिर्फ खूबसूरत फर्नीचर खरीदने का नाम नहीं रह गया है. आज के समय में लोग चाहते हैं कि घर का हर सामान दिखने में स्टाइलिश होने के साथ-साथ कंफर्टेबल, उपयोगी और लंबे समय तक काम आने वाला भी हो. यही बदलाव सबसे ज्यादा सोफा और गद्दे यानी मैट्रेस की खरीदारी में देखने को मिल रहा है. पहले जहां लोग एक भारी-भरकम सोफा और सख्त गद्दा खरीदकर सालों तक उसी के साथ गुजारा कर लेते थे, वहीं अब पसंद काफी बदल गई है.
वर्क फ्रॉम होम, छोटे शहरों के अपार्टमेंट, बदलती लाइफस्टाइल और अच्छी नींद को लेकर बढ़ती अवेयरनेस ने फर्नीचर की खरीदारी का तरीका बदल दिया है. अब लोग सिर्फ ये नहीं देखते कि सोफा या गद्दा दिखने में कैसा है, बल्कि ये भी सोचते हैं कि वो उनकी जरूरत और लाइफस्टाइल के लिए कितना सही है.

स्मार्ट फर्नीचर की डिमांड
शहरों में घरों का साइज भले छोटा हो रहा हो, लेकिन जरूरतें कम नहीं हुई हैं. ऐसे में लोग ऐसा फर्नीचर पसंद कर रहे हैं जो एक से ज्यादा काम में लाया जा सके. सोफा कम बेड इसका बेहतरीन उदाहरण है. दिन में ये सोफा और रात में जरूरत पड़ने पर बेड बन सकता है. मॉड्यूलर सोफा भी काफी पसंद किया जा रहा है, क्योंकि इसे कमरे और जरूरत के हिसाब से अलग-अलग तरीके से लगाया जा सकता है. एल-शेप सोफा छोटे या कॉर्नर स्पेस का बढ़िया इस्तेमाल करता है. वहीं, स्टोरेज वाले बेड बेस कपड़े और दूसरे सामान रखने के लिए ज्यादा जगह देते हैं.
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सबके लिए एक गद्दा नहीं
एक टाइम था जब सख्त गद्दे को ही पीठ के लिए बेहतर माना जाता था. लेकिन अब लोगों की सोच बदल रही है. आज मैट्रेस खरीदते हुए अपनी सोने की पोजीशन, बॉडी शेप और कंफर्ट को ध्यान में रखा जाता है. साइड, बैक या पेट के बल सोने वाले लोगों की जरूरत अलग हो सकती है. इसके अलावा मेमोरी फोम, नेचुरल लेटेक्स और हाइब्रिड मैट्रेस जैसे ऑप्शन भी लोगों को अट्रैक्ट कर रहे हैं. भारत जैसे गर्म मौसम वाले देश में मैट्रेस की ब्रीदेबिलिटी और गर्मी को कंट्रोल करने की क्वालिटी भी देखी जा रही है. इसके अलावा कपल्स के लिए मोशन आइसोलेशन भी एक खास फीचर बन गया है. यानी अगर एक व्यक्ति रात में बार-बार करवट बदलता है तो दूसरे की नींद कम खराब हो, इसके लिए ऐसे मैट्रेस पसंद किए जा रहे हैं.

दिखावे से ज्यादा आराम का साथी
सोफे की बात करें तो पुराने टाइम के बहुत सख्त और फॉर्मल डिजाइन की जगह अब डीप और ज्यादा कुशन वाले सोफे पसंद किए जा रहे हैं. आखिरकार सोफा सिर्फ मेहमानों के बैठने की जगह नहीं है. टीवी देखना हो, मोबाइल चलाना हो या वीकेंड पर आराम करना हो, सोफा घर का खास हिस्सा बन चुका है.
नेचर की चिंता भी बढ़ी
आज के खरीदार ये भी जानना चाहते हैं कि उनके फर्नीचर में इस्तेमाल होने वाली चीज़ें कहां से आई है. सर्टिफाइड लकड़ी, नेचुरल लेटेक्स, रिसाइकल्ड फैब्रिक और ऑर्गेनिक मटेरियल जैसे ऑप्शन में लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है. ग्राहक अब उन ब्रांड्स को भी देख रहे हैं जो अपने मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस और मटेरियल की जानकारी ट्रांसपेरेंट तरीके से देते हैं.

ऑनलाइन शॉपिंग ने बदली मार्केट
अब सोफा खरीदने के लिए पूरा दिन अलग-अलग शोरूम घूमना जरूरी नहीं है. ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर घर बैठे कई डिजाइन, साइज और कीमतों की तुलना की जा सकती है. इसके अलावा लोग रिव्यू पढ़कर भी फैसला ले सकते हैं.
सबसे पहले अच्छी नींद
मैट्रेस खरीदते हुए अब लोग सिर्फ कीमत या ऑफर नहीं देखते. स्पाइनल अलाइनमेंट, प्रेशर पॉइंट्स, बैक सपोर्ट और हाइजीन जैसी चीजों पर भी ध्यान दिया जा रहा है. ऑर्थोपेडिक मैट्रेस, कूलिंग जेल लेयर, एडजस्टेबल फर्मनेस और एंटीमाइक्रोबियल कवर जैसे फीचर्स इसी बदलती सोच का नतीजा हैं. यानी भारतीय घरों में सोफा और मैट्रेस की पसंद अब सिर्फ ट्रेडिशन से तय नहीं होती. छोटे घर, बदलती लाइफस्टाइल, पर्यावरण को लेकर जागरूकता और बेहतर नींद की जरूरत ने खरीदारी का पूरा नजरिया बदल दिया है. आज का ग्राहक सुंदरता के साथ आराम और क्वालिटी भी चाहता है.
News Source: ANI
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