Iconic Forts in India: भारत सिर्फ अलग-अलग त्योहारों, स्वादिष्ट खाने और खूबसूरत प्राकृतिक नजारों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी ऐतिहासिक धरोहरों के लिए भी दुनिया भर में मशहूर है. देश के अलग-अलग हिस्सों में बने बड़े-बड़े किले आज भी बीते दौर की शान, वीरता और अद्भुत वास्तुकला की कहानी सुनाते हैं. इन किलों की ऊंची दीवारें, खूबसूरत महल, गुप्त रास्ते और युद्ध की यादें हर इतिहास प्रेमी को अपनी तरफ खीचती हैं. ऐसे में अगर आप साल 2026 में किसी ऐसी जगह जाने की प्लानिंग बना रहे हैं, जहां घूमने के साथ-साथ इतिहास को भी महसूस किया जा सके, तो भारत के ये ऐतिहासिक किले आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर होने चाहिए. आज हम भी आपके लिए उन शानदार किलों की लिस्ट लेकर आए हैं, जिन्हें हर ट्रैवलर को जिंदगी में कम से कम एक बार जरूर देखना चाहिए.

आमेर किला, राजस्थान
जयपुर से करीब 11 किलोमीटर दूर बना आमेर किला राजस्थान की सबसे खूबसूरत ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है. इस किले को 16वीं शताब्दी में राजा मान सिंह ने बनवाया था. ये किला हिंदू और मुगल वास्तुकला का एक बहुत ही खूबसूरत और बेहतरीन उदाहरण माना जाता है. लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर से बना आमेर का किला अपनी भव्यता के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है. यहां पहुंचते ही शाही दरवाजे, बड़े-बड़े आंगन और महलों की खूबसूरती लोगों का दिल जीत लेती है.
क्या देखें?
अगर आप आमेर जा रहे हैं, तो वहां का शीश महल देखना ना भूलें. शील महल में एक साथ हजारों शीशों की चमक आज भी लोगों को हैरान कर देती है. इसके अलावा दीवान-ए-आम और दीवान-ए-खास भी देखने लायक है. वहीं, माओटा झील का शानदार नजारा और हाथी की सवारी भी आपको अलग एक्सपीरियंस देगी. अगर आप फोटोग्राफी के शौकीन हैं तो सुबह या शाम का समय यहां घूमने के लिए सबसे बेहतरीन माना जाता है.
टाइमिंग
आमेर किला जयपुर से लगभग 11 किलोमीटर की दूरी पर है. जयपुर से आमेर के लिए सीधी बसें आसानी से मिल जाती हैं. इसके अलावा आप वन वे ट्रिप के लिए ऑटो या फिर कैब भी बुक कर सकते हैं. किले के ऊपर जाने के लिए मेन सड़क से आप पैदल भी जा सकते हैं. इसके अलावा राजस्थान पर्यटन की जीप सेवा भी ले सकते हैं. आमेर का किला हर दिन सुबह 8 बजे से शाम 5:30 बजे तक आम लोगों के लिए खुला रहता है.
टिकट
भारतीय टूरिस्टों को इस किले के अंदर जाने के लिए 100 रुपये की टिकट लेनी पड़ती है. अगर आप स्टूडेंट हैं, तो आईडी कार्ड दिखाकर 20 रुपये की टिकट में किला घूम सकते हैं. विदेशी टूरिस्टों को 500 रुपये की टिकट लेनी होती है और विदेशी छात्रों के लिए 150 रुपये की टिकट है.

ग्वालियर किला, मध्य प्रदेश
ग्वालियर शहर की ऊंची पहाड़ी पर बना ये विशाल किला भारत के सबसे मजबूत और ऐतिहासिक किलों में गिना जाता है. इसका इतिहास 8वीं शताब्दी तक पहुंचता है. मुगलों, तोमर राजाओं और मराठाओं सहित कई शासकों ने इस किले पर राज किया. इस किले की सबसे बड़ी खासियत इसकी मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और शानदार वास्तुकला है.
क्या खास है?
तोमर राजवंश का बनाया मान सिंह महल अपनी नीली टाइलों और खूबसूरत मीनाकारी आर्ट की वजह से मशहूर है. यहां गुजरी महल भी है, जो मानसिंह तोमर और रानी मृगनयनी के प्यार का प्रतीक है. अब ये महल संग्रहालय है. इस किले में एक सास-बहू मंदिर भी है. ये विष्णु मंदिर है जो अपनी खूबसूरत नक्काशी के लिए फेमस है. इसके अलावा किले में एक प्राचीन तेली मंदिर भी है. यहां गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ भी है, जो सिखों के छठे गुरु, गुरु हरगोबिंद साहिब की याद में बनाया गया था. अगर आप इतिहास और वास्तुकला दोनों में रुचि रखते हैं, तो ये किला आपको बिल्कुल निराश नहीं करेगा.
टाइमिंग
ग्वालियर का किला घूमने के लिए टाइमिंग का ध्यान रखना भी जरूरी है. किला सुबह 6 बजे से शाम 5:30 बजे तक खुला रहता है. बात करें ट्रांसपोर्ट की तो, ग्वालियर भारत के सभी बड़े शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. अगर आप प्लेन से जाना चाहते हैं, तो राजमाता विजयाराजे सिंधिया एयरपोर्ट अच्छा ऑप्शन है. ये शहर से सिर्फ 10-13 किलोमीटर दूर है. इसके अलावा ट्रेन से जाने वाले ग्वालियर जंक्शन पहुंचकर आसानी से शहर घूम सकते हैं.
टिकट
भारतीय टूरिस्टों के लिए किले के अंदर जाने के लिए 75 रुपये की टिकट है. विदेशी टूरिस्टों के लिए ये रकम 250 रुपये है. इसके अलावा 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए कोई टिकट नहीं लेनी पड़ती. इसके अलावा गुजरी महल देखने के लिए भारतीय टूरिस्टों को 20 रुपये पर व्यक्ति टिकट लेनी पड़ती है. वहीं, विदेशियों को 200 रुपये की टिकट खरीदनी होती है.

चित्तौड़गढ़ किला, राजस्थान
राजस्थान का चित्तौड़गढ़ किला वीरता, बलिदान और स्वाभिमान का प्रतीक माना जाता है. ये भारत के सबसे बड़े किलों में शामिल है. साथ ही इस किले को यूनेस्को विश्व धरोहर में भी शामिल किया गया है. रानी पद्मिनी, महाराणा प्रताप और मेवाड़ के गौरव से जुड़ी अनगिनत कहानियां इस किले की पहचान हैं. यहां घूमते समय ऐसा महसूस होता है जैसे इतिहास आज भी इन दीवारों में जिंदा है.
क्या है खास?
विजय स्तंभ, जिसे महाराणा कुंभा ने महमूद खिलजी पर जीत के बाद बनवाया था. ये 9 मंजिला टॉवर अपनी खूबसूरत नक्काशी के लिए मशहूर है. इसके अलावा यहां जौहर कुंड भी है. ये वही पवित्र जगह है, जहां रानी पद्मिनी ने जौहर किया था. इसके अलावा शाही महल और मंदिर भी चित्तौड़गढ़ की शान हैं. दुर्ग के अंदर ही राणा कुंभा महल, पद्मिनी पैलेस और कालिका माता, मिरा मंदिर जैसे 19 बड़े और ऐतिहासिक मंदिर बने हुए हैं. इन सबके अलावा किले के बड़े परिसर में करीब 20 बड़े तालाब और कुंड हैं.
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टाइमिंग
यहां घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च का टाइम सबसे बढ़िया रहता है. इस बीच मौसम अच्छा रहता है. अच्छे मौसम की वजह से इतने बड़े किले में पैदल घूमना आसान और मजेदार हो जाता है. हालांकि, अगर आपको हरियाली पसंद है, तो मानसून में ये किला और खूबसूरत लगने लगता है. बारिश में यहां के तालाब और कुंड पानी से भर जाते हैं. बात करें ट्रांसपोर्ट की तो, चित्तौड़गढ़ जंक्शन रेलवे स्टेशन इस किले से सिर्फ 5 से 6 किलोमीटर की दूरी पर है. स्टेशन से आप ऑटो या टैक्सी लेकर आसानी से कहीं भी पहुंच सकते हैं. इसके अलावा उदयपुर का महाराणा प्रताप एयरपोर्ट सबसे नज़दीक है. ये किले से लगभग 90 किलोमीटर दूर है. एयरपोर्ट से टैक्सी और बसों की सेवाएं उपलब्ध हैं.
टिकट
चित्तौड़गढ़ किले में एंट्री करने के लिए आपको टिकट खरीदनी होंगी. भारतीय नागरिकों के लिए ये 40 रुपये प्रति व्यक्ति है. अगर आप छात्र हैं, तो आपकी टिकट सिर्फ 25 रुपये लगेगी. विदेशी टूरिस्टों को 600 रुपये प्रति व्यक्ति देने होंगे. इसके अलावा 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए फ्री एंट्री है.

जैसलमेर किला, राजस्थान
अगर आपने कभी सुनहरे रंग का किला देखने का सपना देखा है, तो जैसलमेर किला आपकी उम्मीदों पर पूरी तरह खरा उतरेगा. इसे गोल्डन फोर्ट भी कहा जाता है, क्योंकि सूरज की रोशनी पड़ते ही पूरा किला सोने की तरह चमकने लगता है. इस अनोखे किले को 1156 ईस्वी में रावल जैसल ने बनवाया था. ये किला दुनिया के कुछ चुनिंदा लिविंग फोर्ट्स में शामिल है, जहां आज भी 3 से 4 हजार लोग रहते हैं. इस किले को बनाने में चूने या गारे का इस्तेमाल नहीं किया गया है. बल्कि पत्थरों को आपस में इंटरलॉक करके इस किले की दीवारें खड़ी की गई हैं.
क्या देखें?
अगर आप जैसलमेर किला देखने का मन बना रहे हैं, तो वहां का सुंदर जैन मंदिर देखना ना भूलें. यहां का रॉयल पैलेस 7 मंजिल का बड़ा सा महल है. किले के अंदर भगवान लक्ष्मीनाथ का मंदिर है. ये मंदिर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित है. ये किले का सबसे पुराना हिंदू मंदिर है, जिसे 1494 में बनवाया गया था. इस किले की एक और खासियत ये है कि इसके अंदर जाने के लिए 4 बड़े दरवाजों से गुजरना पड़ता है. इन दरवाजों के नाम हैं, गणेश पोल, अक्षय पोल, सूरज पोल और हवा पोल.
टाइमिंग
अच्छी बात ये है कि इस किले में घूमने के लिए कोई एंट्री फीस नहीं देनी पड़ती. हालांकि, किले के अंदर राज महल संग्रहालय देखने के लिए भारतीय को 50 रुपये और विदेशी टूरिस्टों को 250 रुपये की टिकट लेनी पड़ती है. ये किला और अंदर के मंदिर टूरिस्टों के लिए सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक खुला रहता है. यहां पहुंचने के लिए जैसलमेर रेवले स्टेशन सबसे पास है. ये किले से सिर्फ 2 से 3 किलोमीटर की दूरी पर है. आप स्टेशन से ऑटो या ई रिक्शा लेकर सीधे किले में एंट्री कर सकते हैं. वहीं, अगर आप कार से ट्रेवल कर रहे हैं, तो जोधपुर से जैसलमेर की दूरी 280 और जयपुर से 560 किलोमीटर है. वहीं, अगर आप फ्लाइट से आना चाहते हैं, तो जैसलमेर एयरपोर्ट किले से लगभग 13 किलोमीटर दूर है.
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